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कोयला मंत्रालय ने नई दिल्ली में सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना पर रोडशो आयोजित किया

Gangapuram Kishan Reddy, G Kishan Reddy, BJP, Bharatiya Janata Party, Satish Chandra Dubey, New Delhi
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नई दिल्ली , 28 May 2026

Last updated on: May 29, 2026, 10:46 IST

कोयला मंत्रालय ने नई दिल्ली में सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना पर एक रोडशो का सफल आयोजन किया, जिसमें नीति निर्माताओं, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के दिग्‍गजों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, निवेशकों, वित्तीय संस्थानों तथा कोयला गैसीकरण क्षेत्र से जुड़े प्रमुख हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई, जबकि कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे सम्मानित अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इसके अलावा, कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त, कोयला मंत्रालय के अपर सचिव श्री सनोज कुमार झा, तथा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

रोडशो में कोयला गैसीकरण की अपार संभावनाओं, नव स्वीकृत योजना के अंतर्गत उपलब्ध नीतिगत समर्थन तथा इस रणनीतिक क्षेत्र में भागीदारी के लिए बड़े पैमाने पर उभरते अवसरों को प्रदर्शित किया गया। यह कार्यक्रम संवाद, सहयोग और हितधारकों की भागीदारी के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में भी उभरा, जिसका उद्देश्य भारत के विशाल घरेलू कोयला संसाधनों के अधिक स्वच्छ एवं दक्ष उपयोग को बढ़ावा देना है।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने अपने प्रमुख भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत भविष्य-उन्मुख, आत्मनिर्भर और सुरक्षित ऊर्जा तंत्र की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है, जिसमें कोयला गैसीकरण देश के औद्योगिक और आर्थिक परिवर्तन के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कोयला गैसीकरण केवल एक ऊर्जा पहल भर नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय मिशन है, जो भारत को आयात पर निर्भरता कम करने, स्वच्छ कोयला उपयोग को बढ़ावा देने तथा उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स, मेथनॉल, हाइड्रोजन और उन्नत विनिर्माण जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों में नए अवसर सृजित करने में सहायता करेगा।

कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए श्री रेड्डी ने कहा कि सरकार पहले ही 8,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना शुरू कर चुकी है तथा हाल ही में देशभर में कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को गति देने के लिए अतिरिक्त 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय सहायता पैकेज को भी मंजूरी दी गई है।

उन्होंने कहा कि इन पहलों से लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश आकर्षित होने, बड़े पैमाने पर रोजगार के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष अवसर उत्पन्न होने तथा उर्वरक, मेथनॉल, हाइड्रोजन और पेट्रोकेमिकल्स जैसे क्षेत्रों में एक मजबूत औद्योगिक मूल्य श्रृंखला विकसित होने की उम्मीद है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक रुझानों, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, पश्चिम एशिया में अस्थिरता तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की बदलती परिस्थितियों के बीच भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि और रणनीतिक औद्योगिक सुरक्षा के लिए लचीली घरेलू औद्योगिक क्षमताओं को सुदृढ़ करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के विशाल कोयला भंडार, बढ़ती औद्योगिक मांग, मजबूत नीतिगत समर्थन तथा विकसित होती तकनीकी क्षमताएँ देश को स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों और सतत औद्योगिक विकास के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने के लिए एक मजबूत आधार उपलब्ध कराती हैं। श्री रेड्डी ने कहा कि कोयला गैसीकरण में देश की आयातित मेथनॉल, अमोनिया, उर्वरकों तथा अन्य महत्वपूर्ण रसायनों पर निर्भरता को उल्लेखनीय रूप से कम करने की क्षमता है, जिससे किसानों, उद्योगों और उपभोक्ताओं को वैश्विक व्यापारिक आघातों तथा मूल्य अस्थिरता से सुरक्षा मिल सकेगी।

श्री रेड्डी ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत के पास कोयला गैसीकरण के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने के लिए आवश्यक इकोसिस्‍टम, संस्थागत क्षमता और तकनीकी दक्षता उपलब्ध है। श्री रेड्डी ने दोहराया कि सरकार पूरी कोयला गैसीकरण मूल्य श्रृंखला में इसे तेज़ी से लागू करने के लिए मंत्रालयों, राज्य सरकारों, उद्योग जगत के दिग्‍गजों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स तथा प्रौद्योगिकी साझेदारों को एक साथ लाकर मज़बूत “समग्र सरकारी दृष्टिकोण” को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री रेड्डी ने विश्वास व्यक्त किया कि समन्वित प्रयासों और उद्योगों की भागीदारी से कोयला गैसीकरण भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक आत्मनिर्भरता तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विजन का एक प्रमुख स्तंभ बनेगा। कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने अपने विचारपूर्ण संबोधन में इस बात को रेखांकित किया कि सरकार द्वारा स्वीकृत 37,500 करोड़ रुपये की योजना कोयला गैसीकरण तथा देश के प्रचुर घरेलू कोयला संसाधनों के स्वच्छ उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि यह पहल एलएनजी, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट तथा कोकिंग कोल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता को उल्लेखनीय रूप से कम करेगी, साथ ही भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को भी सुदृढ़ बनाएगी। श्री दुबे ने जोर देकर कहा कि यह पहल निवेश को गति देगी, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगी तथा विशेष रूप से कोयला उत्पादक और आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगी।

उन्होंने हितधारकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि कोयला गैसीकरण में विकास के नए अवसर खोलने की अपार क्षमता है, साथ ही यह कोयला संसाधनों के अधिक सतत एवं मूल्यवर्धित उपयोग को भी सुनिश्चित करेगा। कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त ने सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने से संबंधित इस रोडशो में अपने आरंभिक संबोधन में कहा कि भारत एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहाँ राष्ट्र औद्योगिक परिवर्तन, रणनीतिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुदृढ़ता के अगले अध्याय को आकार देने के लिए अपने स्वयं के संसाधनों और नवाचार क्षमता का उपयोग कर रहा है।

उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि यह पहल केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि रणनीतिक आयात निर्भरता को कम करने, महत्वपूर्ण औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने, घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करने तथा भारत के प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों से अधिक मूल्य सृजित करने से भी जुड़ी हुई है। उद्योग जगत को इस राष्ट्रीय प्रयास में समान भागीदार बनने के लिए आमंत्रित करते हुए उन्होंने रोडशो में सभी हितधारकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया।

भारत के विशाल कोयला और लिग्नाइट भंडार को राष्ट्रीय संपदा के रूप में रेखांकित करते हुए श्री दत्‍त ने कहा कि देश के सामने प्रश्न यह नहीं है कि कोयले का उपयोग होगा या नहीं, बल्कि यह है कि इसका उपयोग कितनी समझदारी से किया जाएगा। कोयला गैसीकरण को इस प्रश्न का उत्तर बताते हुए उन्होंने कहा कि यह तकनीक कोयले को मूल्यवर्धित उत्पादों जैसे सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, यूरिया, मेथनॉल, अमोनिया, हाइड्रोजन तथा इस्पात उत्पादन के लिए डीआरआई में परिवर्तित करने में सक्षम बनाती है, जिससे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम होती है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 37,500 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ स्वीकृत इस योजना से लगभग 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने की संभावना है तथा कोयला-समृद्ध क्षेत्रों में लगभग 25 नई गैसीकरण परियोजनाओं के माध्यम से करीब 50,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकती है।

इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि योजना का प्रौद्योगिकी-तटस्थ ढाँचा परियोजना विकासकर्ताओं को लचीलापन प्रदान करता है, जबकि उपलब्धि-आधारित कार्यान्वयन और निगरानी तंत्र के माध्यम से जवाबदेही सुनिश्चित करता है। वैश्विक ऊर्जा और वस्तु आपूर्ति श्रृंखलाओं की बदलती भू-राजनीति का उल्लेख करते हुए श्री दत्‍त ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने ऊर्जा, उर्वरक, रसायन और इस्पात जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक आत्मनिर्भरता विकसित करने की तात्कालिक आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।

उन्होंने कहा कि भारत का कोयला केवल एक वस्तु भर नहीं है, बल्कि रणनीतिक परिसंपत्ति है, जो देश की दीर्घकालिक आर्थिक और औद्योगिक लचीलापन क्षमता को मजबूत कर सकती है। समयबद्ध कार्यान्वयन, सुदृढ़ शासन व्यवस्था और उद्योग साझेदारी के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी कंपनियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं तथा वित्तीय संस्थानों को इस परिवर्तनकारी पहल में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने कहा, “यह अवसर अभूतपूर्व है। आवश्यकता अत्यंत जरूरी है। समर्थन व्यापक है। और इसके लिए अभी समय है।” रोडशो में दिलचस्‍प संवाद एवं प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें संभावित निवेशकों और हितधारकों ने परियोजना की व्यवहार्यता, नीतिगत प्रोत्साहन, तकनीकी तत्परता, कार्यान्वयन मॉडल तथा सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के विकास हेतु आवश्यक व्यापक सक्षम ढाँचे से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।

इस संवादात्मक आदान-प्रदान ने उभरते हुए कोयला गैसीकरण क्षेत्र में उद्योग जगत के बढ़ते विश्वास को दर्शाया तथा हितधारकों के साथ उत्तरदायी सहभागिता और उन्हें सुविधा प्रदान करने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को भी प्रतिबिंबित किया। रोडशो ने ज्ञान-साझाकरण, साझेदारी निर्माण और सहयोगात्मक चर्चाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया, जिससे देश में सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के प्रति बढ़ती गति और अधिक सुदृढ़ हुई।

कोयला मंत्रालय ने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन के अनुरूप निरंतर नीतिगत समर्थन, हितधारकों के साथ सहयोग, तकनीकी प्रगति तथा घरेलू कोयला संसाधनों के कुशल उपयोग के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार कोयला गैसीकरण क्षेत्र के विकास को सुगम बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई ।

 

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