सेकुलरिज्म का डंका बजाने वाली कांग्रेस किश्तवाड़ के दंगों पर चुप क्यों है? क्या किश्तवाड़ भारत का अंग नहीं है? क्या किश्तवाड़ में रहने वाले लोग भारतीय नहीं है? भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर सवाल दागते हुये कहा है कि सच यह है कि कांग्रेस वोट के तोल को देखकर मुंह खोलती है और धर्म-र्निपेक्षता बारे भी दोहरी नीति अपनाती है। भाजपा के राज्य सभा सदस्य और जम्मू-कश्मीर के पार्टी प्रभारी अविनाश राय खन्ना और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पंजाब सरकार के सहायक मीडिया सलाहकार विनीत जोशी ने धर्म-र्निपेक्षता बारे कांग्रेस की दोगली नीति को बेनकाब करते हुये कहा कि किश्तवाड़ में दंगों के दौरान मारे गये हिन्दू समुदाय से संबंधित अल्पसंख्यकों पर कांग्रेस अभी तक चुप क्यों है? क्या किश्तवाड़ के दंगा पीडि़तों को वैसी मरहम एवं संवेदना की जरूरत नहीं है, जैसे कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रधान सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने मुज्जफरनगर में मुसलिम समुदाय को लगाई है।
दोनों नेताओं ने कहा कि विडंवना है कि देश में लगभग एक ही समय पर दो विभिन्न जगहों पर हुये दुरुभाग्यपूर्ण दंगों के बारे में कांग्रेस सरेआम दोगली नीति अपना रही है। मुज्जफरनगर में कांग्रेस अध्यक्षता सोनिया गांधी प्रधानमंत्री को भी लेकर पहुंच जाते हैं जबकि किश्तवाड़ के प्रभावित हिन्दूओं के पास जाकर उन्हें हमदर्दी व हौंसला देना तो दूर उनके लिये ढंग से दो शब्द तक नहीं बोले जाते। दोनों नेताओं ने कहा कि कांग्रेस धर्म-र्निपेक्षता की चादर ओड़ केवल और केवल वोट की राजनीति करती है। शब्दों और तथ्यों के साथ खेलती है। यही कांग्रेस गुजरात के किसानों की आड़ में पंजाब और हरियाणा के सिखों की धार्मिक भावनाएं भडक़ाने की कोशिश में हैं।
गुजरात के किसानों के मुद्दे का सच यह है कि कच्छ जिले में कुल ७८४ किसानों पर केस बने हैं। इनमें पंजाब और हरियाणा से संबंधित किसानों के १६४ केस हैं। जबकि गुजरात मूल के १०८ किसानों पर भी इसी तरह की गाज लटकी हुई है। इनके अलावा ५१२ केस पंजाब, हरियाणा व गुजरात पंजाब, हरियाण व गुजरात में छोड़ देश के विभिन्न राज्यों से संबंधित किसानों पर है। लेकिन कांग्रेस इन केसों को ऐसे पेश करने लगी हुई है जैसे गुजरात प्रशासन केवल और केवल पंजाब और हरियाणा से संबंधित 'सिख' किसानों को ही निशाना बना रहा है। इससे भी कड़वा सच यह है कि यह विवादित सर्कुल्र वर्तमान मोदी सरकार द्वारा नहीं बल्कि १९६३ में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा जारी किया गया था। दोनों नेताओं ने पंजाब कांग्रेस के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा समेत सभी नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा है किश्तवाड़ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पंजाब कांग्रेस और कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व चुप क्यों है?