लुधियाना के बाहरी इलाके के विभिन्न गाँवों से किसानों की बगैर किसी सहमति और बिना कोई मुआवज़ा दिए 50,000 एकड़ ज़मीन अधिग्रहण करने संबंधी पंजाब सरकार के प्रस्ताव के ख़िलाफ़ के आज हज़ारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में, राज्य भर के वरिष्ठ नेताओं सहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ग्रेटर लुधियाना विकास प्राधिकरण (ग्लाडा) के मुख्य प्रशासक के कार्यालय के सामने धरना दिया और ज़मीन अधिग्रहण के लिए जारी अधिसूचना को रद्द करने की माँग की।उन्होंने ग्लाडा के प्रशासक के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा।
इस अवसर पर विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह आम आदमी पार्टी सरकार का तानाशाही फ़ैसला है, जिसे किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लैंड पूलिंग नहीं, बल्कि आप नेताओं द्वारा ज़मीन हड़पने की नीति है।उन्होंने कहा कि यह बेहद समझ से परे और अनसुना है कि सरकार ने न तो उन लोगों की सहमति ली है, जिनसे वह ज़मीन अधिग्रहण कर रही है और न ही कोई मुआवज़ा दे रही है। सरकार आपको हर एकड़ के बदले 1000 वर्ग गज ज़मीन वापस करेगी। यानी वह आपसे 100 रुपये लेगी और आपको सिर्फ़ 25 रुपये लौटाएगी।
वड़िंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को याद दिलाया कि ख़ुद एक किसान का बेटा होने के नाते, उन्हें दिल्ली में अपने दूसरे साथियों से ज़्यादा किसानों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए, जो "ज़मीन हड़पने" के विचार को बढ़ावा दे रहे हैं।वड़िंग ने आप सरकार को चेतावनी देते हुए, साफ़ शब्दों में कहा कि पंजाब के किसान आपको अपनी एक इंच ज़मीन भी नहीं लेने देंगे और आप 50,000 एकड़ ज़मीन छीनने की सोच रहे हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि कैसे किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माफी मांगकर तीन विवादास्पद कृषि क़ानून वापस लेने पर मजबूर किया था। "उसी तरह", पंजाब सरकार को भी माफ़ी मांगकर अपनी नीति वापस लेनी होगी।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस हमेशा की तरह किसानों के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए भूमि अधिग्रहण पर कानून बनाया था।
इस विरोध प्रदर्शन में एआईसीसी सचिव रविंदर दलवी, राणा के.पी. सिंह, सुखजिंदर सिंह रंधावा, बलबीर सिद्धू, साधु सिंह धर्मसोत, सुखपाल सिंह खैहरा, डॉ. अमर सिंह, कैप्टन संदीप संधू, जस्सी खंगुड़ा, रमनजीत सिंह सिक्की, सुखपाल सिंह भुल्लर, गुरकीरत सिंह कोटली, मोहित महिंद्रा, गुरशरण कौर रंधावा, राकेश पांडे, सुरिंदर डावर, संजय तलवाड़ आदि भी मौजूद थे।