केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली में एक पेड़ मां के नाम द्वितीय चरण का शुभारंभ किया। इस पहल के लिए उन्होंने विशेष मॉड्यूल भी आरंभ किए, जिसमें मिशन लाइफ वेब पोर्टल के लिए इको क्लब और एक पेड़ मां के नाम द्वितीय चरण के लिए एक माइक्रोसाइट शामिल है।
इस आयोजन में शिक्षा राज्य मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग सचिव श्री संजय कुमार, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद-एनसीईआरटी के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने अपने संबोधन में प्रकृति के संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण के बारे में विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने तथा पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में उनकी अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने में विशेष मॉड्यूल, वेब पोर्टल और माइक्रोसाइट के महत्व का उल्लेख किया।
श्री प्रधान ने पर्यावरण शिक्षा को मुख्यधारा में लाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्कूलों में मिशन लाइफ के लिए इको क्लब छात्रों को पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाएंगे और उनमें पर्यावरण अनुकूल व्यवहार और मूल्यों को बढ़ावा देंगे।
श्री प्रधान ने कहा कि दुनिया की तुलना में भारत कभी भी प्रदूषण फैलाने वाला देश नहीं रहा है और भारतीय सभ्यता पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है। श्री प्रधान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया कि उन्होंने 2070 तक भारत के नेट जीरो का लक्ष्य (उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा को वायुमंडल से उन गैसों को हटाने या अवशोषित करने की क्षमता से संतुलित ) हासिल करने का संकल्प लिया है, जिसमें 2047 महत्वपूर्ण समय है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के इस व्यापक प्रयास में सब को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष शैक्षणिक संस्थानों ने देशभर में 5 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए हैं और इस बार देशभर में 10 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य है और इसे जन आंदोलन बनाने के लिए एक पेड़ मां के नाम द्वितीय चरण अभियान को और गति दी जानी चाहिए।
श्री प्रधान ने कहा कि वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अगली पीढ़ी को इस दिशा में निर्देशित करना चाहिए। उन्होंने सब से अपनी मां के नाम पर एक पेड़ लगाकर और उसके साथ एक सेल्फी (स्वयं का चित्र) समर्पित पोर्टल: http://ecoclubs.education.gov.in पर अपलोड कर प्रकृति के प्रति अपना उत्तरदायित्व निभाने का आग्रह किया ।
डॉ. सुकांत मजूमदार ने अपने संबोधन में उल्लेख किया कि कैसे भारतीय ज्ञान प्रणाली ने प्रकृति पर विजय प्राप्त करने के पश्चिमी विचारों के विपरीत जैसे एक बच्चा देखभाल करने वाली मां के साथ रहता है उसी प्रकार प्रकृति के साथ तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित भारत बनने के मार्ग पर आत्मविश्वास से अग्रसर है और हमारी पारिस्थितिक चेतना भी इस विकास यात्रा के केंद्र में बनी रहनी चाहिए। उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस शिक्षा नीति में अनुभवपरक शिक्षा और ज्ञान के वास्तविक अनुप्रयोग के माध्यम से इस धरा को संरक्षित रखने योग्य व्यक्ति तैयार करने का संदेश दिया गया है। डॉ. मजूमदार ने सतत विकास के लिए शिक्षा की भविष्य दृष्टि प्रदान करने के लिए श्री धर्मेंद्र प्रधान का भी आभार व्यक्त किया।
श्री आशीष सूद ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल आयोजन भर नहीं बल्कि कहीं बढ़कर है। साथ ही यह चुनौतियां और अवसरों दोनों प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि चुनौती है कि बढ़ते तापमान को कैसे नियंत्रित किया जाए ताकि पृथ्वी के साथ ही अगली पीढ़ी की आकांक्षाएं पूरी की जा सकें और अवसर है कि हम अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इस चुनौती से निपट सकें।
उन्होंने पिछले वर्ष एक पेड़ मां के नाम अभियान आरंभ करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ पेड़ लगाने का अभियान नहीं बल्कि समाज, विशेषकर विद्यार्थियों की भावनाओं, विज्ञान और स्थिरता के प्रति प्रशिक्षण मॉड्यूल है।
श्री संजय कुमार ने अपने संबोधन में मिशन लाइफ के सात विषयों के महत्व और सीमित संसाधनों के सोच-विचारकर उपयोग से स्थिरता को बढ़ावा देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने बाकी के सभी विद्यालयों से मिशन लाइफ के तहत इको क्लब स्थापित करने को कहा।
उन्होंने कहा कि अच्छा हो कि 29 जुलाई 2025 से पहले इन्हें स्थापित किया जाए जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की पांचवीं वर्षगांठ है। इससे पहले दिन में, श्री प्रधान ने अपने आवास पर एक पौधा लगाकर जलवायु परिवर्तन में बदलाव को सीमित करने और प्रकृति मां को पोषित करने में योगदान के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई।
उन्होंने सबको अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाकर एक पेड़ मां के नाम द्वितीय चरण अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। इस अभियान को मिशन लाइफ के तहत संचालित किया जाएगा। स्कूलों में ईको क्लब की मदद से इसे लागू किया जाएगा।
एक पेड़ मां के नाम अभियान में प्रारंभिक, मध्य और माध्यमिक चरणों के तीन विशेष मॉड्यूल का उद्देश्य मां और धरती मां के पोषण गुणों के बीच समानताएं बताकर युवा शिक्षार्थियों में पर्यावरण के प्रति चेतना विकसित करना है। इनमें बच्चों को मिशन लाइफ़ के लिए इको क्लबों से परिचित कराया जाएगा जिसमें उनकी संरचना, आयोजित की जाने वाली गतिविधियों और प्रमुख पहल का विवरण होगा।
इसमें पेड़-पौधे और स्कूल पोषण उद्यानों के लिए क्यूआर कोड शामिल हैं। पहेलियों, व्यावहारिक गतिविधियों और शोध कार्यों से युक्त, ये मॉड्यूल युवा मस्तिष्क को समर्पित इको-योद्धा बनने के लिए प्रेरित करते हैं, जो हरियाली युक्त अधिक संवहनीय भविष्य की दिशा में सक्रिय योगदान करेंगे।
आज आरंभ किया गया समर्पित वेब पोर्टल https://ecoclubs.education.gov.in मिशन लाइफ़ के लिए इको क्लबों की गतिविधियों के बारे में जानकारी देगा। यह पोर्टल मिशन लाइफ़ के सात विषयवस्तु के साथ संरेखित करने और देश भर के 14 लाख 70 हजार से अधिक स्कूलों में इन क्लबों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए तैयार किया गया है।
यह उपयोगकर्ता को सुगम और अनुकूल इंटरफ़ेस प्रदान करता है और सभी हितधारकों के लिए आसानी से इस्तेमाल सुनिश्चित करता है। इसमें प्रत्येक स्कूल को एक समर्पित डैशबोर्ड प्रदान किया गया है, जिससे वे मिशन लाइफ़ के लिए इको क्लबों के तहत आयोजित गतिविधियों का विवरण सहजता से अपलोड कर सकते हैं।
यह बहुभाषी पोर्टल है जिससे हर स्कूल अपनी पसंदीदा भाषा में इसका उपयोग कर सकते हैं। एक पेड़ मां के नाम द्वितीय चरण माइक्रोसाइट को मिशन लाइफ पोर्टल के लिए इको क्लब में समेकित किया गया है। अपनी मां के साथ पौधा लगाने के बाद, विद्यार्थी उसकी सेल्फी ले सकते हैं और एक सरल फॉर्म भरकर इसे माइक्रोसाइट पर अपलोड कर सकते हैं।
सफलतापूर्वक सबमिट करने पर, एक ई-सर्टिफिकेट जनरेट होगा। यह माइक्रोसाइट अभियान की प्रगति की प्रभावी निगरानी और इसके प्रभाव के आकलन के लिए जमीनी स्तर के आंकड़े प्रदान करती है।