दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने सोमवार को आशा जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यहां मंगलवार को होने वाली वार्ता द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई ऊचाईयों तक ले जाने में मदद करेगी। राष्ट्रपति मून पहले आधिकारिक दौरे के तहत रविवार को यहां 100 व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ पहुंचे। वह मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी के साथ आधिकारिक वार्ता करेंगे। मून ने यहां फिक्की द्वारा आयोजित भारत-कोरिया व्यापारिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा, हमारा वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब डॉलर का है। हालांकि, यह कम नहीं है लेकिन हमारी उम्मीद से कम है। उन्होंने कहा, मैं उम्मीद करता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ मेरी कल (मंगलवार) की बैठक हमारे आर्थिक संबंध को अगले स्तर तक ले जाने में सफल होगी। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने बताया कि भारत के साथ बेहतरीन आर्थिक संबंध उनके देश की नई दक्षिणी नीति का महत्वपूर्ण तत्व है।
उन्होंने कहा, इस नीति का उद्देश्य आर्थिक सहयोग से आगे जाकर समृद्ध जन-केंद्रित शांति समुदाय का निर्माण करना है। इस बात की ओर ध्यान देते हुए कि भारत में 500 कोरियाई कंपनियां व्यापार कर रही हैं, मून ने कहा, भारत सरकार 100 स्मार्ट शहरों और इन बड़े शहरों को जोड़ने के लिए औद्योगिक गलियारों को बनाने की योजना बना रही है। हमारी इच्छा है कि हम इन बुनियादी परियोजनाओं में हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि भारत में बुनियादी विकास के लिए 10 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता निश्चित की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मंगलवार को द्विपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जाएगा जिसके अंतर्गत औद्योगिक प्रौद्योगिकी भी शामिल होगी। उन्होंने कहा, कोरिया जुड़वें शिखर सम्मेलन (कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण के मुद्दे पर) के बाद ऐतिहासिक बदलाव पर खड़ा है। अगर हम प्रायद्वीप में शांति स्थापित कर सकते हैं तो यहां का व्यापारिक माहौल बेहतर होगा। भारत के वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने संबोधन में कहा, दक्षिण कोरिया के साथ समग्र आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) या मुक्त व्यापार संधि के मामले पर आधिकारिक वार्ता पहले से ही चल रही है।