'एक विधायक-एक पेंशन' योजना लागू होने को आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे पिछली सरकारों द्वारा किए गए जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी रुकेगी। इस फैसले से पंजाब के खजाने का 5 साल में करीब 100 करोड़ रुपए बचेगा, जिसे जनता के विकास और कल्याण कार्यों पर खर्च किया जाएगा। शनिवार को पार्टी मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए 'आप' पंजाब के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने जनता के पैसे से नेताओ को मिलने वाली रेवड़ियों पर रोक लगाई है। यही सच्चे मायने में जनता की सेवा करना है।
कंग ने भाजपा-कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अपने कॉरपोरेट दोस्तों, नेताओं और परिवारों को आर्थिक फायदा पहुंचाने को मुफ्त रेवड़ी कहते हैं। आम जनता को मुफ्त बिजली-पानी, शिक्षा और चिकित्सा सुविधाएं देने को मुफ्त रेवड़ी नहीं कहते। कंग ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि इन दोनों पार्टियों की देश के अधिकांश राज्यों में सरकार है। अगर इनमें हिम्मत है तो अपने-अपने राज्यों में दोनों पार्टियों की सरकारें ऐसा करके दिखाएं।
*'आप' नेताओं ने फैसले का किया स्वागत*
आपके राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने ट्वीट किया, "पिछली पंजाब सरकारों ने दुर्भावनापूर्ण हितों के साथ सरकारी खजाने को खत्म कर दिया और 'एक विधायक-कई पेंशन' का फायदा उठाकर अपनी जेबें भर लीं। चुनाव हारने पर भी पूर्व विधायकों को मुनाफा होता रहा। आज मान सरकार ने सरकारी खजाने के करोड़ों रुपये की बचत करते हुए 'एक विधायक एक पेंशन' की शुरुआत की।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने ट्वीट किया, "नेताओं के लिए अब "फ्री की रेवड़ी" नहीं! जब पंजाब अत्यधिक वित्तीय संकट से जूझ रहा था, पिछली सरकारों के विधायक कई पेंशन का आनंद ले रहे थे।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार ने इसका अंत किया। एक विधायक - एक पेंशन से सालाना लगभग 20 करोड़ रुपए बचेगा।" आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब से राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने इस पर ट्वीट कर कहा, "एक विधायक-एक पेंशन बिल को मंजूरी मिलने के बाद आज पंजाब सरकार ने इसे लागू कर दिया है। अब लोगों का पैसा लोगों की सुविधाओं पर खर्च होगा।