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कागजी फाइल से डिजिटल फॉर्म तक, जानिए आजादी से अब तक आम बजट में क्या-क्या बदला

Nirmala Sitharaman, Union Minister for Finance and Corporate Affairs, BJP, Bharatiya Janata Party
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नई दिल्ली , 12 Jan 2026

Last updated on: Jan 13, 2026, 12:34 IST

देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा, और इसी के साथ वह लगातार 9 बार बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी। वहीं, भारत के इतिहास का यह 80वां केंद्रीय बजट होगा।  भारत का केंद्रीय बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सोच और नीतिगत दिशा का आईना भी होता है। 

आजादी के बाद से लेकर अब तक बजट की तारीख, समय, प्रस्तुति की शैली और उसकी प्राथमिकताओं में कई बड़े बदलाव हुए हैं। समय के साथ भारत की अर्थव्यवस्था बदली और उसी के साथ बजट की परंपराएं भी आधुनिक होती चली गईं।भारत में पहली बार बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था। हालांकि उस समय देश ब्रिटिश शासन के अधीन था। 

आजाद भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। इसे तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी ने संसद में प्रस्तुत किया। यह बजट आजादी के बाद की शुरुआती आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, जिसमें देश के पुनर्निर्माण और बुनियादी जरूरतों पर फोकस था।इसके बाद से अब तक बजट की प्रक्रिया में कई बड़े और ऐतिहासिक बदलाव हुए हैं।

लंबे समय तक भारत में केंद्रीय बजट हर साल 28 फरवरी को पेश किया जाता रहा। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही थी। लेकिन साल 2017 में मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए बजट की तारीख 1 फरवरी कर दी। इसका मकसद यह था कि बजट से जुड़ी योजनाएं नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से पहले ही लागू की जा सकें और राज्यों को भी अपनी योजनाएं बनाने के लिए ज्यादा समय मिल सके।

साल 2019 से पहले बजट को चमड़े के ब्रीफकेस में संसद लाया जाता था। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस परंपरा को बदलते हुए बजट को लाल रंग के कपड़े में लपेटकर पेश किया।पहले बजट दस्तावेज भारी-भरकम कागजी फाइलों में पेश किए जाते थे। लेकिन साल 2021 में पहली बार भारत का केंद्रीय बजट पूरी तरह डिजिटल फॉर्म में पेश किया गया। इसके साथ ही 'बजट ऐप' भी लॉन्च किया गया, जिससे आम लोग आसानी से बजट से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकें।

आजादी के बाद कई दशकों तक भारत में अलग से रेल बजट पेश किया जाता था। लेकिन साल 2017 में रेल बजट को केंद्रीय बजट में ही शामिल कर दिया गया। सरकार का तर्क था कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और रेलवे के विकास को समग्र आर्थिक नीति से जोड़ा जा सकेगा।एक समय ऐसा था जब भारत का बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। 

लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार (वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा) ने बजट की टाइमिंग बदलकर सुबह 11 बजे कर दी। तब से लेकर आज तक बजट इसी समय पेश किया जाता है।वहीं आम बजट 2026-27 को लेकर चर्चाएं तेज हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इस बार बजट की तारीख 1 फरवरी 2026 को रविवार है। इसे लेकर असमंजस की स्थिति जरूर है, लेकिन संसदीय इतिहास बताता है कि जरूरत पड़ने पर शनिवार और रविवार जैसे अवकाश वाले दिन भी कार्यदिवस घोषित किए जा चुके हैं।

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि इस पर अंतिम फैसला संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा सही समय पर लिया जाएगा।अगर 1 फरवरी को बजट पेश होता है, तो यह कोई नई बात नहीं होगी। 2020 में कोविड महामारी के दौरान रविवार को संसद की कार्यवाही हुई थी।वर्ष 2015 और 2016 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को बजट पेश किया था। 2025 में निर्मला सीतारमण ने भी शनिवार को बजट प्रस्तुत किया था।

शुरुआती दौर में बजट का फोकस कृषि, सिंचाई और बुनियादी ढांचे पर था। समय के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया, ग्रीन एनर्जी और सामाजिक कल्याण जैसे विषय बजट की प्राथमिकताओं में शामिल होते गए। आज का बजट आत्मनिर्भर भारत, रोजगार सृजन और समावेशी विकास पर केंद्रित नजर आता है।

केंद्रीय बजट में हुए ये बदलाव दिखाते हैं कि भारत की आर्थिक नीति समय के साथ अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और आधुनिक होती गई है। तारीख से लेकर समय और प्रस्तुति के तरीके तक, हर बदलाव का उद्देश्य देश के विकास को गति देना और नीतियों को जमीन पर जल्दी उतारना रहा है।

 

Tags: Nirmala Sitharaman , Union Minister for Finance and Corporate Affairs , BJP , Bharatiya Janata Party

 

 

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