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आईआईटी दिल्ली में बिजली नियमों पर रिसर्च, अधिकारियों को मिलेगा प्रशिक्षण

Manohar Lal Khattar, Union Minister of Power and Minister of Housing and Urban Affairs, Ministry of Power and Minister of Housing and Urban Affairs, BJP, Bharatiya Janata Party
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5 Dariya News

नई दिल्ली , 19 Jan 2026

Last updated on: Jan 20, 2026, 12:22 IST

आईआईटी दिल्ली में पावर सेक्टर के लिए एक विशेष केंद्र की शुरुआत की गई है। इस केंद्र का मकसद देश के तेजी से बदलते बिजली क्षेत्र में रेगुलेशन को मजबूत करना है। यह सेंटर एक राष्ट्रीय स्तर का ज्ञान और शोध केंद्र होगा। यहां बिजली से जुड़े नियमों पर रिसर्च होगी, अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और नीति निर्माण में मदद की जाएगी। यहां नीति, नियम, सिस्टम संचालन और अकादमिक रिसर्च सब कुछ एक ही मंच पर आ जाएंगे। 

यह सेंटर आईआईटी दिल्ली, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी), और ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड के सहयोग से बनाया गया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को आईआईटी दिल्ली में पावर सेक्टर के लिए इस रेगुलेटरी अफेयर्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया। इसका मकसद देश के तेजी से बदलते बिजली क्षेत्र में नियमन (रेगुलेशन) की क्षमता को मजबूत करना है।

दरअसल, आज बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, नवीकरणीय ऊर्जा तेजी से जुड़ रही है, बिजली बाजार फैल रहे हैं, और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। ऐसे में मजबूत और समझदारी भरे नियम बहुत जरूरी हो गए हैं। यह सेंटर एक राष्ट्रीय स्तर का ज्ञान और शोध केंद्र होगा, जहां बिजली से जुड़े नियमों पर रिसर्च होगी। यह केंद्र सीईआरसी और ग्रिड इंडिया के साथ मिलकर बिजली क्षेत्र की चुनौतियों की पहचान करेगा, अधिकारियों और संस्थानों की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा, और उपयोगी जानकारी साझा करेगा। 

यहां आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिसर्च होगी। साथ ही नियामकों और बिजली क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों को सलाह भी दी जाएगी।केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा, प्रतिस्पर्धी बाजार और उपभोक्ता हितों पर केंद्रित सुधारों की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ज्ञान और शोध पर आधारित मजबूत नियमन बहुत जरूरी हो जाता है। आईआईटी दिल्ली का यह सेंटर इसी दिशा में अहम योगदान देगा। 

यह सेंटर बिजली क्षेत्र की तीन बड़ी चुनौतियों—सस्ती बिजली, पर्यावरण संरक्षण और कुशल व्यवस्था—पर संतुलन बनाने में नीति और नियम तय करने वालों की मदद करेगा। इससे वितरण कंपनियों और नियामक आयोगों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और अधिकारियों को ऐसे आधुनिक विश्लेषणात्मक टूल्स मिलेंगे, जिनसे वे उपभोक्ताओं के हित, ग्रिड की विश्वसनीयता और निवेश के असर को बेहतर तरीके से समझ सकें।

आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने बताया कि सीईआरसी और ग्रिड इंडिया के साथ साझेदारी कर यह नया सेंटर शुरू करना हमारे लिए खुशी की बात है। इससे बिजली क्षेत्र को टिकाऊ, सस्ता और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद मिलेगी।वहीं, सीईआरसी के चेयरमैन जिष्णु बरुआ के मुताबिक, अच्छे नियम तभी बनते हैं जब उनके पीछे ठोस आंकड़े, सही विश्लेषण और लंबी सोच हो। यह सेंटर बिजली क्षेत्र में शोध और तथ्यों पर आधारित नीति निर्माण को मजबूत करेगा। 

यह सेंटर बिजली नियमों, बाजार डिजाइन, ग्रिड संचालन, ऊर्जा परिवर्तन, डीकार्बनाइजेशन, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा भंडारण, डिमांड रिस्पॉन्स और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे विषयों पर काम करेगा। साथ ही, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए लंबे समय तक नियामक क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा।विशेषज्ञ मानते हैं कि सीईआरसी, ग्रिड इंडिया और आईआईटी दिल्ली की यह साझेदारी एक अनोखा मॉडल है, जो भारत के बिजली क्षेत्र के लिए मजबूत, लचीले और भविष्य के अनुकूल नियम बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

 

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