वन मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने वन अधिकारियों से कहा कि वे प्रदेश की आपार वन सम्पदा के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए निष्ठा व एक जुट होकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि हिमाचल पर्वतीय राज्य है तथा यह देश भर में हरित क्षेत्र के लिए जाना जाता है। यहां के जंगल ही हमारी पहचान है, जिन्हें बचाने व हरित आवरण को बढ़ाने के लिए हमें कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के पास हजारों करोड़ रुपये की बहुमूल्य वन सम्पदा है तथा प्रदेश राष्ट्रहित में इसके संरक्षक व संवर्द्धन के प्रति वचनबद्ध है, ताकि इनके लाभ पूरे उत्तरी भारत को मिल सके।वन मंत्री आज यहां वानिकी कार्यों की प्रगति के लिए रणनीति विषय पर वन विभाग के अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वन सेवाएं एक महत्वपूर्ण सेवाएं हैं तथा आम नागरिकों से जुड़ी हुई है और हमें लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है।श्री ठाकुर ने वन निगम के अधिकारियों को वैश्विक स्पर्धा के मद्देनजर अपने कार्यों में नवीनतम तकनीक अपनाने पर बल दिया, ताकि निगम आर्थिक रूप से और अधिक सुदृढ़ हो सके। उन्होंने प्रदेश में स्थित दो विरोजा फैक्ट्रियों के आधुनिकीकरण करने पर बल दिया, ताकि गुणवत्तायुक्त उत्पादा तैयार हो सके और निगम की आय में भी बढ़ौतरी हो सके।उन्होंने कहा कि हमें अपनी पौधशालाओं में उन्नत किस्म के पौधे उगाने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि वन मण्डल के अधिकार क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों की नियमित बैठकें की जानी चाहिए, जिससे पौधशालाओं का अच्छी तरह उन्नत करने का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि पौधरोपण कार्य करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कार आदि भी दिए जाने चाहिए।इस अवसर पर नौणी विश्व विद्यालय के श्री कुलवन्त राय शर्मा ने चीड़ के वृक्ष से छिद्र विधि द्वारा विरोजा दोहन पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि चीड़ के वृक्ष मात्र विरोजा ही नहीं, बल्कि अन्य लाभ जैसे लकड़ी व वातावरण को हरित बनाने में भी सहायता करते हैं। उन्होंने पारम्परिक रिल तकनीक के स्थान पर बोर होल तकनीक अपनाने पर बल दिया तथा इस तकनीक से होने वाले लाभों की जानकारी दी।अतिरिक्त मुख्य सचिव वन श्री तरूण कपूर, प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन (हॉफ) डा. जी.एस. गोराया, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्य प्राणी) डा. कंग व वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।