विश्व बैंक ने राज्य में हरित एवं स्थायी विकास को बढ़ाने के लिए हिमाचल प्रदेश को 100 मीलियन डॉलर (550 करोड़ रुपये) की परियोजना स्वीकृत की है। इस परियोजना के ऋण समझौते पर आज भारत सरकार, विश्व बैंक तथा हिमाचल प्रदेश सरकार के बीच नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर भारत सरकार की ओर से आर्थिक मामलों की संयुक्त सचिव सुश्री ऊषा टीटस तथा हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से प्रधान सचिव, वित्त डॉ. श्रीकांत बाल्दी तथा विश्व बैंक की ओर से विश्व बैंक के भारत में निदेशक श्री ओनो रूहल ने हस्ताक्षर किए। हिमाचल प्रदेश विश्व का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसे विश्व बैंक की यह महत्वाकांक्षी परियोजना प्राप्त हुई है। विश्व बैंक के क्लीन टैक्नोलॉजी फंड (सीटीफ) द्वारा यह परियोजा भारत सरकार को वित्त पोषित की जाएगी तथा हिमाचल प्रदेश को यह ऋण विशेष श्रेणी को बाह्य सहायता के दिशा निर्देशानुसार 90 प्रतिशत अनुदान एवं 10 प्रतिशत ऋण के आधार पर हस्तांतरित होगा। श्री ओनो रूहल ने इस परियोजना के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास के दीर्घकालिक पर्यावरणीय मॉडल की ओर परिवर्तन के हिमाचल प्रदेश के प्रयासों को समर्थन देना है, जिसके लिए इसके प्राकृतिक संसाधनों एवं समावेशी हरित विकास के प्रबंधन सुधार में बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्लीन टेक्नोलॉजी फंड 40 वर्ष की परिपक्वता की अवधि वाला सुलभ ऋण है, जिसमें 10 वर्ष की छूट अवधि भी शामिल है। उन्होेंने हिमाचल प्रदेश सरकार की विश्व बैंक की विभिन्न वित्त पोषित परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के प्रयासों के लिए सराहना भी की।
हिमाचल प्रदेश को इस प्रकार की परियोजना को प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बनने पर बधाई देते हुए ऊषा टिटस ने कहा कि समावेशी हरित वृद्धि इसका प्रमुख मुद्दा है और वैश्विक उष्मीकरण के बदलते परिपेक्ष्य में इस पर और ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की प्रथम विकास नीति ऋण परियोजना के सफलतापूर्वक कार्यान्वयन के प्रयासों के लिए सराहना की, जिसके तहत सितम्बर, 2012 में पुनर्निर्माण तथा विकास स्रोतों के लिए समान राशि स्वीकृत की गई थी। उन्होंने विश्वास जताया कि परियोजना का द्वितीय चरण हिमाचल प्रदेश को अच्छी नीतियां एवं दीर्घकालिक जल विद्युत परियोजनाओं के विकास और मौसम के प्रभावों को कम करने तथा स्थानीय समुदाय को जलागम परियोजनाओं के माध्यम से आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने तथा प्रदेश में दीर्घकालिक पर्यावरण पर्यटन गतिविधियां को बढ़ावा देने में सहयोग करेगा। प्रधान सचिव, वित्त डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने भारत सरकार का तथा विश्व बैंक द्वारा इस परियोजना के लिए देश भर में हिमाचल को चयनित करने के लिए आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश को मितव्ययी पर्यावरण सेवाएं उपलब्ध करवा रहा
है और राज्य द्वारा पहले ही स्थानीय लोगों की सांझेदारी से कई परियोजनाएं आरम्भ की गई हैं। उन्होंने विश्व बैंक दल को विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार तथा हिमाचल प्रदेश के लोग इस परियोजना को सफलतापूर्वक कार्यान्वयन बनाने के लिए संयुक्त रूप से प्रयास करेंगे। वरिष्ठ पर्यावरण विशेषज्ञ तथा इस कार्यक्रम के विश्व बैंक टास्क दल के प्रमुख श्री पीयूष डोगरा ने कहा कि इस परियोजना से हिमाचल प्रदेश में दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित बनाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि परियोजना की सफलता न केवल अन्य हिमालयन राज्य बल्कि दक्षिणी एशियाई क्षेत्र के देशों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करेगी। आर्थिक मामले मंत्रालय के निदेशक श्री देवाशीष प्रूस्ती, आर्थिक मामले विभाग के उप-सचिव श्री ब्रजेश पांडे, हिमाचल प्रदेश पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक डॉ. शरद नेगी तथा विश्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।