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राजीव रंजन सिंह ने ओडिशा में मत्स्य पालन विकास की समीक्षा की

Rajiv Ranjan Singh, Bharatiya Janata Party, BJP, Dharmendra Pradhan, Bhubaneshwar, Odisha
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भुवनेश्‍वर , 08 Jul 2026

Last updated on: Jul 09, 2026, 13:28 IST

भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन मंत्रालय ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्‍वर में 8 जुलाई 2026 को माननीय केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह की अध्यक्षता में ‘ओडिशा राज्य में मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि के विकास हेतु योजनाओं एवं कार्यक्रमों के कार्यान्वयन पर समीक्षा बैठक’ का आयोजन किया।

यह बैठक भारत सरकार के माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन एवं पंचायती राज राज्य मंत्री माननीय प्रोफेसर एस.पी. सिंह बघेल और ओडिशा सरकार के माननीय मत्स्य पालन, कृषि एवं लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री गोकुलानंद मल्लिक की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित की गई।

बैठक में भारत सरकार के मत्स्य विभाग, ओडिशा राज्य मत्स्य विभाग, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), आईसीएआर संस्थानों, एनसीडीसी और पारादीप पोर्ट ट्रस्ट के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन एवं पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने राज्य के एक महत्वपूर्ण मत्स्य पालन केंद्र के रूप में उभरने के प्रयासों की सराहना की।

राज्य में मीठे पानी, खारे पानी और समुद्री मत्स्य पालन के परिणामस्वरूप 2025-26 में 12.70 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया, जिससे 16 लाख से अधिक मछुआरों को सहायता मिली और समुद्री खाद्य निर्यात से 5,429 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। यह उल्लेखनीय है कि राज्य को प्रधानमंत्री मत्‍स्‍य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत पर्याप्त सहायता प्राप्त हुई है, जिसमें मछली उत्पादन संवर्धन, अवसंरचना विकास, प्रौद्योगिकी को अपनाने, मछुआरा कल्याण और कटाई के बाद की सुविधाओं को कवर करने वाली 1,301 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

केंद्रीय मंत्री ने ओडिशा सरकार से मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को और मजबूत करने तथा मछुआरों, मछली पालकों, निर्यातकों, सहकारी समितियों, एफएफपी और अन्य हितधारकों के बीच घनिष्ठ सहयोग को बढ़ावा देकर निर्यात की अपार संभावनाओं का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने, निर्यात के अवसरों का विस्तार करने और मत्स्य पालन क्षेत्र में आय बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण को बढ़ाने, आधुनिक प्रसंस्करण के माध्यम से मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने और मछली की प्रजातियों और मत्स्य उत्पादों में विविधता लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

भारत सरकार के मत्स्य विभाग में सचिव (मत्स्य पालन) डॉ. अभिलक्ष लिखी ने मत्स्य पालन विकास संबंधी पहलों के अधिकतम प्रभाव के लिए केंद्रीय योजनाओं, राज्य की पहलों, वित्तीय संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ओडिशा में मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए समयबद्ध परियोजना क्रियान्वयन, परिणाम-आधारित निगरानी और नवाचार, स्थिरता और संस्थागत सुदृढ़ीकरण पर अधिक ध्यान केंद्रित करने पर बल दिया।

समीक्षा बैठक का शुभारंभ एनएफडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बिजय कुमार बेहरा के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया और ओडिशा में आजीविका, पोषण सुरक्षा और निर्यात को बढ़ावा देने में मत्स्य पालन और जलीय कृषि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए चर्चा का संदर्भ प्रस्तुत किया। इसके बाद भारत सरकार के मत्स्य विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. सुरभि राय ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने ओडिशा में पीएमएमएसवाई, मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ), किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और पीएम-एमकेएसएसवाई सहित प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं के कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा की।

प्रस्तुति में पीएमएमएसवाई के तहत हुई प्रगति, मत्स्य पालन अवसंरचना, मछली पकड़ने के बंदरगाहों, हैचरी, चारा मिलों, जलाशय पिंजरा संस्कृति, जलवायु-लचीले तटीय मत्स्य पालन गांवों, कृत्रिम चट्टानों, मत्स्य सहकारी समितियों और एफएफपी के विकास को भी शामिल किया गया, साथ ही केसीसी कवरेज, पता लगाने की क्षमता, परियोजना कार्यान्वयन और निर्यात-उन्मुख मूल्य श्रृंखला विकास सहित विशेष ध्यान देने योग्य क्षेत्रों की पहचान की गई।

आईसीएआर-केंद्रीय मीठे जल मत्स्य पालन संस्थान (आईसीएआर-सीआईएफए), नाबार्ड और एनसीडीसी के प्रतिनिधियों ने ओडिशा के मत्स्य पालन क्षेत्र को वैज्ञानिक मत्स्य पालन पद्धतियों, संस्थागत ऋण में वृद्धि, सहकारी विकास, अवसंरचना निर्माण, मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और बाजार संपर्कों के माध्यम से मजबूत करने के लिए चल रही पहलों के बारे में सभा को जानकारी दी।

उन्होंने मत्स्य पालन अवसंरचना जैसे हैचरी, मछली पकड़ने के बंदरगाह, लैंडिंग केंद्र, अतिरिक्त शीत भंडारण व्‍यवस्‍था और प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के अवसरों पर प्रकाश डाला, साथ ही उत्पादकता, लाभप्रदता और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए स्कैम्पी, सीबास, पोम्पानो और तिलापिया जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों में विविधता को बढ़ावा देने पर भी बल दिया।

प्रतिनिधियों ने राज्य के मत्स्य पालन क्षेत्र की पूरी क्षमता को उजागर करने के लिए प्रौद्योगिकी अपनाने, हितधारकों के समन्वय और निवेश बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। विचार-विमर्श में ओडिशा को एक अग्रणी मत्स्य पालन और जलीय कृषि केंद्र में बदलने और भारत की नीली अर्थव्यवस्था की महत्वाकांक्षाओं में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, अनुसंधान संस्थानों, वित्तीय संस्थानों और मत्स्य पालन से जुड़े हितधारकों द्वारा समन्वित प्रयासों के महत्व पर जोर दिया गया।

 

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