महानगर में गत कुछ दिनों से आपराधिक छवि वाले लोगों की घटनाओं से पूरा शहर सकते में हैं। गत दिनों एक युवक मीशी किरण कालिया (27) की कुछ युवकों द्वारा घर से बुलाकर बेरहमी से हत्या कर देने के बाद भी लुधियाना पुलिस ने एक सामान्य एफ आई आर तक दर्ज नहीं की, यही नहीं पीडि़त मां बाप के पुलिस के हर दरवाजें को खटखटाने के बावजूद पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। जिससे पुलिस कर्मचारियों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में दिख रही है। आज इसी संबंध में पीडि़त मां बाप ने स्थानीय बसंत रिजोर्ट में एक प्रैस वार्ता में अपने दुखड़े सुनाते हुए कहा कि मृतक उनका छोटा बेटा था और गत दिवस उसे फोन काल करके कुछ युवकों ने बुलाया था और बाद में उसकी बेरहमी से कटी हुई लाश उन्हें देर रात पैवीलियन मॉल के बाहर मिली और वहीं पर उसका एक्टिवा भी मिला।
मृतक के पिता अश्विनी कालिया व माता मीना कालिया ने मीडिया को बताया कि जब उन्हें रात को 12 बजकर 42 मिनट पर कॉल आई तो वह सीधे अस्पताल पहुंचे। लेकिन तब उन्हें मीशू की मौत बारे नहीं बताया गया और उसका ईलाज के नाम पर वहीं रखा गया। लेकिन अगले दिन दोपहर साढ़े 12 बजे बताया गया कि आपके बेटे की मौत हो चुकी है। जबकि न तो घटनास्थल से पुलिस ने मीशू को अस्पताल पहुंचाया था और न ही पुलिस वहां घटना के समय आई, जबकि घटनास्थल के 20 मीटर पर ही हर समय पुलिस नाके पर तैनात होती है। लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उस रात कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि मृतक को बुरी अवस्था में जब अस्पताल में कुछ युवक ही भर्ती करवाने ले गये तो वहां पुलिस पहले से ही खड़ी थी। पुलिस की यह कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आती है।
अश्विनी कालिया ने बताया कि इसके बाद पोस्टमार्टम की रिपोर्ट हुई, जिसमें भी तेजधार हथियारों के निशान होने के बावजूद भी डी.एम.सी. अस्पताल व पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों की रिपोर्ट में नहीं बताया गया, यही नहीं, मारने से पहले मीशू के पांव तोड़ दिये गये वे पेट पर बांधने के निशान थे, जिस बारे में भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नहीं दर्शाया गया है। लेकिन थाना डिवीजन नं 8 की पुलिस ने बेरहमी से हुए इस कत्ल के मामले में मात्र धारा 174 की कार्रवाई की। इंसाफ पाने के लिए हमने पुलिस उच्चाधिकारियों से सम्पर्क किया, लेकिन अभी तक पुलिस ने मृतक के कातिलों के खिलाफ न तो पर्चा दर्ज किया और न ही उनकी कोई खोज खबर की।
बस एक नाम की एस आई टी टीम गठित की गई, जो इस मामले को हल्के से लेकर चुप बैठी है। मृतक के परिजनों ने बताया कि थाना पुलिस ने घटना के तथ्यों को छिपाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और इस कत्ल को सड़क दुर्घटना के रूप में दिखाने के लिए मृतक का एक्टिवा खुद पुलिस वालों ने बुरी तरह तोड़ डाला, परंतु घटनास्थल से एक्टिवा सही सलामत लाया गया है। इंसाफ पाने के लिए और अज्ञात हत्यारों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर वह अब तक कई बार धरने लगा चुके हैं और कैंडल मार्च भी निकाल चुके हैं, लेकिन पुलिस की इस मामले में कोई कार्रवाई न करना उसके राजनीतिक प्रभाव में होने को सिद्ध करती है और हत्यारोपियों को बचाने की कवायद है।
उन्होंने कहा कि जिला पुलिस कमिश्रर द्वारा भी हमें कार्रवाई करने के दिलासे ही मिल रहे लेकिन कार्रवाई वहीं ढाक तीन पात की तरह वहीं की वहीं खड़ी है। पुलिस की ढीली कार्रवाई के चलते मृतक के परिजनों ने केन्द्र सरकार व एस.सी. कमिशन के उपचेयरमैन राज कुमार वेरका से इंसाफ की गुहार लगाई है। इस मौके पर राकेश घई, धर्म गुरू अरूण सिद्वू, बोबी बैंस, बबलू अनार्य कन्वीनर यूथ पंजाब भावाधस, राजेश खोखर राष्ट्रीय प्रधान भारतीय दलित सेना आदि मौजूद थे।