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अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के लिए पवन ऊर्जा भारत की रणनीति के केंद्र में है : प्रल्हाद जोशी

प्रल्हाद जोशी ने बेंगलुरु में वैश्विक पवन दिवस सम्मेलन को संबोधित किया

Pralhad Joshi, BJP, Bharatiya Janata Party, Global Wind Day 2025, Shripad Yesso Naik
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बेंगलुरु , 15 Jun 2025

Last updated on: Jun 16, 2025, 15:24 IST

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने वैश्विक पवन दिवस 2025 के अवसर पर आज बेंगलुरु में हितधारकों के एक सम्मेलन को संबोधित किया। श्री जोशी ने कहा कि पवन ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए भारत की रणनीति के केंद्र में है।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक और कर्नाटक सरकार में ऊर्जा मंत्री श्री के.जी. जॉर्ज भी इस अवसर पर उपस्थित थे। श्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के लिए भारत को ऊर्जा की अधिक आवश्यकता है; चाहे वह सौर ऊर्जा हो, पवन ऊर्जा हो या ऊर्जा का कोई अन्य स्वरूप हो।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा, "हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य महत्वाकांक्षी और स्पष्ट हैं: वर्ष 2030 तक हमारी बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से और वर्ष 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला भारत। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पवन ऊर्जा केंद्रीय है। 

पवन ऊर्जा हमारी अक्षय ऊर्जा रणनीति का एक घटक नहीं है, लेकिन यह इसके दिल में है और आत्मनिर्भर भारत के केंद्र में है।" श्री जोशी ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा, "माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हमें 'विनिर्माण के लिए अक्षय ऊर्जा और घरेलू खपत के लिए पारंपरिक ऊर्जा' का एक दृष्टिकोण दिया है।"

केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा कि भारत की विनिर्माण क्षमता बढ़ रही है और यह आगे भी बढ़ती रहेगी। इसे देखते हुए, माननीय प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण अक्षय ऊर्जा उत्पादन, भंडारण और उपयोग के महत्व पर बल देता है, ताकि जब भारत निकट भविष्य में वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन जाए, तो वह अक्षय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से विनिर्माण क्षेत्र की ऊर्जा मांगों को पूरा करने में सक्षम हो सके।

श्री जोशी ने कहा कि भारत में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं क्योंकि इसकी विश्व स्तर पर चौथी सबसे बड़ी पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता है और यह तीसरा सबसे बड़ा अक्षय ऊर्जा उत्पादक है। उन्होंने कहा, “किसी ने नहीं सोचा था कि भारत 10 वर्षों में अक्षय ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन जाएगा, लेकिन आज यह एक वास्तविकता है।”

केंद्रीय मंत्री महोदय ने पवन ऊर्जा क्षेत्र के लिए 3 प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा:

"सबसे पहले, हमें चौबीसों घंटे बिजली और ग्रिड स्थिरता प्रदान करने के लिए पवन को सौर और भंडारण (बीईएसएस) के साथ जोड़ना होगा।

दूसरा, शुल्क प्रतिस्पर्धी होना चाहिए। 3.90 रुपये प्रति यूनिट की दर बहुत अधिक है; हमें लागत कम करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

तीसरा, घरेलू विनिर्माण को और अधिक कुशल बनना चाहिए, न केवल अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, बल्कि निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए भी।”

श्री जोशी ने अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की क्षमता को उजागर करने के लिए भारत सरकार के समर्पित प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा, "सरकार इस क्षेत्र को पूरी गंभीरता से सहायता प्रदान कर रही है। इस वर्ष अक्षय ऊर्जा बजट में 53 प्रतिशत यानी 26,549 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा पवन ऊर्जा को दिया गया है।"

केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा, "नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग की ओर संक्रमण अपरिहार्य है। राज्यों को इस संक्रमण का नेतृत्व करना चाहिए। भूमि की उपलब्धता और पारेषण में देरी को दूर करना होगा। यह संकोच का समय नहीं है, यह कार्यान्वयन का समय है।''

केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा, "मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि भारत 225 किलोवाट से लेकर 5.2 मेगावाट तक की क्षमता वाले पवन टर्बाइनों का निर्माण कर रहा है, जिसमें 14 कंपनियों द्वारा 33 मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। ये टर्बाइन हमारी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करते हैं और वैश्विक स्तर पर लागत-प्रतिस्पर्धी भी हैं।"

केंद्रीय मंत्री महोदय ने आगे कहा कि राष्ट्रीय पवन ऊर्जा क्षमता का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए, हमें एक समन्वित राष्ट्रीय प्रयास की आवश्यकता है। इसलिए हम 5 प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं:

मध्य प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा जैसे नए राज्यों में विस्तार करना।

गुजरात और तमिलनाडु में 4 गीगावाट के लीजिंग क्षेत्रों की पहचान करके अपतटीय क्षेत्र की शुरुआत करना और निविदाएँ तैयार करना।

भंडारण से जुड़े व्यावसायिक मॉडलों के माध्यम से चौबीसों घंटे चलने वाली और दृढ़ हरित ऊर्जा रणनीतियों में पवन ऊर्जा को एकीकृत करना।

ग्रिड का आधुनिकीकरण करना, परिवर्तनशील नवीकरणीय ऊर्जा के प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस (एआई)-आधारित पूर्वानुमान में निवेश करना।

पूरी पवन ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन देना।

केंद्रीय मंत्री श्री जोशी ने कार्यक्रम में पवन ऊर्जा रूपरेखा और विनिर्माण कार्य योजना पर रिपोर्ट भी जारी की। उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज हमारी आगे की यात्रा के लिए मार्गदर्शक अवसंरचना के रूप में काम करेंगे और भारत में एक मजबूत तथा आत्मनिर्भर पवन ऊर्जा इकोसिस्टम के निर्माण के लिए हमारी सामूहिक महत्वाकांक्षा, रणनीतिक सोच और प्रतिबद्धता को दर्शाएंगे। 

पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि के मामले में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों को भी कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। कर्नाटक 1331.48 मेगावाट की पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि के साथ पहले स्थान पर रहा, उसके बाद तमिलनाडु (1136.37 मेगावाट) और गुजरात (954.76 मेगावाट) का स्थान रहा।

वैश्विक पवन दिवस के बारे में

पवन ऊर्जा के विकास को चिह्नित करने के लिए 15 जून को वैश्विक पवन ऊर्जा दिवस मनाया जाता है और सरकार के निरंतर नीतिगत समर्थन से पवन ऊर्जा क्षेत्र ने पर्याप्त वृद्धि प्रदर्शित की है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के प्राधिकरणों, डिस्कॉम, सीपीएसयू, पवन उद्योग, शिक्षाविदों, प्रमुख विचारकों, प्रमुख हितधारकों  आदि की भागीदारी के माध्यम से देश में पवन ऊर्जा विकास की प्रगति सहित प्रमुख पहलुओं पर बातचीत को सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य है। 

इस कार्यक्रम को पवन स्वतंत्र विद्युत उत्पादक संघ (डब्ल्यूआईपीपीए), भारतीय पवन टरबाइन निर्माता संघ (आईडब्ल्यूटीएमए), और भारतीय पवन ऊर्जा संघ (आईडब्ल्यूपीए) का भी सहयोग प्राप्त है।

 

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