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राजनाथ सिंह ने पोत समुद्र प्रताप को आईसीजी में शामिल किया, यह गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत है

भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े का यह सबसे बड़ा पोत भारत की पर्यावरणीय प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने और तटीय गश्ती एवं समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तैनात किया गया है

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गोवा , 05 Jan 2026

Last updated on: Jan 06, 2026, 14:44 IST

भारत द्वारा जहाज निर्माण और समुद्री क्षमता विकास में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 5 जनवरी, 2026 को गोवा में भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) में 'समुद्र प्रताप' को शामिल किया। यह गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) द्वारा निर्मित दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला है। 

60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से निर्मित, समुद्र प्रताप देश का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत है और भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े का अब तक का सबसे बड़ा पोत है। समुद्र प्रताप के शामिल होने से प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन, समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। 

इससे भारत के विशाल समुद्री क्षेत्रों में विस्तारित निगरानी और प्रतिक्रिया अभियानों को संचालित करने की क्षमता भी मजबूत होगी। रक्षा मंत्री ने इस पोत को भारत के परिपक्व रक्षा औद्योगिक इको-सिस्टम का प्रतीक बताया, जिसमें जटिल विनिर्माण चुनौतियों को प्रभावी ढंग से निपटना की क्षमता है, और कहा कि जहाजों में स्वदेशी सामग्री को 90 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि समुद्र प्रताप को विशेष रूप से प्रदूषण नियंत्रण के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन इसकी भूमिका केवल इसी तक सीमित नहीं है। एक ही प्लेटफॉर्म में कई क्षमताओं को एकीकृत करने के कारण, यह जहाज तटीय गश्ती में प्रभावी साबित होगा और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा। यह गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा अपनाए गए आधुनिक दृष्टिकोण का परिणाम है, जिसका उद्देश्य वर्तमान समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए लचीलापन और तत्परता बढ़ाना है।

रक्षा मंत्री ने समुद्री प्रदूषण से लेकर तटीय स्वच्छता, खोज एवं बचाव से लेकर समुद्री कानून प्रवर्तन तक, बहुआयामी भूमिका निभाने के लिए तटरक्षक बल की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से तटरक्षक बल अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा है, उससे देश के शत्रुओं को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि यदि वे भारत की समुद्री सीमाओं पर बुरी नजर डालने या किसी भी प्रकार का दुस्साहस करने का साहस करते हैं, तो उन्हें करारा और मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

यह जहाज उन्नत प्रदूषण पहचान प्रणालियों, प्रदूषण से निपटने के लिए विशेष नौकाओं और आधुनिक अग्निशमन क्षमताओं से सुसज्जित है। इसमें हेलीकॉप्टर हैंगर और विमानन सहायता सुविधाएं भी हैं, जो इसकी पहुंच और प्रभावशीलता को काफी बढ़ा सकती हैं। श्री राजनाथ सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि इन क्षमताओं के कारण, यह पोत खराब समुद्री परिस्थितियों में भी स्थिर रूप से काम कर सकेगा, जिससे वास्तविक परिचालन में बहुत लाभ मिलेगा।

रक्षा मंत्री ने जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापवृद्धि की चुनौतियों के बीच समुद्री पर्यावरण संरक्षण को न केवल एक रणनीतिक आवश्यकता है, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने तेल रिसाव प्रतिक्रिया, अग्निशमन और बचाव कार्यों को अंजाम देने के लिए भारतीय तटरक्षक बल की सराहना की, जिससे भारत उन्नत पर्यावरणीय प्रतिक्रिया क्षमताओं वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है। 

उन्होंने कहा, “त्वरित पहचान, सटीक स्टेशन-कीपिंग और कुशल रिकवरी प्रणालियों के माध्यम से समुद्र प्रताप क्षमताओं को और मजबूत करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रदूषण की घटनाओं को समय पर नियंत्रित किया जाए, जिससे प्रवाल भित्तियों, मैंग्रोव, मत्स्य पालन और समुद्री जैव विविधता को नुकसान से बचाया जा सके। यह तटीय समुदायों और नीली अर्थव्यवस्था की स्थिरता से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।”

श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि स्वच्छ समुद्र सुरक्षित व्यापार, सुरक्षित जीवन और सुरक्षित पर्यावरण की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल के समुद्र प्रताप जैसे प्लेटफार्म इस बात का भरोसा दिलाते हैं कि भारत न केवल अपनी समुद्री जिम्मेदारियों को समझता है, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। 

उन्होंने कहा कि समुद्र प्रताप का शामिल होना भारत के व्यापक समुद्री दृष्टिकोण से जुड़ा है। उन्होंने कहा, “हमारा मानना ​​है कि समुद्री संसाधन किसी एक देश की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि मानवता की साझा विरासत हैं। और जब विरासत साझा होती है, तो उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी साझा होती है। यही कारण है कि भारत आज विश्व मंच पर शांति, स्थिरता और पर्यावरण संबंधी जिम्मेदारी के सिद्धांतों के साथ मजबूती से खड़ा है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री अनिश्चितता के वर्तमान दौर में भारत ने बार-बार यह साबित किया है कि वह न केवल अपने हितों की रक्षा करता है, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता को भी सुनिश्चित करता है। उन्होंने आगे कहा कि यह दृष्टिकोण भारत को एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति बनाता है। श्री राजनाथ सिंह ने उभरते प्रौद्योगिकी-आधारित और बहुआयामी खतरों के बीच समुद्री क्षेत्र को निरंतर मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। 

उन्होंने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल केवल एक प्रतिक्रियावादी बल के रूप में कार्य नहीं कर सकता; इसे एक सक्रिय बल के रूप में उभरना होगा, और सरकार इस प्रयास को सहयोग देने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। चाहे वह नए जहाजों का अधिग्रहण हो, नई इकाइयां स्थापित करने के लिए भूमि का पट्टा हो या मानव संसाधन से संबंधित मामले हों, हम भारतीय तटरक्षक बल को हर पहलू में आधुनिक बनाने के लिए प्रयासरत हैं।

पहली बार, इस जहाज पर दो महिला अधिकारी होंगी। रक्षा मंत्री ने सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप समावेशी और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए आईसीजी की सराहना करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि आज महिला अधिकारियों को पायलट, ऑब्जर्वर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, लॉजिस्टिक्स ऑफिसर और लॉ ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया जा रहा है, साथ ही उन्हें होवरक्राफ्ट संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अग्रिम मोर्चे पर सक्रिय रूप से तैनात किया जा रहा है। उ

न्होंने कहा कि आज महिलाएं न केवल सहायक भूमिका निभा रही हैं, बल्कि अग्रिम मोर्चे पर योद्धाओं के रूप में राष्ट्र की सेवा कर रही हैं। भारतीय तटरक्षक बल के समुद्र प्रताप में नियुक्त दोनों महिला अधिकारी भावी पीढ़ियों के लिए आदर्श हैं। भारतीय तटरक्षक बल सभी के लिए अवसरों और विकास का स्रोत बना रहेगा। भारतीय तटरक्षक बल के आत्मनिर्भरता प्रयासों की सराहना करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार का 'आत्मनिर्भर भारत' का नारा अब कार्यशैली का हिस्सा बन गया है। 

उन्होंने कहा कि मेक-इन-इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहलों के अनुरूप, भारतीय तटरक्षक बल ने स्वदेशी संसाधनों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज हमारे तटरक्षक जहाजों और विमानों का निर्माण, रखरखाव और मरम्मत देश में ही हो रही है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। रक्षा मंत्री ने वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय तटरक्षक बल के लिए एक प्लेटफॉर्म-केंद्रित बल से खुफिया-आधारित और एकीकरण-केंद्रित बल में परिवर्तित होने के महत्व पर जोर दिया। 

उन्होंने समुद्री कानून प्रवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और समुद्री साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारतीय तटरक्षक बल के अंदर विशिष्ट कैरियर स्ट्रीम विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में भारतीय तटरक्षक बल ने क्षेत्रीय स्तर पर मानक स्थापित किए हैं और अब समय आ गया है कि इस भूमिका को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाया जाए। 

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हमें समुद्री प्रशासन के क्षेत्र में मानदंड तय करने होंगे, क्षमता निर्माण पहलों को मजबूत करना होगा और सहयोगात्मक ढांचों को बढ़ावा देना होगा। भारतीय तटरक्षक बल को अपने परिचालन सिद्धांतों, संस्थागत प्रथाओं और तकनीकी नवाचारों को ऐसे उच्च मानकों तक पहुंचाना होगा कि उनकी सर्वोत्तम प्रणालियों का विश्व स्तर पर अनुसरण किया जाए। 

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय तटरक्षक बल रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, आईसीजी के महानिदेशक परमेश शिवमणि, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री ब्रजेश कुमार उपाध्याय और केंद्र एवं राज्य सरकारों के अधिकारी उपस्थित थे।

समुद्र प्रताप के बारे में

समुद्र प्रताप, जिसका अर्थ है समुद्रों के वैभव को सुरक्षित, स्वच्छ और स्वच्छ समुद्र सुनिश्चित करने और राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा करने के संकल्प को दर्शाता है। इस जहाज का विस्थापन 4,170 टन, लंबाई 114.5 मीटर और गति 22 समुद्री मील से अधिक है। यह दो 7,500 किलोवाट डीजल इंजनों द्वारा संचालित है, जो स्वदेशी रूप से विकसित नियंत्रणीय पिच प्रोपेलर और गियरबॉक्स द्वारा संचालित होते हैं, जिससे यह उत्कृष्ट गतिशीलता, लचीलापन और 6 हजार समुद्री मील की सहनशक्ति प्रदान करता है।

यह पोत अत्याधुनिक प्रणालियों से सुसज्जित है, जिनमें पार्श्व-स्वीपिंग आर्म, फ्लोटिंग बूम, उच्च क्षमता वाले स्किमर, पोर्टेबल बार्ज और प्रदूषण नियंत्रण प्रयोगशाला शामिल हैं। जहाज में बाह्य अग्निशमन प्रणाली (एफआई- एफआई क्लास 1) भी लगी है और स्वचालन एवं मिशन दक्षता बढ़ाने के लिए इसमें डायनेमिक पोजिशनिंग, इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम और ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम जैसी उन्नत प्रणालियां एकीकृत हैं। 

इसके शस्त्रागार में 30 मिमी सीआरएन-91 तोप और दो 12.7 मिमी स्थिर रिमोट-नियंत्रित तोपें शामिल हैं, जो आधुनिक अग्नि-नियंत्रण प्रणालियों द्वारा समर्थित हैं। यह जहाज कोच्चि में तैनात रहेगा और तटरक्षक क्षेत्र (पश्चिम) के कमांडर के परिचालन नियंत्रण में रहेगा, जिसका संचालन तटरक्षक जिला मुख्यालय संख्या 4 (केरल और माहे) के माध्यम से किया जाएगा।

 

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