लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ फाइन आर्ट्स ने 'कलाकृति 7.0: विज़ुअल डायलॉग्स – नेशनल कंटेम्पररी पेंटिंग कैंप 2026' का आयोजन किया। पाँच दिनों तक चले इस पेंटिंग कैंप में पूरे भारत से 10 जाने-माने कलाकारों ने हिस्सा लिया, जिससे पूरा कैंपस रंगों, रचनात्मकता और कलात्मक चर्चाओं से जीवंत हो उठा। इस कार्यक्रम ने लोगों को एक साथ लाकर विचारों, तकनीकों और दृष्टिकोणों को साझा करने का अवसर दिया, जिससे नवाचार और प्रेरणा के लिए एक विशेष मंच तैयार हुआ।
समकालीन पेंटिंग की प्रैक्टिस पर आधारित इस कैंप में पारंपरिक कलात्मक संवेदनाओं और आधुनिक प्रयोगों का एक आकर्षक मेल देखने को मिला। लाइव पेंटिंग सेशन, इंट्रैक्टिव डायलोग्स और हैंड्स ऑन प्रदर्शनों के माध्यम से, प्रतिभागियों को प्रोफेशनल्स कलाकारों की विकसित होती कार्य-प्रक्रियाओं की गहरी समझ हासिल हुई। निर्माण से लेकर उन्हें मूल रूप देने तक, छात्र हर चरण में सक्रिय रूप से शामिल रहे, जिससे उन्हें अपनी तकनीकी क्षमताओं और रचनात्मक दृष्टिकोणों, दोनों को निखारने का अवसर मिला।
'कलाकृति 7.0' की सबसे खास बात यह थी कि इसने सार्थक कलात्मक संवादों पर विशेष ज़ोर दिया। इस मंच ने ऐसे संवादों को बढ़ावा दिया जो अनुभव और आकांक्षाओं के बीच एक पुल का काम करते थे, जिससे छात्रों को स्थापित कलाकारों के साथ सीधे तौर पर जुड़ने का मौका मिला।
इस आपसी आदान-प्रदान से न केवल समकालीन दृश्य भाषा के प्रति उनकी समझ गहरी हुई, बल्कि उनमें प्रयोग करने और नवाचार लाने का आत्मविश्वास भी जागा। छात्रों ने भी इस कैंप के दौरान बनाई गई अपनी पेंटिंग्स को जाने-माने कलाकारों के साथ प्रदर्शित किया।
उनके इन कार्यों की, वहाँ आए अन्य कलाकारों और स्टाफ सदस्यों द्वारा जमकर सराहना की गई। पुरस्कार विजेताओं में, एमएफए प्रथम वर्ष (पेंटिंग) की छात्रा राकुइयो अरिइचो को 'बेस्ट पेंटिंग' का पुरस्कार मिला; एमएफए प्रथम वर्ष (मूर्तिकला) की छात्रा मेघा चिब को सर्वाधिक 'रेवेन्यू जेनरेशन' के लिए सम्मानित किया गया और बीएफए द्वितीय वर्ष (पेंटिंग) की छात्रा आलिया सेठी को सर्वाधिक 'सोशल मीडिया रीच' हासिल करने के लिए पुरस्कृत किया गया।
इन सभी सम्मानों के साथ ₹11,000 का नकद पुरस्कार भी प्रदान किया गया। एलपीयू की प्रो-चांसलर, कर्नल डॉ.रश्मि मित्तल ने इस कैंप के महत्व की सराहना करते हुए कहा, “आज कला जितनी अभ्यास के बारे में है, उतनी ही दृष्टिकोण के बारे में भी है।
एलपीयू ऐसे स्थान बनाने की कल्पना करता है जहाँ युवा कलाकार इन दोनों से गहराई से जुड़ सकें; न केवल यह सीखें कि रचना कैसे करें, बल्कि यह भी सीखें कि अपने काम के माध्यम से कैसे सोचें, सवाल करें और विकसित हों। ‘कलाकृति’ जैसी पहलें इस संवाद को खोलती हैं, जिससे छात्रों को कला के विविध दृष्टिकोणों के साथ बातचीत करने का अवसर मिलता है, और साथ ही वे अपनी एक ऐसी आवाज़ गढ़ पाते हैं जो अपनी जड़ों से जुड़ी होने के साथ-साथ भविष्योन्मुखी भी हो।”
टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 द्वारा भारत के सभी यूनिवर्सिटी में 5वें स्थान पर रहते हुए एलपीयू, रचनात्मक शिक्षा के एक अग्रणी केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को लगातार मज़बूत कर रहा है। यहाँ विश्व-स्तरीय बुनियादी ढाँचा, उन्नत स्टूडियो, सुसज्जित प्रयोगशालाएँ और कला से जुड़े व्यापक संसाधन उपलब्ध हैं, जो गहन और व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा देते हैं।
एलपीयू के ‘एडु रेवल्यूशन’ के दृष्टिकोण के अनुरूप, इस तरह की पहलें कला, संवाद और अनुभवात्मक ज्ञान को आपस में जोड़कर सीखने की प्रक्रिया को कक्षाओं की सीमाओं से आगे ले जाती हैं। ये पहलें छात्रों को स्वतंत्र रूप से सोचने, सार्थक रचनाएँ करने और व्यापक सांस्कृतिक परिदृश्य में अपना योगदान देने में सक्षम बनाती हैं।