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वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में राजनाथ सिंह ने कहा : विकसित भारत की यात्रा में क्षेत्रीय उद्योगों को भागीदार बनना चाहिए

“क्षेत्रीय शक्तियों को राष्ट्रीय क्षमताओं, स्थानीय नवाचारों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा और औद्योगिक विकास को रणनीतिक शक्ति में बदलने की आवश्यकता है”

Rajnath Singh, Union Defence Minister, Defence Minister of India, BJP, Bharatiya Janata Party, Vibrant Gujarat Regional Conference, VGRC, Bhupendra Patel, Chief Minister of Gujarat, BJP Gujarat, Rajiv Ranjan Singh, Vadodara
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वडोदरा , 30 Jun 2026

Last updated on: Jun 30, 2026, 18:12 IST

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि “विकसित भारत” केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से समृद्ध, प्रौद्योगिकी की दृष्टि से सक्षम और सामाजिक रूप से सशक्त राष्ट्र के निर्माण का संकल्प है। उन्होंने क्षेत्रीय उद्योगों से विकसित भारत की इस यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें क्षेत्रीय शक्तियों को राष्ट्रीय क्षमताओं में, स्थानीय नवाचारों को वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में और औद्योगिक विकास को रणनीतिक शक्ति में बदलना होगा।

वे 30 जून, 2026 को वडोदरा में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान उद्योगपतियों, उद्यमियों, युवा नवप्रवर्तकों तथा शिक्षाविदों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र रजनीकांत पटेल, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह और गुजरात की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा वकील भी उपस्थित थीं।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए भारत की आत्मनिर्भरता, प्रौद्योगिकी संबंधी क्षमता और सामूहिक संकल्प ही आने वाले दशकों में वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका निर्धारित करेंगे। उन्होंने कहा, “इतिहास हमें सिखाता है कि महान राष्ट्र तीन मूलभूत स्तंभों पर टिके होते हैं: आर्थिक शक्ति, प्रौद्योगिकी संबंधी उत्कृष्टता और राष्ट्रीय सुरक्षा।

आर्थिक समृद्धि और प्रौद्योगिकी संबंधी प्रगति राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करती हैं, जबकि एक सुरक्षित राष्ट्र स्थिरता प्रदान करता है जिससे उद्योग और नवाचार फल-फूल सकें।” उन्होंने सुरक्षित सीमाओं और मजबूत अर्थव्यवस्था वाले भारत के निर्माण के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि रक्षा क्षेत्र का विकास केवल हथियारों और प्रौद्योगिकियों के निर्माण तक ही सीमित नहीं है; यह एक विशाल आर्थिक इको-सिस्टम को गति प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि रक्षा गलियारे अवसंरचना, रसद, उद्योग और रोजगार में नए अवसर पैदा करते हैं, जबकि अनुसंधान एवं विकास, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर जोर देने से औद्योगिक आधार मजबूत होता है। उन्होंने भारत की औद्योगिक और रक्षा क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए इस गति का लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।

रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक समय था जब भारत अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर था लेकिन आज वह रक्षा विनिर्माण और निर्यात के क्षेत्र में एक प्रमुख देश के रूप में तेजी से उभर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि स्वदेशी प्लेटफार्मों की सफलता, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और नवप्रवर्तकों एवं स्टार्टअप्स के उत्साह ने मिलकर देश में एक मजबूत रक्षा इकोसिस्टम के निर्माण में योगदान दिया है। श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “आत्मनिर्भर भारत के तहत हम एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा दे रहे हैं।

मेक-इन-इंडिया, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया की समीक्षा और प्रौद्योगिकी विकास कोष जैसी पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए बजटीय प्रावधानों का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित करना और उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एकीकृत करना है। निवेश को बढ़ावा देने के लिए हमने लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाया है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति को उदार बनाया है।

सृजन पोर्टल, आईडीईएक्स, रक्षा परीक्षण अवसंरचना, ग्रीन चैनल प्रमाणन और स्व-प्रमाणन ने लघु उद्योगों और स्टार्टअप्स में विश्वास जगाया है। पारदर्शी नीतियों, व्यापार करने में सुगमता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तंत्र, परीक्षण अवसंरचना और सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास ढांचे के माध्यम से हम हर क्षेत्र में अपने उद्योगपतियों का समर्थन कर रहे हैं।

हमारा उद्देश्य एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है, जहां नवाचार, उद्योग और आत्मनिर्भरता मिलकर नए भारत की सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करें।” सरकार के प्रयासों के कारण हासिल की गई उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आज घरेलू रक्षा उत्पादन 2014 में मात्र 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

उन्होंने आगे कहा कि रक्षा निर्यात, जो 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, बढ़कर सर्वकालिक उच्च स्तर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। श्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ अलग-थलग पड़ जाना नहीं है; इसका अर्थ है एक ऐसा राष्ट्र, जो अपने पैरों पर मजबूती से खड़ा हो और विश्व के साथ एक समान भागीदार के रूप में जुड़े।

उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं के साथ सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उद्यमों को प्रोत्साहित कर रही है, ताकि उनके ठोस परिणाम भारत की धरती पर प्राप्त हों, स्वदेशी क्षमताएं मजबूत हों और देश के लोगों को इसका लाभ मिले। रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि गुजरात आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि राज्य में एक मजबूत औद्योगिक आधार, कुशल कार्यबल और उद्यमशीलता की भावना मौजूद है।

उन्होंने कहा कि उन्नत विनिर्माण से लेकर अत्याधुनिक अनुसंधान तक गुजरात में रक्षा उत्पादन और प्रौद्योगिकी का एक प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता है। उन्होंने वडोदरा स्थित टाटा-एयरबस विमान परिसर का विशेष रूप से उल्लेख किया, जहां सी-295 परिवहन विमानों का निर्माण होता है। उन्होंने आगे कहा कि विश्व के सबसे उन्नत स्व-चालित तोप प्रणालियों में से एक, के-9 वज्र, जो भारतीय सेना की मारक क्षमता को बढ़ाता है, का निर्माण गुजरात में किया जा रहा है।

इस बात पर जोर देते हुए कि भविष्य के युद्ध और अर्थव्यवस्था का आधार चिप्स होंगे, श्री राजनाथ सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि साणंद और धोलेरा में विकसित किया जा रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम भारत की प्रौद्योगिकी संबंधी संप्रभुता का आधार बनेगा। उन्होंने कहा “कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग तक तथा साइबर सुरक्षा से लेकर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तक गुजरात का यह इकोसिस्टम हमें हर क्षेत्र में सशक्त बनाएगा।”

रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि गुजरात की औद्योगिक क्षमताओं को सीधे रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं से जोड़ जा सकता है। राज्य का रसायन और पेट्रोरसायन उद्योग उन्नत सामग्रियों, कंपोजिट और प्रणोदक जैसे क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा, “स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग एवियोनिक्स, सेंसर और संचार प्रणालियों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

इसके अलावा, राज्य की बंदरगाह और जहाज निर्माण क्षमताएं नौसैनिक प्रणालियों और समुद्री सुरक्षा को मजबूत कर सकती हैं। नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में गुजरात की अग्रणी भूमिका भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकती है। राज्य में रक्षा विनिर्माण केंद्र के लिए आवश्यक संपूर्ण इकोसिस्टम मौजूद है।

मुझे विश्वास है कि गुजरात के युवा और उद्यमी इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।” इस कार्यक्रम के अंतर्गत श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा एवं अंतरिक्ष उद्योगों पर आयोजित एक संगोष्ठी में निजी उद्योग प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों से भी बातचीत की। उन्होंने रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने की दिशा में उनके प्रयासों की सराहना की और भारत की विकास यात्रा में और अधिक योगदान देने के लिए अनुकूल वातावरण बनाने हेतु सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इस बातचीत के दौरान प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं महानिदेशक (उत्पादन समन्वय एवं सर्विसेज़ इंट्रैक्शन), डीआरडीओ डॉ. चंद्रिका कौशिक भी उपस्थित थीं। रक्षा मंत्री ने एक प्रदर्शनी का भी दौरा किया, जिसमें उद्योग, एमएसएमई, स्टार्ट-अप, ऑटोमोबाइल क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, हस्तशिल्प, महिला कारीगरों, जनजातीय उत्पादों, भारी उद्योगों, गतिशीलता नवाचारों, निर्यात और उद्यमिता से संबंधित स्टॉल शामिल थे।

वर्ष 2003 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया ‘वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट’ आज समावेशी विकास और सतत विकास के लिए बिजनेस नेटवर्किंग, ज्ञान साझा करने और रणनीतिक साझेदारी के लिए सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों में से एक बन चुका है। वाइब्रेंट गुजरात के सफल मॉडल की पहुंच और प्रभाव को और बढ़ाने के लिए गुजरात सरकार राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलनों की एक श्रृंखला आयोजित कर रही है।

ये क्षेत्रीय सम्मेलन क्षेत्रीय ताकतों को प्रदर्शित करने, जमीनी स्तर पर विकास को गति देने तथा स्थानीय आकांक्षाओं को ‘विकसित भारत @2047’ और ‘विकसित गुजरात @2047’ के व्यापक विजन के साथ जोड़ने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करते हैं।

 

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