भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने वर्चुअल माध्यम से पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति से समारोह की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा 1073 स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. उपाधियाँ प्रदान की गईं तथा 44 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में कुलाधिपति आचार्य जगबीर सिंह एवं जबकि कुलपति आचार्य राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी ने मुख्य अतिथि एवं भारत के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत; विशिष्ट अतिथि माननीय न्यायमूर्ति श्री शील नागू (मुख्य न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय) तथा माननीय न्यायमूर्ति श्री संदीप मौदगिल (न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय); एवं विशेष अतिथि माननीय न्यायमूर्ति श्री रमेश चंद्र डिमरी (न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय) का वर्चुअल माध्यम से समारोह में सहभागिता करने पर स्वागत एवं अभिनंदन किया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विशिष्ट अतिथियों के रूप में समारोह स्थल पर पधारे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़ के निदेशक आचार्य राजीव आहूजा तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, बठिंडा के कार्यकारी निदेशक आचार्य (डॉ.) रतन गुप्ता का भी स्वागत किया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस समारोह में पंजाब के विभिन्न प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षाविदों, विश्वविद्यालय की वैधानिक संस्थाओं के सदस्यों, अधिष्ठाताओं, निदेशकों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों ने सहभागिता की।
इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश ने विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय भवन का भी वर्चुअल उद्घाटन किया। 31,410 वर्ग फुट निर्मित क्षेत्र में बने इस भवन का निर्माण लगभग ₹14.40 करोड़ की लागत से किया गया है, जो विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध अधोसंरचना को और सुदृढ़ करेगा। मुख्य अतिथि के रूप में वर्चुअली संबोधित करते हुए माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई दी और दीक्षांत समारोह को शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा आधुनिक भारत की आकांक्षाओं का उत्सव बताया।
उन्होंने विद्यार्थियों की सफलता में अभिभावकों, शिक्षकों, मार्गदर्शकों एवं शुभचिंतकों के अमूल्य योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि सफलता की यात्रा सामूहिक सहयोग और मार्गदर्शन से ही पूर्ण होती है। समारोह में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न हो पाने पर खेद व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि वे भले ही ऑनलाइन माध्यम से जुड़े हैं, लेकिन उनका आत्मीय संबंध विश्वविद्यालय परिवार के साथ पूरी तरह बना हुआ है।
उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि “डिजिटल दूरी कभी भी भावनात्मक दूरी नहीं बननी चाहिए।” पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय की उल्लेखनीय प्रगति की सराहना करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय को एक सशक्त बहु-विषयक शिक्षण संस्थान बताया, जो शैक्षणिक उत्कृष्टता, विविधता, सहयोग और वैज्ञानिक सोच को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सीयू पंजाब सरीखे विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार करने वाले संस्थान हैं। मुख्य अतिथि ने तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में संवैधानिक मूल्यों, नैतिकता, ईमानदारी और करुणा के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से विनम्र और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बने रहने का आह्वान करते हुए कहा कि डिग्री केवल शिक्षा का समापन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है।
उन्होंने विद्यार्थियों को दया, सहानुभूति और मानवीय मूल्यों के साथ समावेशी एवं प्रगतिशील समाज निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथि एवं आईआईटी रोपड़ के निदेशक आचार्य राजीव आहूजा ने स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए दीक्षांत समारोह को “उपलब्धियों का उत्सव” बताया। उन्होंने पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय की सशक्त शोध संस्कृति की प्रशंसा की और विद्यार्थियों को नवाचार, शोध एवं आजीवन सीखने की भावना अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने विद्यार्थियों से कठिन परिश्रम करने, ज्ञान को निरंतर बढ़ाने, नवाचार और उद्यमिता को अपनाने तथा “विकसित भारत” के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि एवं एम्स बठिंडा के कार्यकारी निदेशक आचार्य (डॉ.) रतन गुप्ता ने दीक्षांत समारोह को विद्यार्थियों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री या रोजगार प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व और मूल्यों के निर्माण का माध्यम भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को आजीवन सीखते रहने और अपने ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र निर्माण के लिए करने की प्रेरणा दी। कुलपति आचार्य राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति को गौरवपूर्ण बताते हुए उन्हें भारत के मेहनतकश मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिशीलता, कौशल विकास एवं नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने शिक्षण, शोध, सह-पाठयक्रम गतिविधियों तथा आधारभूत संरचना के क्षेत्र में सीयू पंजाब की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित किया, जिनके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किए हैं। कुलपति आचार्य तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने निधि आई-टीबीआई इन्क्यूबेटर, ई-युवा केंद्र, आइडिया लैब, एनएबीएल मान्यता प्राप्त फूड टेस्टिंग लैब एवं सेंट्रल इंस्ट्रुमेंटेशन लैब जैसी पहलों के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में नवाचार, उद्यमिता एवं शोध को बढ़ावा दिया है।
दीक्षांत समारोह को “ज्ञान के तपोवन” में आयोजित “सात्विक क्षण” बताते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय दृष्टिकोण अपनाने, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली विकसित करने तथा नैतिकता, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलाधिपति आचार्य जगबीर सिंह ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्हें नवीन विचारों और अपने सपनों के साथ नई यात्रा शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने सामाजिक उत्तरदायित्व एवं निःस्वार्थ सेवा के महत्व पर बल देते हुए श्री गुरु नानक देव जी की वाणी “विद्या विचारी तां परउपकारी” का उल्लेख किया तथा विद्यार्थियों को मानवता की सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने का संदेश दिया।
बॉक्स आइटम: उपाधियाँ एवं स्वर्ण पदक
11वें दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय ने देश एवं विदेश के विद्यार्थियों को 981 स्नातकोत्तर एवं 92 पीएच.डी. उपाधियाँ प्रदान कीं। साथ ही 44 मेधावी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्तकर्ताओं में 52.1 प्रतिशत छात्राएँ थीं, जबकि स्वर्ण पदक प्राप्तकर्ताओं में 61.36 प्रतिशत छात्राएँ रहीं।
बॉक्स आइटम: दीक्षांत समारोह की सांस्कृतिक विशेषता
दीक्षांत समारोह में भारतीय परंपराओं एवं पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों ने पारंपरिक सफेद खादी परिधान धारण किए, जिसमें छात्र खादी कुर्ता-पायजामा तथा छात्राएँ खादी साड़ी अथवा सलवार-कमीज़ में नजर आईं। वहीं शिक्षकों ने पारंपरिक फुलकारी स्टोल धारण कर समारोह की सांस्कृतिक गरिमा को और बढ़ाया। दीक्षांत समारोह की शुरुआत में कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा ने विश्वविद्यालय ध्वज के साथ अकादमिक यात्रा का नेतृत्व किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।