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अमित शाह ने रायगढ़ किले पर छत्रपति शिवाजी महाराज की 345वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया

जहाँ हिन्दवी स्वराज का स्वर्ण सिंहासन प्रस्थापित हुआ, उस ऐतिहासिक रायगढ़ किले पर आना सौभाग्य की बात

Amit Shah, Union Home Minister, BJP, Bharatiya Janata Party, Minister of Cooperation, Devendra Fadnavis, Eknath Shinde, Murlidhar Mohol, Chhatrapati Shivaji Maharaj, Raigad, Maharashtra, Raigad Fort
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रायगढ़ (महाराष्ट्र) , 12 Apr 2025

Last updated on: Apr 14, 2025, 11:55 IST

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज महाराष्ट्र के रायगढ़ किले पर छत्रपति शिवाजी महाराज की 345वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फड़णवीस, उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे एवं श्री अजित पवार और केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जहाँ हिन्दवी स्वराज का स्वर्ण सिंहासन प्रस्थापित हुआ, उस ऐतिहासिक रायगढ़ किले पर आना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक रायगढ़ किला बाल शिवा से लेकर छत्रपति के अंतिम समय तक के इतिहास का साक्षी है। 

उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिन्दुस्तान के कण-कण में स्वधर्म, स्वभाषा और स्वराज के लिए अपने प्राणों की आहुति देने एक अमर जिजीविषा पैदा की और देखते ही देखते चारों ओर आदिलशाही, मुगलशाही, निजामशाही से घिरा हुआ महाराष्ट्र हिन्दवी स्वराज में बदल गया। अगले कुछ ही वर्षों में अटक से कटक, बंगाल और दक्षिण में तमिलनाडु समेत पूरे देश में स्वराज का स्वप्न सफल होता दिखाई दिया।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जब शिवाजी महाराज का जन्म हुआ, उस समय देश की जनता घोर अंधकार में डूबी थी। ऐसा वातावरण था कि किसी के मन में स्वराज की कल्पना आना भी दुष्कर था। देवगिरी के पतन के बाद 100 साल के अंदर ही महाराष्ट्र से लेकर समग्र दक्षिण का पतन हुआ और धीरे-धीरे स्वधर्म और स्वराज की बात को लोग गुनाह समझने लगे। 

लेकिन ऐसे समय में 12 साल के एक बच्चे ने अपनी माँ जीजाबाई की प्रेरणा से सिन्धु से कन्याकुमारी तक एक बार फिर भगवा फहराने की प्रतिज्ञा की। श्री शाह ने कहा कि उन्होंने दुनिया के कई नायकों के जीवन चरित्र पढ़े हैं, मगर ऐसी दृढ़ इच्छाशक्ति, अदम्य साहस, अकल्पनीय रणनीति और समाज के हर वर्ग को साथ रखकर एक अपराजेय सेना का निर्माण छत्रपति शिवाजी महाराज के अलावा किसी और ने नहीं किया।

अमित शाह ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ न भाग्य था, न अतीत उनके साथ था और न ही धन एवं सेना उनके पास थी, लेकिन उन्होंने बहुत कम उम्र में अपने अदम्य साहस और संकल्प के साथ पूरे देश को स्वराज का मंत्र दिया और देखते ही देखते 200 साल से चल रही मुगल शाही को चकनाचूर करने का काम किया। जब शिवाजी महाराज की सेना अटक, बंगाल, कटक और तमिलनाडु तक पहुंची, तब सभी को भरोसा हुआ कि देश, स्वधर्म, देश की भाषाएं और संस्कृति बच गई हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत को दुनिया में हर क्षेत्र में प्रथम बनाने की मूल कल्पना शिवाजी महाराज ने रखी थी। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के 75 साल के बाद आज हम दुनिया के सामने सर उठा कर खड़े हैं और संकल्प करते हैं कि जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे, तब भारत दुनिया में हर क्षेत्र में प्रथम स्थान पर होगा।

अमित शाह ने कहा कि राजमाता जीजाबाई ने न केवल छत्रपति शिवाजी महाराज को जन्म दिया, बल्कि उन्हें स्वराज, स्वधर्म और स्वभाषा का पुनरोद्धार करने की प्रेरणा भी दी थी। शिवाजी जब बहुत कम उम्र के थे, तब उन्हें समग्र देश को स्वतंत्र कराने और हिन्दवीसाम्राज्य का संस्थापक बनाने का विचार भी जीजाबाई ने दिया था। श्री शाह ने कहा कि जीजाबाई ने बाल शिवाजी को संस्कार दिए और शिवाजी ने उन संस्कारों को वटवृक्ष बनाया। 

उन्होंने कहा कि शिवाजी के बाद संभाजी महाराज, महारानी ताराबाई, संताजी और तानाजी मुगल शासक औरंगजेब के जिंदा रहने तक उससे लड़ते और जूझते रहे और परिणाम यह हुआ कि अपने आप को आलमगीर कहने वाले इंसान की महाराष्ट्र में हार हुई और उसकी समाधि भी यहीं है। श्री शाह ने कहा कि हमारा दायित्व है कि भारत के हर बच्चे को शिवचरितपढ़ाया जाए। गृह मंत्री ने कहा कि शिवराय यानि शिवाजी महाराज को महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रखना चाहिए, पूरा देश और पूरी दुनिया उनसे प्रेरणा ले सकती है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि स्वधर्म पर अभिमान, स्वराज की आकांक्षा और स्वभाषा को अमर बनाने के विचार मानव जीवन के स्वाभिमान के साथ जुड़े हैं। मानव जीवन के स्वाभिमान के इन तीन मूल चरित्र को शिवाजी महाराज ने देश और दुनिया के सामने रखा। शिवाजी महाराज ने ऐसे समय में यह किया जब आक्रान्ताओं ने हमें रौंद दिया था और पराजित कर दिया था। गुलामी की मानसिकता पैदा हो गई थी। लेकिन शिवाजी महाराज ने गुलामी की मानसिकता को तोड़कर फिर से हिन्दवीसाम्राज्य को स्थापित किया।

श्री अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज के जन्म से लेकर उनकी अंतिम सांस तक का इतिहास रायगढ़ की इस पवित्र भूमि में है। उन्होंने इस पवित्र भूमि को शिव स्मृति बनाने के लिए महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक को भी याद किया। श्री शाह ने कहा कि अंग्रेजों ने सोच-समझकर रायगढ़ किले को तोड़ने का काम किया, क्योंकि यह किला स्वराज का प्रतीक था। तिलक महाराज ने यह बात समझ ली और ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ के नारे के जरिए 

उन्होंने शिवाजी महाराज के स्वराज के संकल्प को फिर से प्रस्थापित करने का काम किया। श्री शाह ने कहा कि तिलक महाराज ने इस स्मारक के लिए संघर्ष शुरु किया। उनके जीवनकाल में तो यह काम नहीं हो सका, पर अंग्रेजों के शासन के दौरान ही शिव जयंती से स्वराज तक का स्मारक यहां बना और वहीं से हमारी आजादी की लड़ाई शुरू हुई। उन्होंने कहा कि तिलक महाराज के इस पुण्य कार्य को आगे बढ़ाने का काम महाराष्ट्र सरकार द्वारा किया जा रहा है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि रायगढ़ स्मारक को अनेक प्रकार की सुविधाएं देकर इसे देश के युवाओं के लिए पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि प्रेरणा स्थल बनाने के लिए केन्द्र और महाराष्ट्र सरकार कटिबद्ध हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि 7वीं से 12वीं कक्षा का हर विद्यार्थी एक बार इस पुण्य स्थली पर जरूर आए।

श्री अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज ने प्रशासन के क्षेत्र में ढेर सारे सिद्धांत स्थापित किए। उनके अष्ट प्रधान मंडल की कल्पना को आज हमने कैबिनेट के रूप में अपनाया और कैबिनेट अष्ट प्रधान मंडल का ही विस्तृत स्वरुप है। उन्होंने कहा कि सत्तासीन लोगों द्वारा न्याय के लिए भी शिवाजी महाराज ने कई सिद्धांत प्रस्थापित किए।शिवाजी महाराज ने अपने काम से सुशासन का दृष्तांत प्रस्थापित करने का काम किया।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि शिवाजी महाराज का अंतिम संदेश था कि स्वराज, स्वधर्म के सम्मान और स्वभाषा को अमर बनाने की लड़ाई कभी रुकनी नहीं चाहिए। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आज यह लड़ाई गौरव के साथ आगे बढ़ रही है। मोदी जी ने भारत को पूरे विश्व में गौरवमय स्थान दिलाने का काम किया है। 

उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने काशी विश्वनाथ मंदिर के उद्धार, सभी ज्योतिर्लिंगों तक पहुँचने और राम जन्मभूमि का उद्धार करने को कहा था। यह सारे कार्य मोदी जी के शासनकाल में हुए। औरंगजेब द्वारा तोड़े गए काशी विश्वनाथ मंदिर को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाकर पुनर्जीवित करने का काम भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया। 

शिवाजी महाराज के संदेश को पूरा करने में जो कुछ बाकी है, उसे पूर्ण करने के लिए पूरा देश कटिबद्ध है।श्री अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज का मतलब संकल्प, समर्पण, बलिदान, शौर्य, स्वाभिमान और स्वराज की अमर जिजीविषा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने छत्रपति शिवाजी को घर-घर तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया है। 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने शिवाजी महाराज की राज मुद्रा को हमारी नौसेना का प्रतीक बनाकर पूरी दुनिया में घोषणा की है कि हमारा देश और हमारा स्वराज पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी और महाराष्ट्र सरकार द्वारा 12 ऐतिहासिक किलों को यूनेस्को से विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिलवाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

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