माननीय प्रधानमंत्री के टीबी-मुक्त भारत के विज़न तथा राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के उद्देश्यों के अनुरूप, चंडीगढ़ के मुख्य सचिव श्री एच. राजेश प्रसाद ने आज इंटेंसिव मिशन मोड में चंडीगढ़ में टीबी उन्मूलन में तेजी लाने हेतु तैयार की गई कार्ययोजना को अंतिम रूप देने के लिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन के स्वास्थ्य सचिव श्री मनदीप सिंह बराड़ सहित स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक, खेल निदेशक, समाज कल्याण निदेशक, उच्च शिक्षा निदेशक, स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा, नगर निगम, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, श्रम, शहरी विकास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन की कार्यवाहक निदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, डॉ. सद्भावना पंडित ने चंडीगढ़ में टीबी मुक्त भारत अभियान की वर्तमान स्थिति तथा राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शहरभर में सघन एकीकृत स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है ताकि संवेदनशील एवं उच्च जोखिम वाले वर्गों में क्षय रोग सहित अन्य बीमारियों की शीघ्र पहचान एवं जांच सुनिश्चित की जा सके।
इससे समय पर उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ टीबी-मुक्त चंडीगढ़ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। वर्तमान महामारी विज्ञान संबंधी स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि क्षय रोग का उन्मूलन तभी संभव है जब इसके लिए संपूर्ण सरकार एवं संपूर्ण समाज (Whole-of-Government and Whole-of-Society) की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने सार्वजनिक एवं निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, सामुदायिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों, जनप्रतिनिधियों तथा नागरिकों की सक्रिय सहभागिता पर विशेष बल दिया। बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करने पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसका उद्देश्य चंडीगढ़ में टीबी की घटनाओं एवं मृत्यु दर में कमी लाना तथा सक्रिय रोगी खोज एवं शीघ्र निदान को और अधिक प्रभावी बनाना है।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी परिधीय गांवों, श्रमिक बस्तियों तथा अन्य चिन्हित उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में घर-घर जाकर व्यापक टीबी स्क्रीनिंग की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि चंडीगढ़ के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले संवेदनशील वर्गों के व्यक्तियों की गहन टीबी जांच सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि अस्पतालों के सभी ओपीडी एवं आईपीडी रोगियों के लिए सार्वभौमिक टीबी स्क्रीनिंग को नियमित व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए ताकि छूटे हुए टीबी रोगियों की समय रहते पहचान की जा सके।
जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव ने प्रत्येक नगर निगम वार्ड के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए, जो टीबी स्क्रीनिंग गतिविधियों की निगरानी करेंगे तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने वार्ड पार्षदों की सक्रिय भागीदारी पर भी बल दिया ताकि जनसहभागिता को बढ़ावा मिले तथा स्थानीय स्तर पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
सामुदायिक जागरूकता के महत्व को देखते हुए बैठक में शिक्षा, परिवहन, समाज कल्याण, खेल तथा अन्य संबंधित विभागों की सहभागिता से व्यापक सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि 14 वर्ष से अधिक आयु के स्कूली बच्चों की टीबी स्क्रीनिंग कराई जाएगी तथा माय भारत स्वयंसेवकों को जनजागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता गतिविधियों में सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा।
बैठक में सक्रिय रोगी खोज को और अधिक सुदृढ़ बनाने, तीव्र आणविक जांच (Rapid Molecular Diagnostics) तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने, डिजिटल तकनीकों एवं सामुदायिक सहयोग के माध्यम से उपचार अनुपालन को मजबूत करने, पात्र संपर्कों को निवारक उपचार उपलब्ध कराने, टीबी रोगियों के लिए पोषण सहायता में सुधार करने तथा लक्षित हस्तक्षेप एवं डेटा आधारित निगरानी के माध्यम से टीबी हॉटस्पॉट की पहचान करने की व्यापक रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में स्वीकृत कार्ययोजना के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं
* उच्च जोखिम वाले वार्डों, परिधीय गांवों, श्रमिक बस्तियों एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में घर-घर जाकर सक्रिय टीबी स्क्रीनिंग।
* अस्पतालों के सभी ओपीडी एवं आईपीडी रोगियों की सार्वभौमिक टीबी स्क्रीनिंग तथा स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले संवेदनशील वर्गों की गहन जांच।
* तीव्र आणविक जांच के माध्यम से शीघ्र निदान तथा यूनिवर्सल ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग।
* पात्र संपर्कों की प्रभावी कांटेक्ट ट्रेसिंग तथा ट्यूबरकुलोसिस प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) का विस्तार।
* निजी स्वास्थ्य क्षेत्र द्वारा टीबी मामलों की अधिसूचना, उपचार सहयोग तथा उपचार अनुपालन की निगरानी को सुदृढ़ करना।
* शिक्षा, परिवहन, समाज कल्याण, खेल विभाग, स्थानीय निकायों एवं सामुदायिक संगठनों की सहभागिता से व्यापक जनजागरूकता अभियान।
* 14 वर्ष से अधिक आयु के स्कूली बच्चों की स्क्रीनिंग तथा माय भारत स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी।
* प्रत्येक नगर निगम वार्ड में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति तथा वार्ड पार्षदों की सक्रिय सहभागिता।
* टीबी रोगियों के लिए पोषण, सामाजिक एवं मनोसामाजिक सहायता को और अधिक सुदृढ़ करना।
* डैशबोर्ड आधारित निगरानी प्रणाली के माध्यम से मासिक प्रदर्शन समीक्षा तथा नियमित अंतर-विभागीय समीक्षा बैठकें।
बैठक के अंत में इंटेंसिव मिशन मोड में चंडीगढ़ में टीबी उन्मूलन में तेजी लाने हेतु तैयार की गई कार्ययोजना को स्वीकृति प्रदान की गई। यह कार्ययोजना सक्रिय रोगी खोज, शीघ्र निदान, समयबद्ध उपचार तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से टीबी-मुक्त चंडीगढ़ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करती है। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय के साथ स्वीकृत कार्ययोजना का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करें तथा स्पष्ट जवाबदेही एवं नियमित निगरानी की व्यवस्था बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों का उद्देश्य सभी छूटे हुए टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान करना, टीबी से होने वाली मृत्यु दर में कमी लाना तथा सतत राजनीतिक प्रतिबद्धता, प्रशासनिक नेतृत्व, सामुदायिक सहभागिता एवं साक्ष्य-आधारित रणनीतियों के माध्यम से टीबी-मुक्त चंडीगढ़ का लक्ष्य प्राप्त करना है। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि स्वीकृत कार्ययोजना को मिशन मोड में तत्काल लागू किया जाए तथा नियमित समीक्षा के माध्यम से पूरे केंद्रशासित प्रदेश में टीबी की घटनाओं एवं मृत्यु दर में तेजी से कमी सुनिश्चित की जाए।