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म्यूजिय़म ऑफ ट्रीज़-चंडीगढ़ में वातावरण समर्थकीय एक नया मीलपत्थर

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5 Dariya News

चंडीगढ़ , 30 Nov 2020

Last updated on: Nov 30, 2020, 00:00 IST

श्री गुरु नानक देव जी के 551वें प्रकाश पर्व के मौके पर पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक श्री वी.पी. सिंह बदनौर ने चंडीगढ़ में म्युजिय़म ऑफ ट्रीज़-सिख धर्म से सम्बन्धित पवित्र वृक्षों की संरक्षण करने वाले विलक्षण प्रोजैक्ट का उद्घाटन किया। इन पवित्र वृक्षों के नाम पर कई सिख गुरुद्वारों के नाम रखे गए हैं।कोविड-19 के मद्देनजऱ प्रोजैक्ट का उद्घाटन ऑनलाइन किया गया। इस ऑनलाइन उद्घाटन में पूर्व संसद मैंबर और अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन सरदार त्रिलोचन सिंह और पी.एच.डी.सी.सी.आई के प्रधान श्री करन गिलहोत्रा ने शिरकत की।श्री गुरु नानक देव जी के 551वें प्रकाश पर्व के मौके पर गुरूपर्व की बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह श्री गुरु नानक देव जी को याद करने का सबसे बढिय़ा दिन और उपयुक्त विधि है, जिनकी वाणी कुदरत, वातावरण, वृक्षों, पौधों और जीवों के जीवन के हवालों से भरपूर है।राज्यपाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि मौसम में तबदीली मानवता के लिए एक तत्काल संकट है और इस चुनौती से निपटने के लिए लोगों की राय जुटाने हेतु म्युजिय़म ऑफ ट्रीज़ जैसी पहलकदमियों के साथ लोगों को आगे आना चाहिए।उन्होंने 12 पवित्र वृक्षों का क्लोन तैयार करने के लिए 10 सालों से धैर्य और तनदेही के साथ काम करने के लिए डीएस जसपाल की सराहना की और आशा अभिव्यक्त की कि बाकी वृक्षों का काम भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।पूर्व संसद मैंबर और भारत के अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन ने सिख धर्म के पवित्र वृक्षों का संरक्षण में सहयोग देने के लिए राज्यपाल का धन्यवाद किया।

उन्होंने कहा कि गुरू नानक देव जी विश्व के सबसे अधिक यात्रा करने वाले धार्मिक प्रचारक थे। गुरू जी ने वृक्षों की छाँव के नीचे खुले में आम लोगों के साथ बातचीत की, जिस कारण बहुत से पवित्र वृक्ष गुरू साहिब के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने पवित्र वृक्षों की संरक्षण वाले इस प्रोजैक्ट को समर्थन देने के लिए भारत सरकार की सराहना की, क्योंकि बहुत से गुरुद्वारों में पवित्र पेड़ काटे गए हैं या गलत देखभाल के कारण होंद गवा चुके हैं।म्यूजिय़म ऑफ ट्रीज़ के सृजनहार और क्युरेटर डीएस जसपाल ने राज्यपाल का इस प्रोजैक्ट को सहयोग देने के लिए धन्यवाद किया। इस सम्बन्धी उन्होंने कहा कि न सिफऱ् सिखों के लिए बल्कि सभी कुदरत प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र साबित होगा।जसपाल ने बताया कि बहुत से पवित्र वृक्ष वनस्पती महत्व भी रखते हैं। उदाहरण के तौर पर सुल्तानपुर लोधी में गुरुद्वारा बेर साहिब में बेरी का वृक्ष विलक्षण है, क्योंकि इसके बहुत कम काँटे हैं। इसी तरह गुरूद्वारा पिपली साहिब में पीपल के पेड़ के पत्तों का एक अनोखा पीला रंग है।जसपाल ने यह भी बताया कि वृक्षों को लहसून, मिर्चों और हींग को पानी में मिलाकर पूरी तरह घरेलू जैविक स्प्रे के द्वारा बीमारियों से सुरक्षित रखा जाता है, इसी कारण वृक्ष सेहतमंद हैं और बढिय़ा फल देते हैं।दस सालों के दौरान अजायब घर संबंधी पवित्र वृक्षों की जेनेटिक तौर पर सही प्रतिक्रितियों को बनाने में सफल रहा है, जिसमें दरबार साहिब की दुखभंजनी बेरी, सुल्तानपुर लोधी के गुरुद्वारा बेर साहिब में बेर का पेड़, गुरुद्वारा बेबे-की-बेर, सियालकोट, पाकिस्तान में बेर का वृक्ष, अमृतसर के गुरुद्वारा पिपली साहिब का पीपल का वृक्ष शामिल हैं।वृक्षों के अजायब घर में भारत की सबसे आधुनिक मिस्ट चैंबर की सुविधा है और एक ग्लास हाऊस कंजऱवेटरी की व्यवस्था है, जिसमें ऊँचाई और बढ़ाने वाली फूलने वाली दुर्लभ किस्मों को सुरक्षित रखने के लिए सोलह एयर कंडीशनर मौजूद हैं।

 

Tags: VP Singh Badnore

 

 

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