Wednesday, 22 July 2026

 

 

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्टार्टअप्स के लिए महा जल मिशन लॉन्च किया

जल, इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन, चिकित्सा प्रौद्योगिकी और 6जी में एएनआरएफ के मिशन-मोड कार्यक्रम देश भर में स्टार्टअप, एमएसएमई और संस्थानों के लिए अवसरों का विस्तार कर रहे हैं : डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली , 01 Jun 2026

Last updated on: Jun 02, 2026, 12:01 IST

जल क्षेत्र में स्टार्टअप उद्यमों को समर्थन देने के लिए 200 करोड़ रुपये की "अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) - जल शक्ति मंत्रालय की महा जल परियोजना" का शुभारंभ करते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) देश भर में स्टार्टअप उद्यमों, एमएसएमई, विश्वविद्यालयों और नवोन्मेषकों के लिए अवसरों का विस्तार करके अनुसंधान निधि का लोकतंत्रीकरण कर रहा है।

पूरे क्रियाकलाप में यह सुनिश्चित किया जाता है कि राष्ट्रीय मिशन, वैज्ञानिक संसाधन और नवाचार समर्थन अब सीमित संख्या में संस्थानों तक ही सीमित न रहें। नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में जल अनुसंधान एवं विकास पर राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एएनआरएफ की स्थापना इस लंबे समय से चली आ रही चिंता को दूर करने के लिए की गई थी कि अनुसंधान निधि का एक बड़ा हिस्सा अक्सर कुछ स्थापित संस्थानों को ही मिल जाता है, जबकि छोटे विश्वविद्यालय, स्टार्टअप और उभरते हुए नवप्रवर्तक मुख्यधारा के नवाचार इकोसिस्‍टम से बाहर रह जाते हैं।

उन्होंने कहा कि यह फाउंडेशन संसाधनों, साझेदारियों और मिशन-उन्मुख अनुसंधान अवसरों तक पहुंच को व्यापक बना रहा है, जिससे देश भर के संस्थान और नवप्रवर्तक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में योगदान कर सकें। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एएनआरएफ मिशन-आधारित नवाचार के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा है और इसने इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, 6जी संचार और जल सहित रणनीतिक क्षेत्रों में उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में उन्नति के लिए मिशन (एमएएचए) शुरू किए हैं।

ये मिशन मौलिक अनुसंधान से लेकर प्रौद्योगिकी विकास, सत्यापन और तैनाती तक एक एकीकृत मार्ग का निर्माण कर रहे हैं, साथ ही शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप और सरकारी संस्थानों को एक साथ लाकर महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एमएएचए जल मिशन का शुभारंभ इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह मिशन विकास संबंधी प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के विजन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जल शक्ति मंत्रालय के गठन के माध्यम से पहली बार जल संबंधी कार्यों को एक एकीकृत ढांचे के अंतर्गत लाया है, जिससे जल सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का दर्जा प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि महा जल मिशन, जल क्षेत्र के लिए व्यापक और टिकाऊ समाधान विकसित करने हेतु वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योग, स्टार्टअप और जमीनी स्तर के हितधारकों को जोड़ने वाला एक सहयोगात्मक मंच बनाकर उस विजन को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। भारत के बढ़ते नवाचार इकोसिस्‍टम पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश ने एक दशक पहले के लगभग 350-400 स्टार्टअप से प्रगति करते हुए आज दो लाख से अधिक स्टार्टअप तक का सफर तय किया है, जिससे लगभग 20-24 लाख रोजगार सृजित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्टअप आंदोलन नवाचार-आधारित विकास के सबसे मजबूत इंजनों में से एक बन गया है और महा मिशनों जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उद्यमशीलता की प्रतिभा को राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान की दिशा में निर्देशित किया जाए, साथ ही रोजगार, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास के नए अवसर भी सृजित किए जाएं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के समग्र सरकारी दृष्टिकोण ने राष्ट्रीय मिशनों की परिकल्पना और कार्यान्वयन के तरीके में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है। अंतरिक्ष क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए सुधारों ने इस क्षेत्र को व्यापक भागीदारी के लिए खोल दिया है और नवप्रवर्तकों तथा निजी उद्यमों के लिए नए अवसर सृजित किए हैं।

दशकों तक सीमित रही भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्य आज लगभग 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर है और आने वाले वर्षों में इसके बढ़कर लगभग 40-45 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने की उम्मीद है, जो सहयोगात्मक नवाचार और नीतिगत समर्थन की शक्ति को दर्शाता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने शासन, अवसंरचना नियोजन, कृषि, संसाधन मानचित्रण और सार्वजनिक सेवा वितरण में अनुप्रयोगों के माध्यम से समाज को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाए हैं।

उन्होंने स्‍वामित्‍व और पीएम गतिशक्ति जैसी पहलों का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकासात्मक परिणामों में प्रत्यक्ष योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इसी तरह के समन्वय का उपयोग अब जल सुरक्षा और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। 

जल शक्ति मंत्रालय और अंतरिक्ष विभाग/आईएसआरओ के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उपग्रह प्रौद्योगिकी, भू-स्थानिक अनुप्रयोग और वैज्ञानिक डेटा जल संसाधन मानचित्रण, भूजल आकलन, सिंचाई योजना और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पृथ्वी विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों के साथ भविष्य में होने वाले सहयोग से प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों के माध्यम से जल संबंधी चुनौतियों का समाधान करने की भारत की क्षमता और मजबूत होगी। 

कार्यक्रम के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने संयुक्त रूप से एएनआरएफ-जल शक्ति मंत्रालय के महा जल मिशन का शुभारंभ किया, मिशन का विवरण जारी किया और प्रस्ताव के खुले आमं‍त्रण की घोषणा की। उद्घाटन सत्र के दौरान स्टार्टअप उद्यमों और एमएसएमई से उत्पाद और प्रोटोटाइप विकास के लिए खुला आमंत्रण भी जारी किया गया।

इस कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग और अंतरिक्ष विभाग/आईएसआरओ के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, साथ ही जल संचय जन भागीदारी, नागरिक ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग (जेएसजेबी-सीटीआर) पोर्टल और ऐप का भी शुभारंभ किया गया। महा जल मिशन को जल क्षेत्र में नवाचार को गति देने के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो विज्ञान, उद्यमिता, उद्योग, शिक्षा जगत और जमीनी स्तर पर प्रयासों को आपस में जोड़ता है।

एएनआरएफ और जल शक्ति मंत्रालय के संयुक्त योगदान से पांच वर्षों में 200 करोड़ रुपये के अनुमानित परिव्यय के साथ, यह कार्यक्रम विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, अनुसंधान संगठनों, स्टार्टअप उद्यमों, एमएसएमई और उद्योग भागीदारों को शामिल करने वाले बहु-विषयक संघों का समर्थन करेगा। जल क्षेत्र में उच्च-प्रभाव वाले समाधानों के प्रौद्योगिकी विकास, क्षेत्र मूल्यांकन, सत्यापन और कार्यान्वयन के लिए चयनित संघों को 20 करोड़ रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

यह मिशन पांच प्राथमिकता वाले विषयों : जल संसाधन मूल्यांकन और सतत प्रबंधन, पेयजल, जल गुणवत्ता और पारिस्थितिक स्वास्थ्य, जल उपयोग दक्षता और सर्कुलर अर्थव्यवस्था, और जलवायु अनुकूलन पर केंद्रित होगा। इसका उद्देश्य प्रयोगशाला अनुसंधान से लेकर जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन तक नवाचारों को समर्थन देना है, साथ ही भारत की दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक और स्थानीय समाधान तैयार करना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार के व्यापक अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) ढांचे का भी जिक्र करते हुए कहा कि यह महा जल जैसे मिशन कार्यक्रमों से उभरने वाली प्रौद्योगिकियों को व्यावसायीकरण और बड़े पैमाने पर उपयोग की दिशा में आगे बढ़ने का एक अतिरिक्त मार्ग प्रदान करेगा। उन्होंने स्टार्टअप उद्यमों, अनुसंधानकर्ताओं, नवोन्मेषकों और संस्थानों को एएनआरएफ के माध्यम से सृजित अवसरों में सक्रिय रूप से भाग लेने और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि जल सुरक्षा भारत की विकास संबंधी आकांक्षाओं का आधार है और उन्होंने जल प्रबंधन में अनुसंधान, नवाचार और जनभागीदारी के अधिक समन्वय का आह्वान किया। उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय और एएनआरएफ के बीच साझेदारी का स्वागत करते हुए  विश्वास व्यक्त किया कि महा जल मिशन देश के जल क्षेत्र के लिए व्यावहारिक और व्यापक समाधान तैयार करने में सहायक होगा।

श्री पाटिल ने जल संचय जन भागीदारी अभियान की बढ़ती सफलता पर प्रकाश डाला और जल संरक्षण प्रयासों में नागरिक भागीदारी की भूमिका पर बल दिया। राष्ट्रीय कार्यशाला में वरिष्ठ नीति निर्माता, वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता, स्टार्टअप, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), उद्योग प्रतिनिधि और राज्य जल संसाधन विभागों के अधिकारी एक साथ आए।

उपस्थित लोगों में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल; जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी; अंतरिक्ष विभाग के सचिव और इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन; जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग के सचिव श्री वी.एल. कंथा राव; पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मीणा; एएनआरएफ के वरिष्ठ अधिकारी, अनुसंधानकर्ता, नवप्रवर्तक और शिक्षा जगत एवं उद्योग के प्रतिनिधि शामिल थे। 

कार्यशाला में जल संसाधन प्रबंधन, भूजल स्थिरता, जलवायु अनुकूलन संबंधी क्षमता और जल गुणवत्ता के क्षेत्र में पूर्ण हो चुके अनुसंधान एवं विकास अध्ययनों और उभरती प्रौद्योगिकियों पर प्रस्तुतियां भी दी गईं।

 

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