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पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रभावी कार्यान्वयन” विषज्ञ पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

Central University of Punjab, CUPB, Bathinda, Prof Raghvendra P Tiwari
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5 Dariya News

बठिंडा , 07 Aug 2025

Last updated on: Aug 08, 2025, 15:25 IST

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा (सीयू पंजाब) ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (एसएसयूएन), पंजाब के सहयोग से “राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का प्रभावी कार्यान्वयन” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद  तिवारी के संरक्षण में आयोजित हुआ, जिसमें राज्यभर के शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया और एनईपी के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु व्यावहारिक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। 

इस कार्यशाला में एसएसयूएन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए और उन्होंने उद्घाटन भाषण दिया। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़ के कुलपति डॉ. राजीव सूद तथा एसएसयूएन के उत्तरी क्षेत्र समन्वयक श्री जगराम विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मालवा क्षेत्र के अनेक प्रख्यात शिक्षाविदों ने भी इस आयोजन में सहभागिता की।

अपने स्वागत भाषण में कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने  बहु-विषयक और समग्र ढांचे के माध्यम से भारत के शिक्षा परिदृश्य को नया रूप देने में एनईपी 2020 की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने एनईपी 2020 के कार्यान्वयन हेतु विश्वविद्यालय की प्रमुख पहलें जैसे एलओसीएफ-आधारित पाठ्यक्रम, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, मूक्स -आधारित क्रेडिट ट्रांसफर, अनुभवजन्य शिक्षण, इंटर्नशिप-एम्बेडेड मास्टर्स प्रोग्राम और मल्टीपल एंट्री-एग्ज़िट सिस्टम को रेखांकित किया। 

उन्होंने नवाचार और मूल्य-आधारित शिक्षा के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए इस बात पर बल दिया कि ये प्रयास विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य 'आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः' (सभी दिशाओं से शुभ विचार आएं) से प्रेरित हैं और विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप दिशा में अग्रसर होने चाहिए। मुख्य अतिथि डॉ. कोठारी ने नीति संवाद से आगे बढ़कर एनईपी के जमीनी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। 

उन्होंने एनईपी को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों—जैसे वसुधैव कुटुम्बकम और अतिथि देवो भव—पर आधारित एक भारत-केंद्रित, छात्र-केन्द्रित नीति बताया। उन्होंने इसे स्वतंत्र भारत की पहली ऐसी शिक्षा नीति कहा जो भारतीय परंपरा व मूल्यों में गहराई से निहित है। डॉ. कोठारी ने संस्थानों से रटंत शिक्षा की बजाय अनुभवजन्य और मूल्याधारित शिक्षण अपनाने, रचनात्मक मूल्यांकन लागू करने तथा कौशल विकास, नैतिकता और नागरिक जिम्मेदारी को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। 

उन्होंने स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, क्षेत्रीय भाषाओं और “वोकल फॉर लोकल” पहल को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया। साथ ही छात्रों से इस परिवर्तन में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करते हुए उन्होंने एनईपी को भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में एक रणनीतिक मार्ग बताया। विशिष्ट अतिथि डॉ. राजीव सूद ने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में एनईपी के क्रियान्वयन की जानकारी साझा की और सीयू पंजाब द्वारा शैक्षिक सुधारों में निभाई जा रही अग्रणी भूमिका की सराहना की। 

सीयू पंजाब के प्रति कुलपति प्रो. किरण हज़ारिका ने मुख्य अतिथि डॉ. कोठारी के प्रति आभार जताते हुए युवाओं में समसामयिक कौशल विकसित करने हेतु एनईपी के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। उद्घाटन सत्र के पश्चात आयोजित तकनीकी सत्र की अध्यक्षता श्री जगराम ने की और संचालन डॉ. सूर्यनारायण बिस्वाल ने किया।

इसमें विभिन्न संस्थानों द्वारा एनईपी के कार्यान्वयन से जुड़ी केस स्टडी और सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रस्तुत किया गया, जिससे एक साझा क्रियान्वयन रोडमैप तैयार हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत कार्यशाला समन्वयक प्रो. विपन पाल सिंह द्वारा विषय-परिचय से हुई। मंच संचालन डॉ. कुलभूषण शर्मा ने किया। उद्घाटन समारोह का समापन कुलपति डॉ. विजय शर्मा द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ साथ हुआ। 

कार्यक्रम के अंत में डॉ. समीर महाजन ने अतिथि वक्ताओं और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला ज्ञान-साझाकरण, संवाद और सहयोग के लिए एक प्रभावशाली मंच साबित हुई, जिसने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति सभी सहभागियों की सामूहिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया और उच्च शिक्षा संस्थानों में परिवर्तनकारी सुधारों को गति प्रदान की।

 

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