उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि “जो लोग अलगाववादियों और आतंकवादियों की भाषा बोलते हैं, वे हमारे शहीदों के बलिदान का अपमान करते हैं और उनकी आत्मा को ठेस पहुँचाते हैं। ऐसे तत्वों के विरुद्ध देश के कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।“
उन्होंने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की भूमि देश की एकता और अखंडता के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के शहीदों के खून और बलिदान से सराबोर है। यदि कोई भारत की संप्रभुता और पुलिस शहीदों की स्मृतियों का अपमान करता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
यह बातें उपराज्यपाल ने 20वें जम्मू-कश्मीर पुलिस शहीद स्मृति फुटबॉल टूर्नामेंट के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन के दौरान कही। एलजी ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के वीर जवानों की देशहित के लिए की गई निःस्वार्थ सेवाओं और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया तथा कहा कि उन्होंने सुरक्षा, स्थिरता और प्रदेश की प्रगति एवं समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया है।
उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर हमारी सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के वीर जवानों की त्याग-परंपरा का प्रतीक है। इसलिए शहीदों की स्मृतियों को संजोना केवल सुरक्षा बलों की ही जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। हमारे वीर जवानों ने समाज के सपनों को पूरा करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
शांति, प्रगति और समृद्धि उनके सर्वोच्च बलिदान से ही संभव हो पाई है। समाज सिपाहियों के इन बलिदानों का ऋण कभी अदा नहीं कर सकता, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके शौर्य को और उनके परिजनों को हमेशा सम्मान मिले।” उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर पुलिस बल की “सिविक एक्शन प्रोग्राम“ के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाने की सराहना की।
उन्होंने खिलाड़ियों के साथ संवाद किया और विजेताओं व उत्.ष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों व टीमों को ट्रॉफियाँ और नकद पुरस्कार प्रदान किए। फाइनल मुकाबले में जम्मू-कश्मीर बैंक ने कश्मीर एवेंजर्स फुटबॉल क्लब को पराजित कर 20वें जम्मू-कश्मीर पुलिस शहीद स्मृति फुटबॉल टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया।
इस अवसर पर डीजीपी नलिन प्रभात, विशेष डीजी समन्वय पीएचक्यू एस.जे.एम. गिलानी, एडीजीपी आम्र्ड आनंद जैन, पुलिस व सिविल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, फुटबॉल एसोसिएशन और क्लबों के सदस्य, प्रमुख खेल हस्तियाँ और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।