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राजनाथ सिंह ने दिग्गज मिग-21 को विदाई दी, इसकी स्थायी विरासत की सराहना की

मिग-21 विमान ने 1971 के युद्ध में अपनी निर्णायक भूमिका से लेकर करगिल संघर्ष, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर तक हर युद्ध क्षेत्र में अपनी अद्वितीय क्षमता एवं विश्वसनीयता का परिचय दिया है : राजनाथ सिंह

Rajnath Singh, Union Defence Minister, Defence Minister of India, BJP, Bharatiya Janata Party, Military, Indian Army, Indian Air Force, MiG 21, Advanced Medium Combat Aircraft, AMCA
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चंडीगढ़ , 26 Sep 2025

Last updated on: Sep 26, 2025, 18:43 IST

मिग-21 की विरासत भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई गति देती रहेगी। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 26 सितंबर, 2025 को चंडीगढ़ में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान (आईएएफ) मिग-21 के सेवामुक्त करने के समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि “यह विमान साहस, अनुशासन एवं देशभक्ति की उस निरंतर परंपरा का प्रतीक है, जो हल्के लड़ाकू विमान-तेजस और आगामी उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) जैसे स्वदेशी प्लेटफार्मों के विकास को प्रेरणा देती रहेगी।” 

इस समारोह में मिग-21 की अंतिम परिचालन उड़ान भरी गई, जिसके साथ भारतीय वायुसेना के इतिहास का छह दशकों से अधिक लंबा और गौरवशाली अध्याय संपन्न हुआ। रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर जोर देकर कहा कि आने वाले समय में जब विश्व भारत की ओर देखेगा, तो उसे एक ऐसे राष्ट्र के रूप में जानेगा, जिसने मिग-21 से शुरुआत की और अब भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने भारतीय वायुसेना के उन सभी योद्धाओं की वीरता एवं समर्पण को नमन किया, जिन्होंने साहस और बलिदान के माध्यम से राष्ट्र की संप्रभुता, एकता व अखंडता की रक्षा की। उन्होंने मिग-21 की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक विमान नहीं, बल्कि सैन्य वायु क्षेत्र में भारत के उत्थान का प्रतीक, राष्ट्रीय रक्षा का सुदृढ़ कवच और 1963 में शामिल होने के बाद से सशस्त्र बलों का विश्वसनीय साथी रहा है। 

रक्षा मंत्री ने बताया कि विश्वभर के लिए 11,500 से अधिक मिग-21 विमानों का निर्माण हुआ, जिनमें से लगभग 850 भारतीय वायुसेना का हिस्सा बने, जो इसकी लोकप्रियता, विश्वसनीयता और बहुआयामी क्षमताओं का स्पष्ट प्रमाण है। रक्षा मंत्री ने स्मरण किया कि मिग-21 ने युद्ध और संघर्ष के हर मोर्चे पर अपनी अद्वितीय क्षमता का परिचय दिया है। 

उन्होंने कहा कि इसने 1971 के युद्ध में प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद ढाका स्थित गवर्नर हाउस पर निर्णायक हमला कर भारत की विजय को गति देने से लेकर, करगिल संघर्ष, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। 

उन्होंने कहा, “हर ऐतिहासिक मिशन में मिग-21 ने तिरंगे को गौरव के साथ फहराया है। इसका योगदान किसी एक घटनाक्रम या युद्ध तक सीमित नहीं, बल्कि दशकों से यह भारत की वायु शक्ति का सशक्त स्तंभ रहा है। श्री राजनाथ सिंह ने इस विमान की बहुमुखी प्रतिभा पर प्रकाश डालते हुए मिग-21 को "सभी मौसमों का पक्षी" बताया। 

उन्होंने कहा कि यह विमान दुश्मन के विमानों को रोकने वाले इंटरसेप्टर, आक्रामक क्षमता प्रदर्शित करने वाले जमीनी हमले के प्लेटफॉर्म, भारतीय आकाश की रक्षा करने वाले अग्रिम पंक्ति के वायु रक्षा जेट और अनगिनत पायलटों को तैयार करने वाले प्रशिक्षक विमान के रूप में हर भूमिका में उत्कृष्ट रहा है। 

उन्होंने कहा कि हमारे अत्यधिक कुशल लड़ाकू पायलटों की नींव मिग-21 पर ही रखी गई। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस महान मंच पर खड़े होकर वायु योद्धाओं की पीढ़ियों ने कठिनतम परिस्थितियों में उड़ान भरना, परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालना और सफलता अर्जित करना सीखा है। 

उन्होंने कहा कि भारत की वायु रणनीति को आकार देने में इसकी भूमिका अनुपम और अविस्मरणीय है। श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मिग-21 ने अपने डिजाइनरों और ऑपरेटरों की अपेक्षाओं से कहीं अधिक प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि 1950 के दशक के एक जेट से विकसित होकर यह एक दुर्जेय और उन्नत प्लेटफॉर्म बन गया, जिसे त्रिशूल, विक्रम, बादल तथा बाइसन जैसे नामों से पहचान मिली। 

मिग-21 ने हमें सिखाया कि परिवर्तन से भयभीत होने के बजाय उसे आत्मविश्वास के साथ अपनाना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत का रक्षा इकोसिस्टम हमारी अनुसंधान प्रयोगशालाएं, शिक्षा जगत, रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम, निजी उद्योग, स्टार्टअप और युवा अर्थात सभी मिलकर इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने मिग-21 की आयु को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि 1960 और 70 के दशक में शामिल प्रारंभिक विमान पहले ही सेवानिवृत्त कर दिए गए थे और वर्तमान में सेवा में मौजूद विमान अधिकतम 40 वर्ष पुराने हैं, जो विश्वभर में लड़ाकू विमानों के लिए सामान्य जीवनकाल माना जाता है। 

उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के निरंतर प्रयासों से मिग-21 को आधुनिक रडार, एवियोनिक्स और हथियार प्रणालियों के साथ तकनीकी रूप से उन्नत बनाए रखा गया। एचएएल के इंजीनियरों तथा वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, “उनके अथक परिश्रम ने मिग-21 को दशकों तक तकनीकी रूप से प्रासंगिक और युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रखा।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस विदाई समारोह को केवल एक औपचारिक सैन्य परंपरा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भारत के सभ्यतागत लोकाचार का प्रतीक भी है। उन्होंने भारतीय दर्शन का हवाला देते हुए कहा, “हमारी प्राचीन संस्कृति सिखाती है कि देवत्व केवल जीवित प्राणियों में नहीं, बल्कि निर्जीव वस्तुओं में भी वास करता है।” 

रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार हम धरती, नदियों, वृक्षों और हमारे सेवा उपकरणों की पूजा करते हैं, उसी प्रकार आज मिग-21 को विदाई देना उस विमान के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, जिसने हमारे आकाश की रक्षा की तथा 60 वर्षों से अधिक समय तक देशवासियों का विश्वास अर्जित किया। 

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह क्षण दशहरा पर्व पर शस्त्रों के अनुष्ठानों के समान है, जो राष्ट्र को सशक्त बनाने वाले सभी तत्वों के प्रति सम्मान और निरंतरता का संदेश देता है। रक्षा मंत्री ने चंडीगढ़ के विशेष महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यही वह स्थान है, जहां से भारत की सुपरसोनिक यात्रा आरंभ हुई थी, जब मिग-21 को 28वें स्क्वाड्रन में शामिल किया गया, जो 'पहला सुपरसोनिक' था। 

इस धरती ने उस गौरवशाली अध्याय को देखा है, जिसने भारत की वायु शक्ति की नए सिरे से परिभाषा रची। उन्होंने कहा, “आज इतिहास पूर्ण हुआ है, क्योंकि हम उसी स्थान से उसी महान विमान को विदाई दे रहे हैं। इस समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के नेतृत्व में एक भव्य फ्लाईपास्ट आयोजित किया गया, जो एक दुर्लभ एवं प्रतीकात्मक संकेत था और भारतीय वायुसेना के इस महान विमान के प्रति गहन सम्मान को दर्शाता है। 

इस कार्यक्रम में आकाशगंगा स्काईडाइविंग प्रदर्शन, मिग-21 द्वारा उड़ान, बादल व पैंथर फॉर्मेशन, एयर वॉरियर ड्रिल टीम, सूर्य किरण एरोबैटिक टीम की सटीक ड्रिल मूवमेंट तथा कॉम्बैट एयर पेट्रोल का ऐतिहासिक आयोजन हुआ, जिसमें जगुआर और मिग-21 का प्रतीकात्मक फ्लाईपास्ट भी शामिल था। 

समारोह का विशेष आकर्षण मिग-21 और एलसीए तेजस का संयुक्त फ्लाईपास्ट था, जिसने प्रसिद्ध बाइसन से स्वदेशी तेजस तक के सफर को दर्शाया। गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में छह मिग-21 विमानों को औपचारिक रूप से विदाई दी गई, जिससे उनके परिचालन जीवन का गौरवशाली समापन हुआ। 

विमान से संबंधित सभी दस्तावेज — फॉर्म-700 — 23 स्क्वाड्रन के अधिकारियों और वायुसैनिकों तथा 28 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर द्वारा वायुसेना प्रमुख को सौंपे गए। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने मिग-21 की विरासत को सम्मानित करते हुए एक विशेष स्मारक दिवस कवर और डाक टिकट जारी किया। 

इसके बाद उन्होंने मेमोरी लेन संग्रहालय का दौरा किया और वायु योद्धाओं तथा पूर्व सैनिकों के साथ बाराखाना में भाग लेकर इस ऐतिहासिक क्षण को साझा किया। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, डीडीआरएंडडी सचिव एवं डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत और वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) डॉ. मयंक शर्मा भी उपस्थित थे। 

समारोह में भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी, भूतपूर्व सैनिक, इंजीनियर, तकनीशियन, ग्राउंड क्रू और वे वायु योद्धा शामिल हुए, जिन्होंने मिग-21 के लंबे एवं गौरवशाली परिचालन जीवन के दौरान इसके साथ कार्य किया।

 

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