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आईडब्ल्यूएआई ने पूर्वोत्तर में अंतर्देशीय जलमार्ग और औद्योगिक संपर्क को बढ़ावा देने के लिए भारत समुद्री सप्ताह 2025 में 3,000 करोड़ रुपये के प्रमुख समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

सर्बानंद सोनोवाल ने एनईआर की प्रमुख परियोजनाओं, बोगीबील में एप्रोच रोड और एलिवेटेड रोड के लिए अवधारणा अध्ययन की समीक्षा की

Sarbananda Sonowal, BJP, Bharatiya Janata Party, Union Minister of Ports Shipping and Waterways, Ministry of Ports Shipping and Waterways, Inland Waterways Authority of India, IWAI
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नई दिल्ली , 21 Nov 2025

Last updated on: Nov 22, 2025, 15:50 IST

पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत जलमार्ग विकास हेतु नोडल एजेंसी भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने असम के अंतर्देशीय जल परिवहन नेटवर्क और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स को मज़बूत करने के लिए दो प्रमुख समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते एक असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड के साथ और दूसरा असम सरकार के साथ राज्य की विस्तृत नदी प्रणालियों के माध्यम से माल और यात्रियों की आवाजाही को बढ़ावा देने, सतत संपर्क और क्षेत्रीय विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए हैं। 

पूर्वोत्तर में कई परियोजनाओं के विकास के मद्देनजर केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) श्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में सभी परियोजनाओं पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों समेत आईडब्ल्यूएआई के साथ एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें केंद्रीय क्षेत्र योजना (सीएसएस) के तहत परियोजनाएं भी शामिल थीं।

आईएमडब्ल्यू में आईडब्ल्यूएआई और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (एपीएल) के बीच पहले समझौता ज्ञापन का उद्देश्य भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट (आईबीपीआर) और राष्ट्रीय जलमार्गों (एनडब्ल्यू) के माध्यम से मेथनॉल और फॉर्मेलिन के परिवहन के लिए सहयोग करना है। इस पहल से बोगीबील, पांडु और जोगीघोपा स्थित आईडब्ल्यूएआई जेटी से बांग्लादेश और दक्षिण पूर्व एशिया के गंतव्यों तक निर्यात सुगम होगा, साथ ही राष्ट्रीय जलमार्ग-1 और 2 के माध्यम से घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी मजबूती मिलेगी।

यह परियोजना केंद्र सरकार की प्रमुख पहल ‘पीएम गति शक्ति - मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के अनुरूप है और इससे असम के निर्यात और औद्योगिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। एपीएल वर्तमान में सालाना 1.98 लाख मीट्रिक टन मेथनॉल और 1.15 लाख मीट्रिक टन फॉर्मेलिन का उत्पादन करता है और नई व्यवस्था इन उत्पादों के थोक, लागत-प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को सक्षम बनाएगी। 

इस पहल के लिए कुल निवेश 400 करोड़ रुपए आंका गया है, जिसमें टैंकर जहाजों और संबंधित बुनियादी ढांचे की खरीद शामिल है। आईडब्ल्यूएआई अपने बोगीबील, पांडु और जोगीघोपा टर्मिनलों पर सुविधाओं, नेविगेशन सहायता, बंकरिंग सुविधाओं और अग्निशमन प्रणालियों सहित व्यापक परिचालन और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। 

यह एपीएल को 500 से 1,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले 10 फ्लैट-बॉटम टैंकर बार्ज विकसित करने में भी मदद करेगा। एपीएल निर्बाध कार्गो आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए रसद, पोत संचालन और वैधानिक मंजूरी का समन्वय करेगा। आईडब्ल्यूएआई और असम सरकार के बीच हस्ताक्षरित दूसरा समझौता ज्ञापन तेजपुर, गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ में शहरी जल परिवहन (यूडब्ल्यूटी) प्रणाली या जल मेट्रो के विकास और संवर्धन पर केंद्रित है। 

इस परियोजना का उद्देश्य ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे एक निर्बाध और टिकाऊ जल-आधारित गतिशीलता नेटवर्क स्थापित करना है, जो  सड़क, रेलमार्ग और बस प्रणालियों जैसे मौजूदा परिवहन साधनों के साथ एकीकृत हो। इस अवसर पर बोलते हुए श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "ये समझौता ज्ञापन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं, जिनके नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र अंतर्देशीय जलमार्ग संपर्क और औद्योगिक अवसरों के केंद्र में परिवर्तित हो रहा है। 

हम इस क्षेत्र में अंतर्देशीय जलमार्ग इको-सिस्टम को इष्टतम उपयोग के लिए विकसित करने, संभावनाओं का पता लगाने और उन्हें विकास, व्यापार और सततता को बढ़ावा देने वाले ठोस अवसरों में बदलने के अपने इरादे पर दृढ़ता से कायम हैं।" यूडब्ल्यूटी परियोजना फेयरवे, नेविगेशन सहायक उपकरण और यात्री टर्मिनल विकसित करेगी, साथ ही इलेक्ट्रिक हाइब्रिड यात्री नौकाओं की सहायता से एक आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली का निर्माण करेगी। 

कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (केएमआरएल) राज्य सरकार के परामर्श से एक व्यवहार्यता अध्ययन कर रहा है। परियोजना की अनुमानित लागत 1,000 करोड़ रुपए है, जिसमें भूमि लागत शामिल नहीं है। समुद्री कौशल विकास केंद्र (एमएसडीसी) में आयोजित समीक्षा बैठक में 15 प्रमुख परियोजनाओं के साथ-साथ 10 केंद्रीय क्षेत्र योजना (सीएसएस) परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें मिज़ोरम में 3, नागालैंड में 2, त्रिपुरा में 2 और असम, मेघालय और मणिपुर में 1-1 परियोजनाएँ शामिल हैं। 

इस कार्यक्रम में सीएसएस के तहत दो अनुशंसित नई परियोजनाओं, अरुणाचल प्रदेश और असम में एक-एक, पर भी चर्चा की गई। बैठक में कार्गो-सह-पर्यटक टर्मिनल तक सुगम आवागमन के लिए बोगीबील में एक बारहमासी पहुंच मार्ग के लिए एक अवधारणा अध्ययन को भी मंजूरी दी गई।

नदी क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने नए क्रूज जहाजों को विकसित करने और शामिल करने तथा राष्ट्रीय जलमार्गों पर क्रूज संचालन का विस्तार करने के लिए हेरिटेज रिवर जर्नीज़ प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। 

इस साझेदारी का उद्देश्य प्रीमियम पर्यटन अनुभवों को मज़बूत करना और ब्रह्मपुत्र तथा अन्य प्रमुख नदियों की विरासत और प्राकृतिक आकर्षण का दोहन करना है। इस समझौता ज्ञापन का मूल्य 500 करोड़ रुपए है। आईडब्ल्यूएआई और दीपस्तंभ एवं दीपपोत महानिदेशालय (डीजीएलएल) ने असम में राष्ट्रीय जलमार्ग 2 (एनडब्ल्यू-2) पर नदी नौवहन सुरक्षा बढ़ाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित करने हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। 

इस साझेदारी का उद्देश्य बोगीबील, सिलघाट, विश्वनाथ घाट और पांडु में नदी दीपस्तंभों और संबद्ध बुनियादी ढांचे का विकास और स्थापना करना है, जो नौवहन के लिए महत्वपूर्ण सहायक के रूप में काम करेंगे और ब्रह्मपुत्र नदी पर चलने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य नदी दीपस्तंभों को पर्यावरण-पर्यटन और विरासत पर्यटन के केंद्र के रूप में बढ़ावा देकर उनकी पर्यटन क्षमता को उजागर करना है। रेनस लॉजिस्टिक्स के साथ 1,000 करोड़ रुपए के एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन से गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों पर आधुनिक टग-बार्जों को शामिल करना संभव होगा, जिससे माल परिवहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और पूर्वोत्तर के लिए मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा। 

इसके अलावा, नेमाटी, सिलघाट, विश्वनाथ घाट और गुइजान में क्रूज टर्मिनलों के विकास के लिए 299 करोड़ रुपए का निवेश निर्धारित किया गया है। डिब्रूगढ़ में 188 करोड़ रुपए की परियोजना लागत वाले क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र के विकास के लिए और गुवाहाटी में एक महत्वपूर्ण भूखंड के विकास हेतु 55 करोड़ रुपए की योजना के साथ दो अन्य समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए। 

आईपीआरसीएल द्वारा नियुक्त सलाहकारों के माध्यम से समर्थित ये परियोजनाएं असम की नदी अर्थव्यवस्था में एक परिवर्तनकारी चरण को दर्शाती हैं और राज्य को देश में अंतर्देशीय जलमार्ग संपर्क और क्रूज पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करती हैं। श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि पड़ोसी बाज़ारों में उत्पादों के निर्यात के लिए हमारा सहयोग और डिब्रूगढ़ में एक क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र का निर्माण नवाचार और वैश्विक एकीकरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हम अपने जलमार्गों को विकास, समृद्धि और गौरव के इंजनों में बदल रहे हैं, जो पूर्वोत्तर के भविष्य को नया आकार दे रहे हैं। मिज़ोरम में आईडब्ल्यूएआई क्षेत्रीय संपर्क और नदी-आधारित गतिशीलता को मज़बूत करने के लिए प्रमुख अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। 

त्लौंग नदी और छिमटुईपुई नदी पर अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) अवसंरचना के लिए अध्ययन कार्य चल रहा है, जिनकी परियोजना लागत क्रमशः 0.89 करोड़ रुपए और 1.42 करोड़ रुपए है। इसके अतिरिक्त, लुंगलेई ज़िले में खावथलांगटुईपुई-तुइचावंग खंड पर अंतर्देशीय जल परिवहन अवसंरचना विकसित करने हेतु 9.82 करोड़ रुपए की परियोजना के चरण-I के अंतर्गत निर्माण कार्य शुरू हो गया है। 

इस परियोजना में थेकादुआर और त्लाबुंग में दो नदी टर्मिनल, फ्लोटिंग गैंगवे के साथ दो एचडीपीई फ्लोटिंग जेटी और आउटबोर्ड जेट से सुसज्जित नई यात्री नौकाएं शामिल हैं, जो इस क्षेत्र में यात्रियों की सुरक्षित और अधिक कुशल आवाजाही को सक्षम बनाती हैं। नागालैंड में आईडब्ल्यूएआई दोयांग झील पर अंतर्देशीय जल परिवहन सुविधाओं के विकास और नौने एवं शिलोई झीलों पर वाटर स्पोर्ट्स एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सीएसएस के अंतर्गत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रहा है। 

मणिपुर में बराक नदी और उसकी सहायक नदियों के साथ-साथ इम्फाल और नम्बुल नदियों पर सीएसएस के अंतर्गत अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) विकसित करने के लिए एक तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता अध्ययन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रस्तावित की गई है। मेघालय में, उमियम झील और उमंगोट नदी (एनडब्ल्यू-106) पर आईडब्ल्यूटी अवसंरचना विकसित करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।

त्रिपुरा में आईडब्ल्यूएआई क्षेत्रीय संपर्क और पर्यटन को मज़बूत करने के लिए दो प्रमुख पहलों को आगे बढ़ा रहा है। गुमटी नदी के विकास और बांग्लादेश की मेघना नदी प्रणाली के साथ नौवहन संपर्क स्थापित करने के लिए 24.53 करोड़ रुपए की एक परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना में एक नौवहन चैनल का विकास, तट सुरक्षा कार्य, नौ तैरते पंटून टर्मिनलों का निर्माण और नौवहन सहायक उपकरणों की स्थापना शामिल है। 

इसके अलावा, राज्य में पर्यटन और अवकाश के दौरान नदी यात्रा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से धलाई ज़िले की डंबूर झील पर एक क्रूज जहाज सेवा शुरू करने के लिए अध्ययन चल रहा है। अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) अवसंरचना के विकास के लिए एक प्रस्ताव शुरू किया गया है । 

इस परियोजना में टर्मिनलों का निर्माण, भवन, शेड, आंतरिक सड़कें, रास्ते, बाड़, घाट और सौर अवसंरचना जैसी संबंधित सुविधाएं, साथ ही फ्लोटिंग जेटी, फेयरवे विकास और नौवहन सहायक उपकरण लगाना शामिल है। प्रस्ताव में यात्री आवागमन और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए फेरी सेवाओं, एफआरपी नौकाओं और उच्च गति वाली लेजर बोट्स जैसे वेसेल का प्रावधान भी शामिल है।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि मिज़ोरम, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में चल रही परियोजनाएं आधुनिक अंतर्देशीय जलमार्ग (आईडब्ल्यूटी) अवसंरचना के माध्यम से इस क्षेत्र को बदलने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। नदी संपर्क, पर्यटन और व्यापार गलियारों को बढ़ाकर हम नए आर्थिक अवसरों को सामने ला रहे हैं और इस क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के साथ और अधिक निकटता से जोड़ रहे हैं। 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में पूर्वोत्तर हमारी शक्तिशाली नदियों के पुनरुद्धार द्वारा संचालित संपर्क और आर्थिक पुनरुत्थान के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। हमारा लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में अंतर्देशीय जलमार्ग (आईडब्ल्यूटी) के विकास के लिए 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करना है। 

माल ढुलाई, नदी पर्यटन और सीमा पार व्यापार को मजबूत करने के लिए नई साझेदारियों के साथ अंतर्देशीय जलमार्ग हमारे लोगों के लिए अवसरों की जीवन रेखा बन रहे हैं । ये पहलें आर्थिक परिवर्तन के इंजन के रूप में क्षेत्र के अंतर्देशीय जलमार्गों और नदियों की विशाल क्षमता को क्रियाशील करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को दर्शाती हैं।

 

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