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द्रौपदी मुर्मू एआईआईएसएच के हीरक जयंती समारोह में शामिल हुईं

Droupadi Murmu, President of India, President, Indian President, Rashtrapati, Thaawar Chand Gehlot, Thawar Chand Gehlot, Thaawarchand Gehlot, Siddaramaiah, All India Institute of Speech and Hearing, AIISH, Mysuru, Karnataka
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मैसूरु (कर्नाटक) , 01 Sep 2025

Last updated on: Sep 02, 2025, 11:52 IST

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने आज (1 सितम्बर, 2025) कर्नाटक के मैसूरु में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग (एआईआईएसएच) के हीरक जयंती समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि अन्य समस्याओं की तरह, बोलने और सुनने संबंधी समस्याओं के लक्षणों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान और उनके निदान के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। 

समाज को जागरूक होना चाहिए और बोलने और सुनने की समस्याओं से पीड़ित लोगों के प्रति सहयोग और सहानुभूति का भाव रखना चाहिए। उन्हें खुशी है कि एआईआईएसएच इन सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि एक अखिल भारतीय संस्थान के रूप में, एआईआईएसएच को भारत और विदेशों के संस्थानों के लिए एक आदर्श के रूप में स्थापित होने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि एआईआईएसएच द्वारा स्थापित 'समावेशी थेरेपी पार्क' भारत और विदेशों में एक आदर्श के रूप में कार्य कर रहा है, जिसे संचार विकारों से प्रभावित बच्चों के लिए डिज़ाइन किया गया है। 'एआईआईएसएच आरोग्य वाणी' भी संचार विकारों और उनकी शीघ्र पहचान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई एक अनूठी पहल है। 

उन्होंने कहा कि देश का एक अग्रणी संस्थान होने के नाते, एआईआईएसएच संचार विकारों से संबंधित राष्ट्रीय नीति-निर्माण में भी सलाह दे सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि आज, तकनीक हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नवीनतम तकनीकों का उपयोग वाणी और श्रवण संबंधी अक्षमताओं को दूर करने में बहुत मददगार साबित होगा। 

लेकिन नवीनतम तकनीकों और उपकरणों को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए, देश में उनका विकास और निर्माण आवश्यक है। उदाहरण के लिए, कॉक्लियर इम्प्लांट जैसे उपकरणों को कम लागत पर उपलब्ध कराने के लिए, हमें उनके निर्माण में आत्मनिर्भर बनना होगा।

एआईआईएसएच जैसे संस्थानों को इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। इस क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देकर, एआईआईएसएच राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान को और मजबूत कर सकता है। यह संस्थान देश के जाने-माने अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग कर सकता है। 

उन्होंने कहा कि एआईआईएसएच जैसे संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे नवाचार की भावना और संवेदना के साथ काम करें और ऐसी तकनीकें विकसित करें जो वाणी और श्रवण बाधित लोगों को न केवल सामान्य जीवन जीने में सक्षम बनाएँ, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था में भी अपना सर्वोत्तम योगदान दे सकें।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार विभिन्न कल्याणकारी पहलों के माध्यम से दिव्यांगजनों के लिए एक बाधा-मुक्त वातावरण तैयार कर रही है ताकि वे बिना किसी कठिनाई के अपने जीवन में प्रगति कर सकें। 'सुगम्य भारत अभियान' के अंतर्गत, दिव्यांगजनों को प्रगति और विकास के समान अवसर प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों, सुविधाओं और सूचना के स्रोतों को दिव्यांगजन-अनुकूल बनाकर, हम न केवल दिव्यांगजनों को सुविधा प्रदान करेंगे, बल्कि उन्हें यह भी महसूस कराएँगे कि समाज उनकी भी चिंता करता है। एआईआईएसएच के अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने संस्थान में उपचार करा रहे दिव्यांग बच्चों के साथ-साथ संस्थान में उपचार कराकर विभिन्न क्षेत्रों में सफल हुए दिव्यांग व्यक्तियों से भी बातचीत की।

 

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