Friday, 24 July 2026

 

 

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सनातनी एकजुट हों तो हिंदू विरोधी षड्यंत्र करने वाले भारत का नुकसान नहीं कर पाएंगे : योगी आदित्यनाथ

Yogi Adityanath, Mathura
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Gurpreet Singh

Gurpreet Singh

5 Dariya News

मथुरा , 07 Apr 2026

Last updated on: Apr 08, 2026, 11:03 IST

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों की उपस्थिति में सनातन समाज से एकजुट होने का आह्वान किया। रामनगरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2017 के पहले अयोध्या में तीन घंटे बिजली मिलती थी। जय श्रीराम बोलने पर लड्डू नहीं, डंडे-लाठियां मिलती थीं। गलियां संकरी थीं और भवन जर्जर। उन्‍होंने कहा कि आवागमन के साधन भी सीमित थे, लेकिन आज अयोध्या त्रेतायुग का स्मरण कराती है।

पूज्य संत एक मंच पर आए, एक स्वर में बोले तो 500 वर्ष का कलंक मिट गया और अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हो गया। जब संतों की एकता में इतनी शक्ति है तो सभी सनातनी एकजुट होकर ताकत का अहसास कराना प्रारंभ कर दें तो कोई भी विधर्मी और विधर्मी की आड़ में उनकी जूठन खाकर हिंदू विरोधी षड्यंत्र करने वाले भारत का नुकसान नहीं कर पाएंगे।

सीएम योगी आदित्यनाथ मंगलवार को संत श्रीमद् जगद्गुरु द्वाराचार्य श्रीमलूकदास जी महाराज की 452वीं जयंती पर आयोजित श्रीसीताराम निकुंज अष्टयाम लीला महोत्सव कार्यक्रम में वृंदावन पहुंचे। श्रीमलूकपीठ आश्रम में मुख्यमंत्री ने दर्शन-पूजन किया, फिर गोपूजन कर गायों को गुड़ खिलाया। सीएम योगी ने कहा कि बिना रुके, थके, डिगे, झुके इस यात्रा को चरैवेति-चरैवेति के संकल्प के साथ निरंतर बढ़ाना होगा।

व्यक्तिगत स्वार्थ भारत राष्ट्र और सनातन धर्म के मार्ग में बाधा नहीं बनना चाहिए। मेरा हित सनातन व देशहित से बड़ा नहीं हो सकता। पूज्य संतों ने जब व्यक्तिगत, आश्रम, संप्रदाय व पंथ हित को एक तरफ रखकर सनातन हित के बारे में सोचना प्रारंभ किया, तब यह व्यापक जागृति, दिव्य तेज, चमत्कार देखने को मिला। कई पीढ़ियां चली गईं, लेकिन राम मंदिर का दर्शन नहीं कर पाईं।

हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है, जो अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन, जन्मभूमि की मुक्ति, श्रीराम मंदिर निर्माण और फिर भव्य प्राण-प्रतिष्ठा की साक्षी बनी। उन्‍होंने कहा कि 1528 में राम मंदिर को बाबर के सिपहसालार मीर बांकी ने तोड़ा था। 500 वर्ष पूरे भी नहीं हुए और हमने भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण कराया। यही भारत का गौरव है और यह तब होता है, जब संतों का आशीर्वाद और सशक्त नेतृत्व होता है।

डबल इंजन की स्पीड होती है तो ताकत भी देखने को मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संभल में 1526 में श्रीहरिहर मंदिर को बाबर की औलादों ने तोड़ा था। वहां 67 तीर्थ, 19 कूप थे, सब कुछ मिट गया था। 1976-78 में दंगे हुए, सैकड़ों हिंदुओं को मार दिया गया। 1995-96 में सपा सरकार में दरिंदों के मुकदमे वापस कर दिए गए।

मुझे उस परिवार का एक सदस्य मिला। उसने बताया कि हमारी प्रॉपर्टी को लूट लिया गया। हम दिल्ली भागकर जान बचा रहे हैं। तब मैंने उनसे कहा कि कागज लेकर आओ, आपकी प्रॉपर्टी पर फिर से कब्जा कराएंगे। उन्‍होंने कहा कि हमारी सरकार ने 84 कोसी परिक्रमा के लिए पैसा दिया। प्रशासन से कहा कि टू-लेन सड़क, सराय, धर्मशाला बनाओ और यात्रा प्रारंभ कराओ।

67 तीर्थों व 19 कूपों से कब्जे हटवाए। सीएम योगी ने संत राजेंद्रदास जी महाराज के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि मलूकदास जी ने चार मुगल बादशाहों (अकबर, जहांगीर, शाहजहां व औरंगजेब) के कालखंड की क्रूरता को देखा। भारत के संतों की दिव्य परंपरा कभी किसी विधर्मी के सामने अपने मूल्यों व आदर्शों से विचलित नहीं होती।

उन्होंने उस समय जिस चेतना को जागरूक किया, आज का आध्यात्मिक व सांस्कृतिक भारत उसी पर आधारित है। सीएम ने संत तुलसीदास की चर्चा की और कहा कि अकबर के नवरत्न उन्हें लालच देकर अकबर व मुगल बादशाहों के पास ले जाना चाहते थे, लेकिन संत तुलसीदास ने कहा कि मैं किसी बादशाह को नहीं जानता-पहचानता।

भारत के राजा एक ही हैं। रामलीला में हम आज भी यही कहते हैं कि राजा रामचंद्र जी की जय। मुगलकालखंड में यह नारा संत तुलसीदास ने दिया था, यानी भारत का राजा कोई विधर्मी नहीं हो सकता। भारत के एक ही सनातन राजा हैं, वह हैं प्रभु श्रीराम, उनके अलावा कोई नहीं। तुलसीदास जी को गरीण ब्राह्मण कहने वालों पर सीएम ने तंज कसा और कहा कि उनसे बड़ा धनी कौन था, जिसने सबसे बड़े बादशाह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

रामलीलाओं के माध्यम से उन्होंने भारत में जिस जनचेतना को जागरूक किया, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणा बनी। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीरामकथा, श्रीमद्भागवत महापुराण, शिव महापुराण की कथा भारत की कथा है। कोई फिल्म बनती है तो दो-चार, 10-15 दिन चलती है, फिर लोग भूल जाते हैं। लेकिन भारत की दिव्य चेतना, आध्यात्मिक-सांस्कृतिक प्रभाव है कि संतों की कथा में लाखों श्रद्धालु उपस्थित होते हैं।

हर सनातन धर्मावलंबी जानता है कि अगला प्रसंग कौन सा आने वाला है, फिर भी कथा व्यास इन प्रसंगों के साथ समसामयिकता को जोड़कर मजबूती के साथ प्रस्तुत करते हैं तो लाखों श्रद्धालु घंटों बैठकर उसे श्रवण-अंगीकार करते हैं और उससे जीवन पथ को आलोकित करते हुए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। सीएम ने कहा कि अक्टूबर से दिसंबर तक उत्तर भारत के हर गांव में देर रात तक रामलीला होती है।

इसमें सरकार सहयोग नहीं करती। गांव के लोग ही चंदा एकत्र करते हैं। रामलीला के पात्र भी गांव के लोग बनते हैं। पूरा गांव एकजुट होकर रामलीला का मंचन करता है और इसके संवाद के माध्यम से श्रीराम के साथ अपना तारतम्य स्थापित करता है। उसमें जाति, मत, संप्रदाय का भी भेद नहीं होता है। एक जगह पर पुरुष, महिला, बुजुर्गों समेत पूरा गांव एकजुट होता है।

मध्यकाल में इसकी शुरुआत संत तुलसीदास ने की थी। उन्‍होंने कहा कि संत रामानंदाचार्य ने अलग-अलग जाति के महापुरुषों को शिष्य बनाया। संत रैदास, कबीर उन्हीं के शिष्य हैं। इसी परंपरा की 22वीं पीढ़ी में जगद्गुरु मलूकदास जी महाराज का अविर्भाव होता है। इस परंपरा ने पंथ, संप्रदाय के बारे में नहीं, बल्कि भारत और सनातन धर्म के बारे में सोचा, तब भारत झंझावतों से मुक्त हो पाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जगद्गुरु मलूकदास जी ने मानवता के आंसू पोंछने, गोरक्षा, भूखे को अन्न देने को जीवन का मिशन बनाया था। उन्होंने उपदेश दिया कि दूसरे के दुख को अपना समझने वाला व्यक्ति ही सच्चा है। जीव के प्रति करुणा का भाव ही संतों की परंपरा है। 451 वर्ष पहले जो दिव्य ज्योति प्रयागराज की धरती पर प्रकट हुई, उसने संपूर्ण भारत को आलोकित किया।

ब्रजभूमि आकर उन्होंने वैष्णव परंपरा की अलख जगाने का दायित्व अपने हाथों में लिया। आज मलूकदास जी महाराज की दिव्य समाधि के दर्शन के समय भी उनके दिव्य तेज का अहसास हुआ। उनके प्रकटीकरण व दिव्य समाधि लेने की तिथि (वैशाख कृष्ण पंचमी) एक ही है।

 

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