गांव सोहाना स्थित गुरुद्वारा गुरशब्द प्रकाश अकाल आश्रम साहिब में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक गुरमत समागम आध्यात्मिक माहौल में सम्पन्न हो गया। समागम के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं ने दरबार साहिब में हाजिरी भरी और गुरबाणी कीर्तन का आनंद प्राप्त किया।
यह समागम पंथ रत्न भाई साहिब भाई जसबीर सिंह जी खालसा (खन्ने वाले) की स्मृति में तथा संत बाबा अतर सिंह जी मस्तुआना साहिब वालों की कृपा से आयोजित किया गया। समागम की अगुवाई भाई साहिब भाई दविंदर सिंह जी खालसा ने की।
अंतिम दिन के दीवान सुबह से ही आरंभ हुए, जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश, नितनेम पाठ तथा कीर्तन के माध्यम से संगत को नाम सिमरन से जोड़ा गया। दिनभर चले विशेष कीर्तन दरबार में कई प्रसिद्ध रागी जत्थों ने हाजिरी भरी, जिनमें बीबी मंदीप कौर खालसा, भाई इंदरजीत सिंह जी, एजुकेट पंजाब प्रोजेक्ट का जत्था, सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज (जत्थेदार अकाल तख्त साहिब), प्रिंसिपल सुखवंत सिंह जी, भाई रणधीर सिंह जी (हजूरी रागी, श्री दरबार साहिब), भाई कुलदीप सिंह जी, भाई हरजोत सिंह जख्मी जी, भाई बहुलिवलीन सिंह जी, भाई जगतार सिंह खालसा, भाई गुरशरण सिंह जी (लुधियाना वाले), भाई रविंदर सिंह जी (दिल्ली वाले), बहन दविंदर कौर जी एवं जत्था, सिंह साहिब ज्ञानी परविंदरपाल सिंह जी, भाई साहिब भाई दविंदर सिंह जी खालसा तथा उस्ताद बलजीत सिंह जी नामधारी शामिल थे।
इन रागी जत्थों के भावपूर्ण कीर्तन ने संगत को आध्यात्मिक आनंद में लीन कर दिया। कथावाचकों ने भी गुरबाणी की व्याख्या करते हुए संगत को गुरु के दिखाए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। समागम के दौरान सिमरन साधना, रहिरास साहिब पाठ और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को गुरमत रंग में रंगे रखा।
अंतिम दिन अमृत संचार का विशेष आयोजन भी किया गया, जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने अमृत की प्राप्ति की। गुरुद्वारा साहिब के प्रधान गुरमीत सिंह ने संगत का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसे समागम सिखी के प्रचार और सामाजिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने सभी सेवादारों और दानदाताओं का भी विशेष आभार व्यक्त किया। प्रबंधक कमेटी द्वारा लंगर की विशाल व्यवस्था की गई, जहां संगत ने बढ़-चढ़कर सेवा निभाई।