वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह के व्यापक दृष्टिकोण , दूरदर्शिता और समाज के प्रत्येक वर्ग तक शिक्षा पहुंचाने के संकल्प के तहत गुरु नानक देव विश्वविद्यालय ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सिख रेजिमेंटल सेंटर, भारतीय सेना के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता पत्र (एमओयू) साइन किया है। इस पहल के माध्यम से अग्निपथ योजना के तहत सेवा दे रहे अग्निवीरों और अन्य सैनिक जवानों को विश्वविद्यालय के यूजीसी मान्यता प्राप्त ओडीएल और ऑनलाइन कोर्सों के जरिए उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
एमओयू के अनुसार अग्निवीर विश्वविद्यालय के डायरेक्टोरेट ऑफ ऑनलाइन स्टडीज के तहत चल रहे अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सों में प्रवेश ले सकेंगे। इससे वे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त डिग्रियां हासिल कर अपनी पेशेवर योग्यता और करियर संभावनाओं को और मजबूत कर सकेंगे।यह एमओयू वाइस-चांसलर कार्यालय के कमेटी रूम में आयोजित समारोह के दौरान वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह की उपस्थिति में साइन किया गया। इस अवसर पर ब्रिगेडियर दिग्विजय सिंह, एसएम, कमांडेंट सिख रेजिमेंटल सेंटर, कर्नल नितिन गौतम और मेजर डी.वी. बसनेट भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने कहा कि देश की सेवा कर रहे युवाओं को शिक्षा और कौशल से लैस करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय हमेशा ऐसे नए मॉडल विकसित करने में अग्रणी रहा है जो शिक्षा को केवल कक्षा तक सीमित नहीं रखते, बल्कि हर उस व्यक्ति तक पहुंचाते हैं जो अपने भविष्य को संवारना चाहता है।
उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल एक एमओयू नहीं, बल्कि शिक्षा, राष्ट्र निर्माण और मानव संसाधन विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अग्निवीर अब अपनी सैन्य सेवा के साथ-साथ बिना किसी रुकावट के अपनी अकादमिक यात्रा जारी रख सकेंगे, जो उनके भविष्य के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी।प्रो. करमजीत सिंह ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भारतीय सेना की अन्य रेजिमेंटों और फॉर्मेशनों के साथ भी ऐसे सहयोगी समझौते करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय सैनिक जवानों के समग्र विकास के लिए शिक्षा, रिसर्च, ट्रेनिंग और कम्युनिटी आउटरीच क्षेत्रों में और प्रयास करेगा।ब्रिगेडियर दिग्विजय सिंह ने विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम अग्निवीरों और अन्य सैन्य कर्मियों के लिए सेवा के दौरान ही अपनी शिक्षा और कौशल बढ़ाने का शानदार अवसर साबित होगा।
डीन अकादमिक मामलों प्रो. (डॉ.) हरविंदर सिंह सैणी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने यूजीसी-डीईबी दिशा-निर्देशों के अनुसार मजबूत डिजिटल लर्निंग सिस्टम तैयार किया है, जिससे विद्यार्थी किसी भी स्थान से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।डॉ. सुभीत कुमार जैन, डायरेक्टर, डायरेक्टोरेट ऑफ ऑनलाइन स्टडीज ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय की ऑनलाइन शिक्षा यात्रा का महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन मोड अग्निवीरों के लिए सबसे उपयुक्त है क्योंकि इसके माध्यम से वे कहीं भी रहकर रिकॉर्डेड लेक्चर, डिजिटल लर्निंग सामग्री, ऑनलाइन सहायता और परीक्षा सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय इस समय बीए, बीकॉम, बीसीए, एमबीए, एमसीए, एमए अंग्रेजी, एमए पंजाबी सहित कई कौशल-आधारित डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स ऑनलाइन चला रहा है।रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) के.एस. चहल ने इस एमओयू को कौशल विकास, लाइफलोंग लर्निंग और युवाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक अग्रणी कदम बताया।
समारोह में डॉ. सतनाम सिंह देओल, डीन विद्यार्थी कल्याण, डॉ. कमलेश गुलेरिया, प्रोफेसर इंचार्ज परीक्षाएं, डॉ. सरोज बाला, डीन कॉलेज विकास परिषद, श्री सुखदेव राज सूरी, कंसल्टेंट फाइनेंस, श्री प्रवीण पुरी, डायरेक्टर जनसंपर्क सहित विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा सिख रेजिमेंट के अधिकारी और जेसीओ भी उपस्थित रहे।