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गढ़वाली लोक संगीत के जनक जीत सिंह नेगी, जिन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति को दी नई पहचान

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Gurpreet Singh

Gurpreet Singh

5 Dariya News

मुंबई , 20 Jun 2026

Last updated on: Jun 20, 2026, 18:01 IST

आधुनिक गढ़वाली लोक संगीत के जनक माने जाने वाले जीत सिंह नेगी का जन्म 2 फरवरी 1925 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की पैडुलस्यूं पट्टी के अयाल गांव में हुआ था, जो एक संगीतकार, गायक, गीतकार, लेखक, निर्देशक और रंगकर्मी थे। जीत सिंह नेगी उस दौर के एक ऐसे प्रसिद्ध संगीतकार और गीतकार थे, जब रेडियो भी बहुत कम लोगों के घरों में होते थे और टीवी की तो कोई कल्पना तक नहीं कर सकते हैं। 

उन्होंने उस दौर में लोक संगीत को देश भर में प्रसिद्ध किया और एन नई पहचान दिलाई। जीत सिंह नेगी के पिता का नाम सुल्तान सिंह नेगी और माता का नाम रूपदेई देवी था। उनके पिता उस समय ब्रिटिश सेना में थे और वे म्यांमार में तैनात थे। 

जीत ने अपनी प्रारंभिक पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई गांव में की। इसके बाद, उनके पिता उन्हें अपने साथ म्यांमार ले गए और उन्होंने कक्षा छठी से 8वीं तक की पढ़ाई म्यांमार से पूरी की। उसके बाद उनके पिता का ट्रांसफर लाहौर में हो गया और उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई लाहौर से पूरी की। 

इसके बाद वे फिर अपने गांव चले गए और वहीं के एक सरकारी कॉलेज से इंटरमीडिएट पास किया। हालांकि, पारिवारिक स्थिति सही नहीं होने के कारण 12वीं के बाद वो आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। जीत सिंह नेगी को बचपन से ही संगीत में रुचि थी। 

इसलिए उन्होंने 12वीं के बाद गायिकी की ओर आगे बढ़ना शुरू किया। उन्हें लोकगीतों से काफी लगाव था। हालांकि, उनके गीत और संगीत की यात्रा 1949 में शुरू हुई, जब उनके 6 गीतों की रिकॉर्डिंग 'यंग इंडिया ग्रामोफोन कंपनी' ने रिकॉर्ड की। 

बाद में 'एंजेल न्यू रिकॉर्डिंग' कंपनी ने भी उनके कुछ गीत रिकॉर्ड किए। जीत सिंह नेगी को जितना लगाव गीत और संगीत से था, उतना ही लगाव उन्हें एक्टिंग से भी था। अपनी इसी रुचि के कारण उन्होंने आगे कई नाटक भी लिखे और उनका निर्देशन भी किया।

जीत सिंह नेगी उत्तराखंड के ऐसे पहले लोक गायक थे, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के बलबूते एलपी रिकॉर्ड (ग्रामोफोन) 1949 में बन गया था। उस समय ऐसे रिकॉर्ड केवल हिंदी और फिल्मों के गीतों के ही बनते थे। जीत ने अपनी अनूठी प्रतिभा से गढ़वाली लोकगीतों को एक नई पहचान दिलाई थी।

जीत सिंह नेगी ने 1954 में पहली बार आकाशवाणी दिल्ली के लिए अपने गीतों की रिकॉर्डिंग की। यह उस समय एक लोकगायक के लिए बड़ी उपलब्धि थी। वहीं, उनका निधन 94 की उम्र में 21 जून 2020 को देहरादून के धर्मपुर स्थित अपने आवास में हुआ। 

उनकी पत्नी का नाम मनोरमा नेगी है। इसी के साथ उनकी दो बेटियां और एक बेटा हैं। बेटे का नाम ललित मोहन नेगी और बेटियों में एक मधु नेगी और दूसरी बेटी मंजू है।

 

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