केंद्र सरकार ने पारंपरिक उद्योगों के उन्नयन एवं पुनर्निर्माण के लिए कोष की योजना (स्फूर्ति) के तहत 100 नए क्लस्टर स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत वर्ष 2019-20 में 50,000 कारीगरों को आर्थिक मदद पहुंचाई जाएगी, और साथ ही अगले पांच वर्षो में किसानों के लिए व्यापक उत्पादन स्तर सुनिश्चित करने हेतु 10,000 नए किसान उत्पादक संगठन बनाए जाएंगे। केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारामण ने लोकसभा में शुक्रवार को आम बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार ने पारंपरिक उद्योगों के उन्नयन एवं पुनर्निर्माण के लिए कोष की योजना (स्फूर्ति) के तहत और ज्यादा साझा सुविधा केन्द्रों (सीएफसी) की स्थापना करने का लक्ष्य रखा है। वित्तमंत्री ने कहा, "इससे पारंपरिक उद्योगों को और ज्यादा उत्पादक, लाभप्रद एवं सतत रोजगार अवसरों को सृजित करने में सक्षम बनाने के लिए क्लस्टर आधारित विकास को सुविधाजनक बनाया जा सकेगा। इसके तहत फोकस वाले क्षेत्र या सेक्टर बांस, शहद और खादी क्लस्टर हैं। 'स्फूर्ति' के तहत वर्ष 2019-20 के दौरान 100 नए क्लस्टर स्थापित करने की परिकल्पना की गई है, जिससे 50,000 कारीगर आर्थिक मूल्य श्रंखला से जुड़ सकेंगे।"आजीविका व्यवसाय इन्क्यूबेटरों (एलबीआई) और प्रौद्योगिकी व्यवसाय इन्क्यूबेटरों (टीबीआई) की स्थापना के लिए नवाचार, ग्रामीण उद्योग एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने की योजना (एस्पायर) को समेकित किया गया है। इस योजना के तहत कृषि-ग्रामीण उद्योग सेक्टरों में 75,000 कुशल उद्यमियों को विकसित करने के लिए वर्ष 2019-20 में 80 आजीविका व्यवसाय इन्क्यूबेटरों और 20 प्रौद्योगिकी व्यवसाय इन्क्यूबेटरों की स्थापना करने की मंशा व्यक्त की गई है।वित्त मंत्री ने यह भी कहा, "मत्स्य पालन एवं मछुआरा समुदाय खेती-बाड़ी से काफी हद तक जुड़े हुए हैं और ये ग्रामीण भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मत्स्यपालन विभाग 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई)' के जरिए एक सुदृढ़ मत्स्यपालन प्रबंधन रूपरेखा स्थापित करेगा। इस योजना के जरिए अवसंरचना, आधुनिकीकरण, उत्पादकता, फसल कटाई उपरांत प्रबंधन और गुणवत्ता नियंत्रण सहित संपूर्ण मूल्य श्रंखला (वैल्यू चेन) के सु²ढ़ीकरण के मार्ग में मौजूद बाधाओं को दूर किया जाएगा।"उन्होंने यह भी घोषणा की कि 10,000 नए किसान उत्पादक संगठन बनाए जाएंगे, ताकि अगले पांच वर्षो के दौरान किसानों के लिए व्यापक उत्पादन स्तर सुनिश्चित किया जा सके। पशु चारे के उत्पादन और दूध की खरीद, प्रोसेसिंग एवं विपणन के लिए बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को सृजित करके भी सहकारी समितियों के जरिए डेयरी को प्रोत्साहित किया जाएगा।