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पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में स्लोवेनिया के विशेषज्ञों ने "बायोमेडिकल अनुप्रयोगों के लिए चुंबकीय नैनोस्ट्रक्चर" विषय पर हुए नवीन शोधकार्य और प्रगति पर प्रकाश डाला

Central University of Punjab, CUPB, Bathinda, Prof. Raghvendra P Tiwari
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बठिंडा , 17 Oct 2024

Last updated on: Oct 17, 2024, 00:00 IST

कैंसर उपचार के लिए  नई तकनीकों के विकास हेतु विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) द्वारा बुधवार को "बायोमेडिकल अनुप्रयोगों के लिए चुंबकीय नैनोस्ट्रक्चर" विषयक एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की मेजबानी की गई। माननीय कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी के संरक्षण में सीयू पंजाब के  भौतिकी विभाग द्वारा स्लोवेनिया के जोज़ेफ़ स्टीफ़न इंस्टीट्यूट ऑफ़ लजुब्लजाना के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में स्लोवेनिया और भारत के विशेषज्ञ इस क्षेत्र में नवीनतम प्रगति को साझा करने के लिए एक एकत्रित हुए। 

इस संगोष्ठी का उद्देश्य बायोमेडिकल क्षेत्र में चुंबकीय नैनोस्ट्रक्चर के आशाजनक अनुप्रयोगों का पता लगाना था। कार्यक्रम के शुरुआत में कार्यक्रम संयोजक प्रो. संतोष के. महापात्रा ने स्लोवेनियाई विशेषज्ञों प्रो. डार्को मार्कोवेक, डॉ. सेबस्टजन नेमेक, प्रो. स्लावको क्रालज और शोधकर्ता नीना क्रिज़ाज का स्वागत किया। भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. एस.के. शर्मा ने कहा कि सेमिनार का प्राथमिक लक्ष्य बेहतर ताप-आधारित कैंसर उपचार (हाइपरथर्मिया) के विकास और उच्च गुणवत्ता वाले आयरन ऑक्साइड नैनोकणों के निर्माण के लिए मार्ग प्रशस्त करना है।

संगोष्ठी का पहला व्याख्यान स्लोवेनिया के जोज़ेफ़ स्टीफ़न इंस्टीट्यूट के मैटेरियल साइंस और नैनोटेक्नोलॉजी के एक प्रमुख विशेषज्ञ प्रो. डार्को मार्कोवेक ने दिया। उन्होंने बायोमेडिकल अनुप्रयोगों के लिए नैनोकणों को नैनोकंपोजिट में संश्लेषित करने और संयोजन करने के तरीकों पर चर्चा करते हुए सेमिनार की शुरुआत की। उन्होंने मैग्नेटो-मैकेनिकल दृष्टिकोण पर आधारित अत्याधुनिक कैंसर उपचार प्रणाली में हालिया प्रगति पर प्रकाश डाला।

दूसरे व्याख्यान में लजुब्लजाना विश्वविद्यालय, स्लोवेनिया के पूर्व संकाय डॉ. सेबेस्टजन नेमेक ने बहुक्रियाशील चुंबकीय नैनोकेरियर्स पर अपना शोधकार्य प्रस्तुत किया। उन्होंने फेरोप्टोसिस नामक प्रक्रिया को साझा किया, जिसमें लक्ष्य कोशिकाओं तक आयरन ऑक्साइड नैनोकण और लिपिड को पहुँचाया जाता है, जिससे कैंसर कोशिका नष्ट हो जाती है।

जहाँ, तीसरे व्याख्यान में नैनोमेडिसिन और बायोनैनोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता रखने वाले प्रो. स्लावको क्रालज ने दवा लक्ष्यीकरण और फोटोनिक क्रिस्टल अनुप्रयोगों के लिए चुंबकीय संयोजन तकनीकों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया। वहीँ, चौथे व्याख्यान में जोज़ेफ़ स्टीफ़न इंस्टीट्यूट्स की शोधकर्ता नीना क्रिज़ा ने बायोमेडिकल उपयोग के लिए हीटिंग और उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं की क्षमता पर चर्चा की तथा सेरिया-आधारित चुंबकीय नैनोक्रिस्टल का उपयोग करने पर अपने निष्कर्षों को साझा किया।

कार्यक्रम के अंत में प्रो. प्रशांत एस. अलेगांवकर ने अतिथि वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संगोष्ठी से प्राप्त अंतर्दृष्टि उच्च गुणवत्ता वाले आयरन ऑक्साइड नैनोकणों के विकास में योगदान देगी और ताप-आधारित कैंसर उपचारों (हाइपरथर्मिया) में विकास करके उन्नत कैंसर उपचारों का मार्ग प्रशस्त करेगी।

कार्यक्रम के दौरान भौतिकी विभाग और विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के संकाय सदस्य भी मौजूद थे। सेमिनार के दौरान चिकित्सा में चुंबकीय नैनोस्ट्रक्चर के भविष्य पर चर्चा की गई। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के साथ-साथ अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के संकाय, शोधार्थी और विद्यार्थी इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

 

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