चार दिवसीय प्रगतिशील पंजाब कृषि सम्मेलन के अंतिम दिन आज कृषि विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिकों के सुझाव पर अमल करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने आज एलान किया है कि कृषि संकट के हल के लिए इस सम्मेलन में उभर कर सामने आए नुकतों पर ठोस फैसला लेने के लिए प्रसिद्ध कृषि विशेषज्ञ एवं पंजाब राज्य किसान आयोग के चेयरमैन श्री जी एस कालकट के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों एवं सफल किसानों पर आधारित यह कमेटी पंजाब सरकार को सम्मेलन के उन सुझावों पर आगामी कार्रवाई करने संबंधी राय देगी जिनका संबंध केन्द्र या अन्य राज्यों की सरकारों से है।
बादल ने अपने बहुत ही संक्षेप एवं भावपूर्ण भाषण में कृषि संकट के कारणों की पहचान करते हुए कहा कि खेतों का आकार घट जाने, लागतों के मुकाबले कृषि उत्पादों के मूल्य में बहुत कम बढ़ोतरी होने और केन्द्रीय सरकारों द्वारा कृषि क्षेत्र की तरफ आवश्यक ध्यान ना देने के कारण पूरे देश में कृषि ढांचा लड़खड़ा गया है।मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार से मांग की कि पूरे देश में होती कृषि आय का कम से कम दो प्रतिशत कृषि अनुसंधान, विकास और खेती के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए खर्च किया जाए। उन्होंने यह भी मांग दोहराई कि रेलवे की तर्ज पर कृषि के लिए भी एक अलग बजट तैयार किया जाये ताकि देश की लगभग 65 प्रतिशत की रोजी-रोटी के साधन बने हुए खेती क्षेत्र की तरफ आवश्यक ध्यान दिया जा सके। उन्होंने केन्द्र सरकार से यह भी मांग की कि विदेशों से कृषि मशीनरी एवं औज़ार मंगवाने पर लगाई जाती एक्साईज़ डयूटी समाप्त की जाए।
बादल ने कहा कि गहरे हो चुके आधुनिक कृषि संकट का हल किसी एक व्यक्ति, विभाग या राज्य की सरकार के बस का रोग नहीं रह गया। यह संकट तो ही हल होगा यदि राज्यों की सरकारों की सलाह से केन्द्र सरकार स्वयं कोई बड़ा प्रयास करे। उन्होंने कहा कि देश की रीढ़ की हड्डी समझी जाती कृषि के संकट से निपटने के लिए किसानों, उद्योगपतियों और अर्थशास्त्रियों को कदम से कदम मिलाकर चलने की जरूरत है और यह तो ही संभव हो सकता है यदि केन्द्र सरकार कृषि संबंधी अपनी गलत नीतियों को पुन: योजित कर किसान पक्षीय बनाए। स.बादल ने कहा कि सबसे बड़ी गलत एवं किसान विरोधी नीति कृषि उत्पादों के मूल्य निर्धारण संबंधी अपनाई जा रही प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि मूल्य निर्धारण समय ना तो राज्य सरकारों की ही बात सुनी जाती है और ना ही कृषि लागतों की गणना करते समय किसान के परिवारों द्वारा की जाती मेहनत मज़दूरी और उसकी भूमि का ठेका की गणना की जाती है।
पंजाब सरकार द्वारा राज्य के किसानों को कृषि के लिए दी जा रही बिजली-पानी की नि:शुल्क सुविधा को पूरी तरह जायज़ ठहराते हुए स.बादल ने घोषणा की कि जब तक वह राज्य के मुख्यमंत्री हैं, तब तक यह सुविधा हर स्थिति में जारी रखी जाएगी परन्तु इसके साथ ही उन्होंने किसानों को अपील की कि वह पानी की बचत के लिए तुपका एवं फुव्वारा सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाएं। स.बादल ने किसानों को यह अपील भी की कि वह फसली विविधता कार्यक्रम तहत गेहूं-धान के फसली चक्र में से निकल कर मक्की, सोयाबीन और सब्जियों की काश्त को अपनाएं जिससे उनकी आय भी बढ़ेगी और राज्य के प्राकृतिक स्त्रोतों की भी बचत होगी।
आय बढ़ाओं खर्च घटाओं का नारा देते हुए स.बादल ने किसानों को अपील की कि कृषि के साथ-साथ मुर्गी पालन, सुअर पालन, मत्सय पालन, मधुमक्खी पालन और डेयरी फार्मिंग जैसे सहायक व्यवसायों को अपना कर अपनी आय में बढ़ोतरी करने के साथ साथ सामाजिक और अन्य कार्यों पर किए जाते बड़े खर्चों से गुरेज़ करें। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि कृषि और इसके सहायक व्यवसायों में अधिक तालमेल बैठाने के लिए राज्य के कृषि एवं पशु पालन विभागों के कामकाज के लिए सिंगल विंडो स्थापित की जाएगी।स.बादल ने किसानों को वैज्ञानिकों द्वारा सिफारिश की गई आधुनिक तकनीकों और फसली किस्मों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि सरकार तुपका सिंचाई पर 80 प्रतिशत, सौर ऊर्जा सिस्टम लगाने के लिए 70 प्रतिशत, सहायक व्यवसाय आरंभ करने के लिए 50 प्रतिशत दी जा रही है। उन्होंने किसानों को धान की पराली जलाने से तौबा करने की विशेष अपील करते हुए बताया कि पराली को धरती में खपाने के लिए इस्तेमाल की जाती मशीनें स्ट्रा रीपर, बेलर, रोटावेयर और हैप्पी सीडर जैसी मशीनों पर भी सरकार द्वारा 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। इस अवसर पर स.बादल ने कृषि विभाग और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारियों को कहा कि वह कीटनाशक एवं नदीननाशक दवाइयां बनाने वाली कंपनीयों से ही थोक में दवाइयां खरीद कर किसानों को सप्लाई करने की संभावनाओं का पता लगाएं ताकि किसानों को फायदा हो सके।
बादल ने घोषणा की कि आगे से यह सम्मेलन प्रत्येक वर्ष करवाया जाएगा और इसका घेरा ओर विशाल करते हुए विदेशों से भी किसानों एवं विशेषज्ञों को बुलाया जाया करेगा। उन्होंने इस विलक्षण सम्मेलन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का धन्यवाद किया।सत्र के आरंभ में पंजाब के वित्तायुक्त विकास श्री सुरेश कुमार ने कहा कि इस सत्र में 10 तकनीकी सत्र हुए हैं और लगभग डेढ़ लाख किसानों ने इसमें किसी ना किसी रूप में भागीदारी की।इस अवसर पर कैबिनट मंत्री स.गुलजार सिंह रणीके, स.सुरजीत सिंह रखड़ा, मुख्य संसदीय सचिव स.गुरबचन सिंह बब्बेहाली, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री एस के संधू, विश्वप्रसिद्ध कृषि विशेषज्ञ श्री गुरदेव सिंह खुश, पूर्व केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री सोमपाल सिंह शास्त्री, कृषि लागतों एवं मूल्यों संबंधी राष्ट्रीय आयोग के पूर्व चेयरमैन प्रो.टी हक, पंजाब राज्य किसान आयोग के चेयरमैन श्री जी एस कालकट, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के उपकुलपति डा.बी एस ढिल्लों, गुरू अंगद देव वैटरनरी विश्वविद्यालय के उपकुलपति डा.वी के तनेजा, मुख्यमंत्री के विशेष प्रधान सचिव श्री गगनदीप सिंह बराड़ और कृषि विभाग के सचिव श्री काहन सिंह पन्नू उपस्थित थे।