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नरेंद्र मोदी ने मिजोरम में 9,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया

आइजोल के लिए पहली रेल लिंक को हरी झंडी दिखाई

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आइजोल (मिजोरम) , 13 Sep 2025

Last updated on: Sep 13, 2025, 17:07 IST

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज मिजोरम के आइजोल में 9000 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं से रेलवे, सड़क मार्ग, ऊर्जा, खेल सहित कई क्षेत्र लाभान्वित होंगे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने नीले पहाड़ों की इस खूबसूरत धरती के संरक्षक, परम पूज्य भगवान पाथियन को नमन किया। 

उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि वे मिजोरम के लेंगपुई हवाई अड्डे पर मौजूद हैं और मौसम खराब होने के कारण आइजोल में लोगों से मिल सके। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद वे इस माध्यम से भी लोगों के प्यार और स्नेह को महसूस कर सकते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि चाहे स्वतंत्रता आंदोलन हो या राष्ट्र निर्माण, मिजोरम के लोग योगदान देने के लिए हमेशा आगे आए हैं। उन्होंने कहा कि लालनु रोपुइलियानी और पासल्था खुआंगचेरा जैसी विभूतियों के आदर्श राष्ट्र को प्रेरित करते रहते हैं। श्री मोदी ने कहा कि त्याग और सेवा, साहस और करुणा, मिज़ो समाज में गहराई से समाहित हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा, "आज, मिजोरम भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।" इस दिन को देश, विशेषकर मिजोरम के लोगों के लिए ऐतिहासिक बताते हुए, श्री मोदी ने कहा, "आज से आइजोल भारत के रेलवे मानचित्र पर होगा।" अतीत को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ वर्ष पहले उन्हें आइजोल रेलवे लाइन की नींव रखने का अवसर मिला था। 

उन्होंने इस रेलवे लाइन को देश को समर्पित किया। श्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि दुर्गम क्षेत्र सहित कई चुनौतियों के बावजूद बैराबी-सैरांग रेल लाइन अब एक वास्तविकता बन गई है। उन्होंने इंजीनियरों के कौशल और श्रमिकों की भावना की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ही यह उपलब्धि संभव हो पाई है।

प्रधानमंत्री कहा कि लोग और देश हमेशा मन से सीधे जुड़े रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा की कि पहली बार, मिज़ोरम का सैरांग राजधानी एक्सप्रेस द्वारा दिल्ली से सीधे जुड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक रेल संपर्क नहीं है, बल्कि परिवर्तन की जीवन रेखा है और यह मिज़ोरम के लोगों के जीवन और आजीविका में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। 

श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि मिज़ोरम के किसान और व्यवसाय अब देश भर के अधिक बाजारों तक पहुंच सकेंगे। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के ज़्यादा विकल्प मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इस विकास से पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय से देश में कुछ राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका ध्यान ज़्यादा वोट और सीटें पाने वाले क्षेत्रों पर रहा। परिणामस्वरूप, मिज़ोरम जैसे राज्यों सहित पूरे पूर्वोत्तर को इस रवैये से भारी नुकसान उठाना पड़ा। 

श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि वर्तमान दृष्टिकोण बहुत अलग है और जो लोग पहले उपेक्षित थे, वे अब सबसे आगे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग कभी हाशिए पर थे, वे अब मुख्यधारा का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों से सरकार पूर्वोत्तर के विकास के लिए निरंतर काम कर रही है। 

उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र देश का विकास इंजन बन रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर के कई राज्य पहली बार भारत के रेल मानचित्र पर शामिल हुए हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत सरकार ने सभी प्रकार की कनेक्टिविटी- ग्रामीण सड़कें और राजमार्ग, मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन, बिजली, नल से जल और एलपीजी कनेक्शन को मजबूत करने के लिए अथक प्रयास किए हैं। 

उन्होंने यह भी घोषणा की कि मिजोरम को हवाई यात्रा के लिए उड़ान योजना का भी लाभ मिलेगा और बताया कि इस क्षेत्र में जल्द ही हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू होंगी। श्री मोदी ने कहा कि इससे मिजोरम के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच में काफी सुधार होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, "एक्ट ईस्ट नीति और उभरते उत्तर-पूर्व आर्थिक गलियारे, दोनों में मिज़ोरम की प्रमुख भूमिका है।" 

उन्होंने कहा कि कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और सैरांग-ह्मांगबुचुआ रेल लाइन से मिजोरम दक्षिण-पूर्व एशिया के माध्यम से बंगाल की खाड़ी से जुड़ जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि इस कनेक्टिविटी से उत्तर-पूर्व भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

श्री मोदी ने कहा कि मिजोरम के युवा प्रतिभाशाली हैं। सरकार का लक्ष्य उन्हें सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि मिजोरम में 11 एकलव्य आवासीय विद्यालय पहले से ही शुरू किए जा चुके हैं और 6 और विद्यालय शुरू करने का कार्य चल रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र स्टार्ट-अप के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। 

उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि इस क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 4,500 स्टार्ट-अप और 25 इनक्यूबेटर चल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मिज़ोरम के युवा इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं और अपने और दूसरों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि देश तेजी से वैश्विक खेलों के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। इससे देश में खेल अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि मिजोरम में खेलों की समृद्ध परंपरा रही है और मिजोरम ने फ़ुटबॉल व अन्य खेलों में कई चैंपियन दिए हैं। 

उन्होंने कहा कि मिजोरम को सरकार की खेल नीतियों का भरपूर लाभ मिल रहा है। श्री मोदी ने कहा कि खेलो इंडिया योजना के तहत आधुनिक खेल ढांचों के निर्माण के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने हाल ही में एक राष्ट्रीय खेल नीति - खेलो इंडिया खेल नीति - शुरू की है। 

उन्होंने कहा कि यह पहल मिज़ोरम के युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगी। प्रधानमंत्री ने देश और विदेश में पूर्वोत्तर की खूबसूरत संस्कृति के राजदूत की भूमिका निभाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने पूर्वोत्तर की क्षमता को प्रदर्शित करने वाले मंचों को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया। 

कुछ महीने पहले दिल्ली में आयोजित अष्ट लक्ष्मी महोत्सव में अपनी भागीदारी को याद करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि इस महोत्सव में पूर्वोत्तर के वस्त्र, शिल्प, जीआई-टैग उत्पादों और पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित किया गया। राइजिंग नॉर्थ ईस्ट समिट में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने निवेशकों को इस क्षेत्र की विशाल क्षमता का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि यह समिट बड़े पैमाने पर निवेश और परियोजनाओं को आकर्षित कर रहा है। 

श्री मोदी ने आगे कहा कि वोकल फॉर लोकल पहल से पूर्वोत्तर के कारीगरों और किसानों को बहुत लाभ होगा। उन्होंने कहा कि मिजोरम के बांस उत्पाद, ऑर्गेनिक अदरक, हल्दी और केले प्रसिद्ध हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि सरकार जीवन और व्यापार में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 

"हाल ही में अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार लागू किए गए हैं और इसका मतलब है कि कई उत्पादों पर कर कम होंगे, जिससे परिवारों का जीवन आसान होगा।" उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से पहले टूथपेस्ट, साबुन और तेल जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों पर भी 27 प्रतिशत कर लगता था, जबकि आज इन वस्तुओं पर केवल 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है। 

श्री मोदी ने कहा कि विपक्ष के शासनकाल में दवाओं, जांच किट और बीमा पॉलिसियों पर भारी कर लगाया जाता था। इससे स्वास्थ्य सेवा महंगी हो गई और आम परिवारों के लिए बीमा पहुंच से बाहर हो गया था। उन्होंने कहा कि आज, ये सभी सेवाएं और उत्पाद किफायती हो गए हैं। 

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि नई जीएसटी दरों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाइयां भी सस्ती हो जाएंगी। 22 सितंबर के बाद सीमेंट और विनिर्माण सामग्री भी सस्ती हो जाएगी। श्री मोदी ने बताया कि स्कूटर और कार बनाने वाली कई कंपनियों ने पहले ही कीमतें कम कर दी हैं। 

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी त्योहारी सीजन पूरे देश में और भी ज़्यादा उत्साहपूर्ण होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधारों के तहत ज़्यादातर होटलों पर जीएसटी घटाकर केवल 5 प्रतिशत कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अब विभिन्न स्थानों की यात्रा करना, होटलों में ठहरना और बाहर खाना-पीना ज़्यादा किफ़ायती हो जाएगा। 

श्री मोदी ने कहा कि इससे ज़्यादा लोग देश के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करने, उन्हें देखने और उनका आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित होंगे। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर जैसे पर्यटन केंद्रों को इस बदलाव से विशेष रूप से लाभ होगा। श्री मोदी ने कहा, "भारत की अर्थव्यवस्था में 2025-26 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 

इसका मतलब है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है।" उन्होंने आगे कहा कि देश के मेक इन इंडिया और निर्यात में भी वृद्धि हो रही है। ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने देखा कि कैसे भारतीय सैनिकों ने आतंक को प्रायोजित करने वालों को सबक सिखाया। 

उन्होंने कहा कि पूरे देश को सेना पर गर्व है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान देश की रक्षा में मेड-इन-इंडिया हथियारों ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने आगे कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के समापन पर प्रत्येक नागरिक, प्रत्येक परिवार और प्रत्येक क्षेत्र के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि एक विकसित भारत का निर्माण उसके लोगों के सशक्तिकरण से होगा और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मिज़ोरम के लोग इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। 

प्रधानमंत्री ने आइज़ोल को हार्दिक बधाई दी और देश के रेलवे मानचित्र में शामिल होने पर उसका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हालांकि वे खराब मौसम के कारण आइज़ोल नहीं आ सके लेकिन उन्हें विश्वास है कि वे जल्द ही मिलेंगे। इस कार्यक्रम में मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी.के. सिंह, मिजोरम के मुख्यमंत्री श्री लालदुहोमा, केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री ने 8,070 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली बैराबी-सैरांग नई रेल लाइन का उद्घाटन किया। यह मिजोरम की राजधानी को पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। 

चुनौतीपूर्ण पहाड़ी क्षेत्र में निर्मित इस रेल लाइन परियोजना में जटिल भौगोलिक परिस्थितियों में 45 सुरंगें बनाई गई हैं। इसके अलावा इसमें 55 बड़े और 88 छोटे पुल भी शामिल हैं। इस रेल संपर्क से मिज़ोरम और देश के बाकी हिस्सों के लोगों को सुरक्षित, कुशल और किफ़ायती यात्रा का विकल्प मिलेगा। इससे खाद्यान्न, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित होगी। 

इससे समग्र रसद तक पहुंच और क्षेत्रीय सुगम्यता में वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर तीन नई एक्सप्रेस ट्रेनों, सैरांग (आइजोल)-दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) राजधानी एक्सप्रेस, सैरांग-गुवाहाटी एक्सप्रेस और सैरांग-कोलकाता एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई।

आइजोल अब राजधानी एक्सप्रेस के माध्यम से दिल्ली से सीधा जुड़ जाएगा। सैरांग-गुवाहाटी एक्सप्रेस मिजोरम और असम के बीच आवाजाही को सुगम बनाएगी। सैरांग-कोलकाता एक्सप्रेस मिज़ोरम को कोलकाता से सीधे जोड़ेगी। इस बेहतर कनेक्टिविटी से अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और बाजारों तक पहुंच बेहतर होगी। 

इससे पूरे क्षेत्र में शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और क्षेत्र में पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ने कई सड़क परियोजनाओं की नींव रखी। इनमें आइजोल बाईपास रोड, थेनज़ोल-सियालसुक रोड और खानकाउन-रोंगूरा रोड शामिल हैं।

प्रधानमंत्री की पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास पहल (पीएम-डिवाइन) योजना के तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 45 किलोमीटर लंबी आइजोल बाईपास सड़क का उद्देश्य आइजोल शहर को भीड़भाड़ से मुक्त करना, लुंगलेई, सियाहा, लॉन्ग्टलाई, लेंगपुई हवाई अड्डे और सैरांग रेलवे स्टेशन आदि से संपर्क में सुधार करना है। 

इससे दक्षिणी जिलों से आइजोल तक यात्रा का समय लगभग 1.5 घंटे कम हो जाएगा, जिससे क्षेत्र के लोगों को काफी लाभ होगा। पूर्वोत्तर विशेष अवसंरचना विकास योजना एनईएसआईडीएस (सड़क) के तहत थेनजोल-सियालसुक रोड से कई बागवानी किसानों, ड्रैगन फल उत्पादकों, धान की खेती करने वालों और अदरक प्रसंस्करणकर्ताओं को लाभ होगा, साथ ही आइजोल-थेनजोल-लुंगलेई राजमार्ग के साथ संपर्क मजबूत होगा।

प्रधानमंत्री ने लॉन्ग्टलाई-सियाहा रोड पर छिमटुईपुई रिवर ब्रिज की नींव भी रखी। यह सभी मौसमों में खुला रहेगा और इससे यात्रा के समय में दो घंटे की कमी आएगी। इस ब्रिज से कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ढांचे के तहत सीमा पार व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने खेलों के विकास के लिए खेलो इंडिया बहुउद्देशीय इंडोर हॉल की नींव रखी। तुइकुआल में यह हॉल एक बहुउद्देशीय इनडोर क्षेत्र सहित आधुनिक खेल सुविधाएं प्रदान करेगा जिससे मिज़ोरम के युवाओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए लाभ और प्रोत्साहन मिलेगा।

क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करते हुए, प्रधानमंत्री ने आइज़ोल के मुआलखांग में 30 टीएमटीपीए (हजार मीट्रिक टन प्रति वर्ष) क्षमता वाले एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की नींव रखी। इसका उद्देश्य मिज़ोरम और पड़ोसी राज्यों में एलपीजी की निरंतर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना और स्वच्छ रसोई ईंधन तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना है। 

इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) योजना के अंतर्गत कवर्था में आवासीय विद्यालय का भी उद्घाटन किया। मामित आकांक्षी ज़िले में स्थित इस विद्यालय में आधुनिक कक्षाएं, छात्रावास और कृत्रिम फ़ुटबॉल मैदान सहित खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। 

इससे 10,000 से ज़्यादा बच्चों और युवाओं को लाभ होगा और यह दीर्घकालिक सामाजिक और शैक्षिक प्रगति की नींव रखेगा। सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अपने दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, प्रधानमंत्री ने त्लांगनुआम में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय का भी उद्घाटन किया। इससे विद्यालय नामांकन में सुधार होगा, स्कूल छोड़ने की दर को कमी आएगी और आदिवासी युवाओं को समग्र शिक्षा के अवसर मिलेंगे।

 

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