Friday, 05 June 2026

 

 

खास खबरें देश की कुल ग्रीन एनर्जी का पांचवां हिस्सा गुजरात से आता है : नरेंद्र मोदी हरपाल सिंह चीमा द्वारा पी.एस.टी.सी. की समीक्षा बैठक मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा नामांकन दाखिल किया, राहुल गांधी और डीके शिवकुमार रहे मौजूद भगवंत मान सरकार द्वारा सख्त समय-सीमा और जवाबदेही के साथ 'रंगला पंजाब विकास स्कीम' में तेजी : हरपाल सिंह चीमा खराब रौशनी की स्थिति में लाल की जगह गुलाबी गेंद के प्रयोग की मंजूरी आईसीसी का सकारात्मक कदम : गौतम गंभीर लोक मिलनी के दौरान जय कृष्ण सिंह रौड़ी ने मौके पर ही लोगों की समस्याओं का समाधान करवाया कोई टोंटी चोरी कर रहा, कोई पानी बहा रहा, ऐसे लोगों को टोकें : सीएम योगी आदित्यनाथ पर्यावरण संरक्षण को बनाएं जीवनशैली का हिस्साः सुखविन्द्र सिंह सुक्खू अमित शाह ने त्रिपुरा बॉर्डर का दौरा किया, स्मार्ट बॉर्डर विजन का अनावरण किया विश्व पर्यावरण दिवस : सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, '18 नमो ऑक्सीजन पार्कों के लिए पौधरोपण अभियान शुरू' हमारी जीवन शैली बिना प्रकृति के अधूरी : सीएम मोहन यादव भोजन-सुरक्षित भविष्य का निर्माण : नीति और भोजन का सुमेल विश्व पर्यावरण दिवस पर राहुल गांधी ने उठाए ग्रेट निकोबार परियोजना पर सवाल, बोले- विकास जरूरी, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं 54 एलपीयू स्टूडेंट्स ने भारती एयरटेल स्कॉलरशिप में ₹5 करोड़+ हासिल किए साथ ही वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे पर 180 पौधे लगाने की मुहिम चलाई राज्य सरकार और यूएनडीपी के मध्य परिपत्र अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने चिनार वृक्षारोपण अभियान के प्रथम चरण का शुभारंभ किया भारत की विकास रफ्तार तेज, यात्री वाहन बिक्री में जोरदार उछाल : पीयूष गोयल सीमा पार संचालित हथियार, नशा और हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ कविन्द्र गुप्ता ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मिनी मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया विश्व पर्यावरण दिवस पर गुलाब चंद कटारिया ने किया वृक्षारोपण आरबीयू ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृक्षारोपण अभियान के साथ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया

 

कृषि मूल्य आयोग को पूर्ण स्वायत्ता देने में हिचक क्यों : अन्ना हजारे

Listen to this article

Web Admin

Web Admin

5 Dariya News

नई दिल्ली , 30 Mar 2018

Last updated on: Mar 30, 2018, 00:00 IST

गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने 11 मांगें पूरी माने लेने के केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद भले ही अनशन तोड़ दिया हो, लेकिन उन्होंने सरकार को चेताया है कि अगर आश्वासन के अनुरूप तय समय-सीमा में मांगें पूरी नहीं की गईं तो वह दोबारा रामलीला मैदान में आ धमकेंगे और फिर से आंदोलन करेंगे। अन्ना कहते हैं कि किसानों के हित के लिए कृषि मूल्य आयोग लंबे अरसे से बना हुआ है, लेकिन उसे पूर्ण स्वायत्ता अब तक नहीं दी गई। आयोग में सरकार के हस्तक्षेप का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसान फसलों का वाजिब दाम नहीं मिलने से सबसे ज्यादा पीड़ित है। कृषि मूल्य आयोग को स्वायत्ता मिल जाएगी तो किसानों को फसलों के दाम को लेकर परेशान नहीं होना पड़ेगा। समझ नहीं आता, सरकार हिचक क्यों रही है?अन्ना (80) ने रामलीला मैदान में अनशन तोड़ने से पहले आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा, "अजीब विडंबना है कि कृषि प्रधान देश में किसानों को ही आंदोलन के जरिए अपनी बातों को सरकार के समक्ष रखना पड़ता है। भूखा रहना किसे पसंद है, लेकिन किसानों को अनशन करना पड़ता है, ताकि उनके बच्चों का पेट भर सके।"वर्ष 2011 के आंदोलन में उमड़ी भीड़ की तुलना में इस बार के सत्याग्रह आंदोलन में केजरीवाल सहित तमाम नेताओं की गैरमौजूदगी के सवाल पर अन्ना ने कहा, "मैं शुरू से ही राजनीति में जाने के खिलाफ रहा हूं। यह अनशन, यह मंच किसानों का है। हमने आंदोलन की 20 सदस्यीय राष्ट्रीय कोर समिति के सदस्यों से पहले ही एफिडेविट पर साइन करा लिए थे कि वे किसी भी पार्टी में न तो शामिल होंगे और न ही किसी नई पार्टी का गठन करेंगे।"

अन्ना ने लोकपाल कानून और लोकायुक्त की नियुक्ति, किसानों की फसल का वाजिब दाम मिलने और चुनाव सुधारों की मांगों को लेकर 23 मार्च को सत्याग्रह शुरू किया था। अन्ना कहते हैं, "हमारी बहुत बड़ी मांगें नहीं हैं, जो सरकार पूरा नहीं कर सकती। हम चाहते हैं कि कृषि संकट से निपटने के लिए एम.एस. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए। कृषि पर निर्भर 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों को सरकार की ओर से हर माह 5,000 रुपये पेंशन मिले। कृषि मूल्य आयोग को तुरंत पूर्ण स्वायत्ता मिलनी चाहिए। कृषि फसल के सामूहिक बीमा के बजाए व्यक्तिगत बीमा करना शुरू हो। लोकपाल कानून को कमजोर करने वाली धारा 44 और 63 में संशोधन हो। वोटों की गिनती के लिए टोटलाइजर मशीन का इस्तेमाल हो।"सरकार द्वारा आंदोलन को गंभीरता से नहीं लेने के सवाल पर अन्ना कहते हैं, "अगर सरकार किसानों को गंभीरता से नहीं लेगी तो फिर देश की जनता भी उन्हें गंभीरता से लेना बंद कर देगी। जो सरकार अन्नदाता का ख्याल नहीं रख सकती, उसे सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है।"अन्ना केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहते हैं, "सरकार कारोबारियों के बारे में जितना सोचती है, उसका यदि दो प्रतिशत भी किसानों के बारे में सोचे तो काफी हद तक किसानों की समस्याएं समाप्त हो जाएंगी।"इस बार के बजट में कृषि और किसानी को खास तवज्जो दिए जाने के सवाल पर अन्ना हजारे कहते हैं, "सिर्फ कहने भर से कुछ नहीं होता। कहने को तो किसानों को ध्यान में रखकर बजट तैयार किया गया है, लेकिन उसे लागू कैसे और कब से किया जाएगा, इसे लेकर कुछ स्पष्ट नहीं है। सिर्फ पैसा आवंटित कर देने से किसी का भला हुआ है क्या?"

 

Tags: Anna Hazare

 

 

related news

 

 

 

Photo Gallery

 

 

Video Gallery

 

 

5 Dariya News RNI Code: PUNMUL/2011/49000
© 2011-2026 | 5 Dariya News | All Rights Reserved
Powered by: CDS PVT LTD