मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार संभावित उद्यमियों को अधोसंरचना, वित्तीय एवं अन्य प्रोत्साहन, त्वरित स्वीकृति एवं अन्य उपायों के माध्यम से हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए पूर्ण समर्पित है। मुख्यमंत्री गत सायं बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ उद्योग संघ के साथ ‘सतत्ता एवं निवेश प्रोत्साहन’ विषय पर आयोजित विचार-विमर्श सत्र में भाग ले रहे थे। श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि गत वर्षों में प्रदेश ने औद्योगिकीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने दीर्घ प्रक्रियाओं एवं अन्य औपचारिकताओं को सरलीकृत किया है। इस दिशा में कई अन्य पग भी उठाए गए हैं। नए उद्योगों की स्थापना के लिए एक भूमि बैंक स्थापित किया गया है और सभी औद्योगिक क्षेत्रों में अधोसरंचनात्मक सुविधाओं को सुधारा जा रहा है ताकि गुणवत्तायुक्त बिजली आपूर्ति एवं बेहतर संचार की सुविधा सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में नई उद्योग परियोजनाओं की स्थापना और इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए भूमि स्थानान्तरण की प्रक्रिया सहित सभी स्वीकृतियां 90 दिन में प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उद्योगों विशेषकर मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है ताकि राजस्व अर्जित करने के साथ-साथ युवाओं को व्यापक स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नई उद्योग नीति ला रही है। इस नई नीति में वित्तीय छूट जैसे मामलों पर प्रभावी तरीके से ध्यान देने और उद्यमियों की सुविधा के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं का सरलीकरण सुनिश्चित बनाने के लिए कार्य आरम्भ करने का प्रस्ताव है।श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश को दिया गया औद्योगिक पैकेज पड़ौसी राज्यों के दबाव के कारण नियत समय से पूर्व वापिस ले लिया गया क्योंकि पड़ौसी राज्यों को यह लग रहा था कि उनके राज्य से उद्योग हिमाचल प्रदेश जा रहे हैं, जो कि सत्य नहीं था। औद्योगिक पैकेज को वर्ष 2020 तक बहाल करने के मामले को उन्होंने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गॉंधी और केन्द्रीय उद्योग मंत्री श्री आनन्द शर्मा से जोरदार तरीके से उठाया है। उन्होंने आशा जताई कि प्रदेश के लिए औद्योगिक पैकज को बहाल कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र प्रदेश का औद्योगिक हब बन कर उभरा है। यह क्षेत्र औद्योगिक राजस्व का 70 प्रतिशत सृजित कर रहा है। उनके पूर्व मुख्यमंत्रित्व काल में भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी के अध्यक्ष के साथ बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। किन्तु पूर्व सरकार ने इस पद को खाली रखा और अतिरिक्त कार्यभार सोलन के उपायुक्त को दिया। उन्होंने कहा कि बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ विकास प्राधिकरण में भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी को तैनात किया जाएगा ताकि कार्यप्रणाली सुचारू बन सके और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिल सके।
उद्योग मंत्री श्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश में समुचित अधोसंरचना के सृजन से उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 494 मध्यम तथा बड़े एवं 39,276 लघु उद्योग स्थापित हैं। इन उद्योगों में 17 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और लगभग 3 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि देश के औद्योगिक मानचित्र पर हिमाचल प्रदेश को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।श्री अग्निहोत्री ने कहा कि औद्योगिक पैकेज लेने के उपरांत प्रदेश को 48 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव प्राप्त हुए, किन्तु केवल 13 हजार करोड़ रुपये के उद्योग ही प्रदेश में स्थापित हो सके। राज्य सरकार समुचित अधोसंरचना, प्रोत्साहन, त्वरित स्वीकृतियां एवं अन्य प्रयासों के माध्यम से संभावित उद्यमियों को प्रदेश में हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।
उद्योग मंत्री ने कहा कि नई उद्योग नीति-2013 का प्रारूप तैयार कर उद्यमियों एवं अन्य के सुझाव प्राप्त करने के लिए इसे उद्योग विभाग की आधिकारिक बैवसाइट पर डाला गया है। उन्होंने बद्दी-बरोटीवाला-नालगढ़ उद्योग संघ के सदस्यों से आग्रह किया कि वे नीति को अधिक व्यावहारिक एवं समसामायिक बनाने के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव दें। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही उद्योग सलाहकार परिषद का गठन भी किया जाएगा।श्री अग्निहोत्री ने कहा कि परवाणू में 100 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण कालिक टूल रूम की स्थापना की जा रही है। मिनी टूल रूम के रूप में इसकी आधारशिला श्री वीरभद्र सिंह ने रखी थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दक्षता विकास पर 100 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे तथा सोलन, कांगड़ा और ऊना जिलों में तीन नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ उद्योग संघ और अन्य उद्यमियों को कोरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पूरे करने के लिए आगे आना चाहिए तथा हरित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ कर्मचारियों को लिए उपयुक्त कल्याण योजनाएं एवं सार्वजनिक निजी सहभागिता के तहत नवीन कल्याण परियोजनाएं आरम्भ करनी चाहिए।
बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ उद्योग संघ के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र गुलेरिया ने इस अवसर पर सतत्ता विषय पर प्रस्तुतीकरण एवं प्रदेश में उद्योगों के लिए रोडमैप प्रस्तुत किया।
प्रदेश के अग्रणी उद्योगपति एवं वर्धमान समूह के अध्यक्ष श्री सचित जैन ने प्रदेश के उद्योग एवं इसकी विकास क्षमता पर प्रस्तुतिकरण दिया।बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ के पूर्व अध्यक्ष तथा चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष श्री अरूण रावत ने एमएसएनई के समक्ष चुनौतियां एवं विशेषज्ञता विषय पर प्रस्तुतिकरण दिया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री कुलदीप सिंह पठानिया, श्रमिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बावा हरदीप सिंह, मुख्य सचिव श्री एस. रॉय, प्रधान सचिव राजस्व एवं उद्योग श्री तरूण श्रीधर, प्रधान सचिव वित्त डॉ. श्रीकांत बाल्दी, प्रधान सचिव बहुद्देशीय परियोजनाएं एवं ऊर्जा तथा प्रदेश विद्युत बोर्ड लिमिटेड के अध्यक्ष श्री एस.के.बी.एस. नेगी, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव श्री सुभाष आहलुवालिया, श्रम आयुक्त सुश्री नंदिता गुप्ता, निदेशक सूचना एवं जन सम्पर्क तथा राज्य औद्योगिक विकास निगम के प्रबन्ध निदेशक श्री राजेन्द्र सिंह, निदेशक उद्योग श्री मोहन चौहान, उपायुक्त सोलन श्री मदन चौहान, अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा उद्यमी इस अवसर पर उपस्थित थे।