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पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में "एनईपी-2020 और कौशल-आधारित उद्योग-उन्मुख शिक्षा" विषयक विशेष व्याख्यान आयोजित

Central University of Punjab, CUPB, Bathinda, Prof. Raghvendra P Tiwari
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5 Dariya News

बठिंडा , 29 Nov 2024

Last updated on: Nov 29, 2024, 00:00 IST

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के कार्यान्वयन के साथ कौशल-आधारित उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रमों का एकीकरण” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एन.एस. कलसी ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया।

अपने संबोधन में प्रो. कलसी ने भारत की डिजिटल और आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 59% आबादी की इंटरनेट तक पहुँच और सरकार द्वारा संचालित एक मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे के कारण भारत आज दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और आगामी कुछ वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। 

उन्होंने कहा की हमारा समाज कृषि और उद्योग में क्रांति के बाद वर्तमान में सूचना-संचालित “सोसाइटी 4.0” के रूप में विकसित हो चुका है और एक सुपर-स्मार्ट “सोसाइटी 5.0” की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि औद्योगिक क्षेत्र "इंडस्ट्री 4.0" में प्रवेश कर चुका है, जिसमें डिजिटल तकनीकों और सतत उद्योगिक विकास प्रणालियों का उपयोग हो रहा है। 

इसी प्रकार, कृषि क्षेत्र ने "एग्रीकल्चर 4.0" को अपनाना शुरू कर दिया है, जिसमें स्मार्ट फार्मिंग, डेटा-आधारित निर्णय, और सतत विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रो. कलसी ने इन नवीन प्रद्योगिकियों को संचालित करने के लिए सक्षम कार्यबल तैयार करने में भारत की शिक्षा प्रणाली और कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। 

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) और राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) का उद्देश्य एक समग्र, बहुविषयक-अंतरविषय-पारविषयक अध्ययन और अनुभवजन्य शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना है।  इसका फोकस लचीले शैक्षणिक ढाँचे, फेकल्टी विकास, और औपचारिक व अनौपचारिक शिक्षा के समावेशन पर है।

 उन्होंने विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता, जीवन कौशल और सॉफ्ट स्किल्स को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा योग्यता फ्रेमवर्क (एनएचईक्यूएफ), राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क (एनसीएफ) जैसे प्रमुख फ्रेमवर्क के साथ एनईपी-2020 और एनसीआरएफ को जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने एक प्रेरक व्याख्यान प्रस्तुत करने के लिए प्रो. कलसी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने एनईपी-2020 और एनसीआरएफ के प्रावधानों को अपने पाठ्यक्रमों में पूरी तरह से लागू करने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि वह छात्रों को कौशल विकास के व्यापक अवसर प्रदान करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। 

उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय में एनईपी-2020 के परिवर्तनकारी सुधार जैसे लर्निंग आउटकम-बेस्ड करिकुलम फ्रेमवर्क, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, और मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट जैसी नीतियों का कार्यान्वयन किया जा चुका है और सभी कार्यक्रमों में कौशल-आधारित शिक्षा के अवसरों का विस्तार करने के लिए सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने संकाय सदस्यों को भी इस विजन को साकार करने में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत आईक्यूएसी निदेशक प्रो. मोनिशा धीमान के स्वागत भाषण के साथ हुई। इसके बाद, डीन अकादमिक इंचार्ज प्रो. आर.के. वुसिरिका ने मुख्य वक्ता प्रो. कलसी का परिचय दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रो. पी.के. मिश्रा ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं अधिकारियों ने भाग लिया। 

 

 

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