वन, परिवहन, युवा सेवाएं व खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि वन विभाग ने हिमाचल प्रदेश में ईको टूरिजम के माध्यम से पर्यटन उद्योग के विस्तार के लिए राज्य स्तर पर ईको टूरिजम सोसाइटी का गठन किया है। सोमवार को एक प्रैस विज्ञप्ति जारी करते हुए वन मंत्री ने कहा कि हिमाचल में ईको टूरिजम की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं के उचित दोहन से प्रदेश में पर्यटन उद्योग को नए पंख लगेंगे तथा देश-विदेश के पर्यटक प्रकृति के और करीब जा सकेंगे। इससे स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर स्वरोजगार के अवसर पर मिलेंगे तथा दूसरे संसाधनों पर उनकी निर्भरता में कमी आएगी।गोविंद सिंह ने कहा कि प्रदेश की अधिकतर जनसंख्या गांवों में ही रहती है तथा कृषि-बागवानी उसकी आय का मुख्य स्त्रोत है। इसके अतिरिक्त रोजमर्रा की जरुरतों जैसे-खान-पान, जड़ी-बूटी, औषधि, इमारती व ईंधन की लकड़ी और पशुचारा इत्यादि के लिए लोग वनों पर ही निर्भर रहते हैं। कई बार लोग इन प्राकृतिक संसाधनों का अवैज्ञानिक दोहन करते हैं जिससे पर्यावरण पर बहुत बुरा असर पड़ता है। वन मंत्री ने कहा कि ईको टूरिजम प्रकृति से छेड़छाड़ व अंधाधुंध दोहन किए बगैर स्वरोजगार दिलाता है और इससे वन भी सुरक्षित रहते हैं।उन्होंने कहा कि हिमाचल में ईको टूरिजम की संभावनाओं का पता लगाने और उन पर व्यापक मंथन के लिए मनाली स्थित अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान में 12-13 जून को दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन के दौरान देश-विदेश के विशेषज्ञ अपने-अपने क्षेत्रों में ईको टूरिजम के लिए किए जा रहे कार्यों पर चर्चा करेंगे। हिमाचल में ईको टूरिजम को आगे बढ़ाने तथा इसके लिए भविष्य की नीति तैयार करने के लिए सम्मेलन में व्यापक चर्चा की जाएगी। वन मंत्री ने बताया कि इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ-साथ केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) केजे अलफोंस भी शामिल होंगे। सम्मेलन में 200 से अधिक प्रतिभागी भाग लेंगे।