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अनुप्रिया पटेल ने द्वितीय नीति निर्माताओं के फोरम के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया

फोरम का उद्देश्य औषधि मानकों और सस्ती दवाओं तक पहुंच के संबंध में वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है

Anupriya Patel, BJP, Bharatiya Janata Party
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5 Dariya News

नई दिल्ली , 16 Jun 2025

Last updated on: Jun 16, 2025, 18:58 IST

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) द्वारा आयोजित द्वितीय नीति निर्माताओं के फोरम के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया। भारतीय फार्माकोपिया की मान्यता को बढ़ावा देने और भारत की प्रमुख किफायती दवाओं की पहल- प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) में सहयोग के उद्देश्य से इस फोरम का आयोजन भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है। 

फोरम में 24 देशों के नीति निर्माताओं और दवा नियामकों का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहा है। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव, विदेश मंत्रालय की सचिव (दक्षिण) डॉ. नीना मल्होत्रा, भारत के औषधि महानियंत्रक और आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी भी शामिल हुए।

फोरम ने 22 देशों ( लाइबेरिया, टोगो, माली, मॉरिटानिया, सिएरा लियोन, कैमरून, रवांडा, लेसोथो, एस्वातीनी, केन्या, बोत्सवाना, इथियोपिया, कोमोरोस, सेशेल्स, मेडागास्कर, पापुआ न्यू गिनी, जिम्बाब्वे, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, क्यूबा, ​​बारबाडोस और चिली) के नीति निर्माताओं और वरिष्ठ दवा नियामक अधिकारियों को एक साथ लाया है, साथ ही कैरेबियन पब्लिक हेल्थ एजेंसी (सीएआरपीएचए) के दो प्रतिनिधियों- जमैका और कनाडा ने वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मूल्यवान और विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की स्थिति की पुष्टि की है। 

यह जुड़ाव अगस्त 2024 में आयोजित पहले नीति निर्माताओं के फोरम द्वारा प्रारंभ गति पर आधारित है, जिसके परिणामस्वरूप कई भागीदार देशों ने औपचारिक रूप से भारतीय फार्माकोपिया को दवाओं के मानकों की पुस्तक के रूप में मान्यता दी। 

यह गतिविधि भारत के विनियामक ढांचे के साथ तालमेल बिठाने में बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय रुचि, भारतीय फार्माकोपिया की विश्वसनीयता और वैज्ञानिक दृढ़ता के साथ-साथ वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में भारत की सक्रिय भूमिका को भी दर्शाती है।

अपने मुख्य भाषण में श्रीमती पटेल ने गुणवत्तापूर्ण दवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता और वैश्विक स्वास्थ्य समानता को सुविधाजनक बनाने में नियामक सामंजस्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत किफायती स्वास्थ्य सेवा समाधानों के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है और ज्ञान-साझाकरण, क्षमता-निर्माण और स्वास्थ्य कूटनीति के माध्यम से देशों के साथ अपनी साझेदारी को गहरा करना जारी रखता है।

जन औषधि केंद्रों के महत्व को रेखांकित करते हुए श्रीमती पटेल ने कहा कि हमारे जन औषधि केंद्र हमारे सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने की भारत की प्रतिबद्धता के शानदार उदाहरण हैं। जन औषधि हमारे नागरिकों की जेब से होने वाले खर्च को कम करने के सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक रही है।

टीके उपलब्ध कराने की दिशा में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए श्रीमती पटेल ने कहा कि भारत टीकों का अग्रणी आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कुल टीकों में से 70 प्रतिशत  भारत से प्राप्त होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत ने वैक्सीन मैत्री पहल शुरू की और 100 से अधिक मित्र देशों को टीके की आपूर्ति की, जो वैश्विक स्वास्थ्य के प्रति भारत की गहरी जिम्मेदारी की भावना और संकट के समय में मित्र देशों की मदद करने की उसकी भूमिका को दर्शाता है।

श्रीमती पटेल ने यह भी कहा कि भारत दवा निर्माण में अग्रणी बना हुआ है, खासकर जेनेरिक दवाओं की बात करें तो अमेरिका द्वारा आयातित जेनेरिक दवाओं का 14 प्रतिशत भारत से आता है, जबकि भारत में यूएस एफडीए (खाद्य एवं औषधि प्रशासन) द्वारा मान्यता प्राप्त दवा निर्माण संयंत्रों की अधिकतम संख्या भी है। 

उन्होंने कहा कि हमारी 70 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं को अत्यधिक विनियमित बाजारों में निर्यात किया जाता है और वैश्विक मानदंडों को पूरा करने के लिए हमारे फार्माकोपियल विनियमों की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है। श्रीमती पटेल ने कहा कि हमने डब्ल्यूएचओ के ग्लोबल बेंचमार्किंग टूल (जीबीटी) ढांचे, परिपक्वता स्तर 3 (एमएल3) की स्थिति को बरकरार रखा है जो भारत के नियामक ढांचे की मजबूती को दर्शाता है। 

वर्तमान में दुनिया के 15 देश भारतीय फार्माकोपिया को दवा मानकों की पुस्तक के रूप में मान्यता देते हैं। क्यूबा हाल ही में भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता देने वाला 15वां देश बन गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक नियामक कदम नहीं है, बल्कि गुणवत्ता मानकों में और अधिक स्‍पष्‍टता लाने, सुरक्षित और प्रभावी दवाओं तक पहुंच का विस्तार करने और फार्मास्यूटिकल्स में व्यापार को पहले से कहीं अधिक सुचारू बनाने की दिशा में एक कदम है।

श्रीमती पटेल ने पुष्टि की कि हम संवाद और योजना के माध्यम से अपने साझेदार देशों की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और "नियामक सहयोग को आगे बढ़ाने तथा फार्माकोपियल मानकों की मान्यता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना जारी रखने की आशा करते हैं, ताकि हम 'सभी के लिए स्वास्थ्य' के साझा लक्ष्य की दिशा में तेजी से प्रयास कर सकें।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि भारत "एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य" के दृष्टिकोण का समर्थन करता है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध है जो हमारे प्राथमिक स्वास्थ्य लक्ष्यों में से एक है। इसे पूरा करने के लिए हमने 1.75 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (जिन्हें पहले स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र के रूप में जाना जाता था) स्थापित किए हैं जहां निःशुल्क दवाएं और चिकित्‍सा प्रदान की जाती है। 

उन्होंने भारत की स्वास्थ्य आश्वासन योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के बारे में भी बात की, जो प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है और देश की 40 प्रतिशत आबादी की सेवा करती है। 

उन्‍होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि 2004 में, कुल स्वास्थ्य व्यय में लोगों की जेब से किए जाने वाले खर्च का हिस्सा 70 प्रतिशत था, जो आज घटकर 40 प्रतिशत रह गया है। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि जेनेरिक दवाओं के उत्पादन से मुफ्त दवाओं और चिकित्‍सा की उपलब्धता में वृद्धि हुई है, उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर दी जाने वाली मुफ्त दवाओं की संख्या 36 से बढ़कर 106 हो गई है। 

उन्होंने सस्ती ब्रांडेड दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की पेशकश में अमृत फार्मेसियों की भूमिका पर जोर दिया और कहा कि यह मंच द्विपक्षीय सहयोग, ज्ञान साझा करने और भविष्य के सहयोग के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा। कार्यक्रम के दौरान आईपीसी की 15 साल की यात्रा को चिह्नित करने वाला एक स्मारक डिजिटल प्रकाशन लॉन्च किया गया। 

तकनीकी सत्र में भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) की भूमिका और प्रगति, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के नियामक तंत्र और प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के कार्यान्वयन और प्रभाव पर प्रस्तुतियां दी गईं। चार दिवसीय कार्यक्रम (16-19 जून, 2025) के दौरान, प्रतिनिधि फार्माकोपियल मानकों, भारत के विनियामक परिदृश्य और सफल सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं पर केंद्रित तकनीकी सत्रों में भाग लेंगे। 

इसके अलावा, गाजियाबाद में आईपीसी की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, आगरा में एक जन औषधि केंद्र, साथ ही अहमदाबाद में अग्रणी दवा और वैक्सीन निर्माण और अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं का साइट दौरा आयोजित किया गया है, ताकि प्रतिनिधियों को भारत की मजबूत वैज्ञानिक और विनियामक प्रणालियों के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी मिल सके।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सलाहकार (लागत) श्री राजीव वधावन, संयुक्त औषधि नियंत्रक डॉ. रंगा चंद्रशेखर, भारतीय औषधि एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो के सीईओ श्री रवि दाधीच तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

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