Thursday, 04 June 2026

 

 

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जगत प्रकाश नड्डा ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व तपेदिक दिवस 2026 के राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता की

जगत प्रकाश नड्डा ने वैश्विक लक्ष्यों से पहले क्षय रोग को समाप्त करने हेतु भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया

Jagat Prakash Nadda, Greater Noida
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ग्रेटर नोएडा , 24 Mar 2026

Last updated on: Mar 25, 2026, 13:11 IST

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने विश्व तपेदिक दिवस 2026 के अवसर पर ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक राष्ट्रीय-स्तर के कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने निर्धारित वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों की समय-सीमा से पहले ही भारत को तपेदिक (टीबी) मुक्त बनाने की देश की दृढ़ और अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।

इस कार्यक्रम में भारत के निरंतर एवं बहुआयामी प्रयासों को प्रमुखता से रखा किया गया, जिनके तहत सशक्त सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, बढ़ती सामुदायिक भागीदारी तथा नवाचार और प्रौद्योगिकी-आधारित उपायों के माध्यम से टीबी के खिलाफ व्यापक लड़ाई लड़ी जा रही है। हर वर्ष 24 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व टीबी दिवस दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक तपेदिक (टीबी) के उन्मूलन के प्रयासों को तेज़ करने के लिए एक वैश्विक आह्वान है। 

इस वर्ष की विषयवस्तु “हां! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं!” नए उत्साह, सामूहिक संकल्प और सभी स्तरों पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करती है। यह विषयवस्तु न केवल टीबी-मुक्त दुनिया के लक्ष्य के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि टीबी उन्मूलन के लिए मिशन-मोड में चल रहे प्रयासों में भारत की अग्रणी भूमिका को भी और सुदृढ़ करती है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मुख्य भाषण देते हुए विश्व टीबी दिवस 2026 को ‘टीबी-मुक्त भारत’ की दिशा में देश की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया—जो आत्ममंथन का अवसर होने के साथ-साथ नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का आह्वान भी है। उन्होंने कहाकि पिछले एक दशक में भारत की टीबी-रोधी रणनीति एक परिवर्तनकारी और जन-केंद्रित आंदोलन के रूप में विकसित हुई है, जो नवाचार, समानता व दृढ़ राजनीतिक प्रतिबद्धता पर आधारित है।

श्री जगत प्रकाश नड्डा ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को स्मरण करते हुए जन भागीदारी की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन अब केवल “संपूर्ण-सरकार” दृष्टिकोण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह “समग्र-समाज” के जनांदोलन में परिवर्तित हो चुका है, जिसमें समुदाय सक्रिय भागीदार के रूप में शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इस बदलाव ने प्रगति की गति को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है और सभी स्तरों पर स्वामित्व एवं जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मुख्य उपलब्धियों के बारे में बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने टीबी के मामलों में 21% की कमी और इस बीमारी से होने वाली मौतों में 25% की गिरावट हासिल की है ये दोनों ही आंकड़े वैश्विक औसत से बेहतर हैं।

इलाज की कवरेज 92% तक पहुंच गई है, जबकि ऐसे मामले जिनका पता नहीं चल पाया था, उनकी संख्या सालाना 10 लाख से घटकर 1 लाख से भी कम रह गई है; यह इस बात का संकेत है कि मामलों का पता लगाने के प्रयासों को तेज किया गया है। श्री जगत प्रकाश नड्डा ने साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर जोर देते हुए ने बताया कि लगभग 50 प्रतिशत टीबी रोगियों में सामान्य लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसके चलते स्क्रीनिंग की रणनीति को लक्षण-आधारित दृष्टिकोण से हटाकर ‘लक्षण-निरपेक्ष’ बनाया गया है।

उन्होंने बताया कि सघन टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत, जिसे प्रारंभ में 347 जिलों में लागू किया गया और बाद में पूरे देश में विस्तार दिया गया, पोर्टेबल एक्स-रे, एआई-सक्षम डायग्नोस्टिक्स तथा आणविक परीक्षण जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री यह भी जानकारी दी कि दिसंबर 2024 में अभियान की शुरुआत के बाद से अब तक 20 करोड़ से अधिक संवेदनशील व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप देशभर में 32.65 लाख टीबी मरीजों की पहचान की गई है।

श्री जगत प्रकाश नड्डा एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को रेखांकित करते हुए बताया कि पहचाने गए मामलों में लगभग 10.9 लाख ऐसे रोगी शामिल हैं, जिनमें जांच के समय टीबी के कोई पारंपरिक लक्षण मौजूद नहीं थे। उन्होंने इसे भारत की टीबी उन्मूलन रणनीति की सबसे प्रभावशाली प्रगति में से एक बताया, क्योंकि यह कार्यक्रम की उस क्षमता को दर्शाता है, जिसके माध्यम से संक्रमण के “अदृश्य” भंडार की पहचान की जा रही है ऐसे मामले जो अन्यथा बिना पता चले रह जाते और समुदाय में संक्रमण के प्रसार को बढ़ाते रहते।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अगले चरण की घोषणा करते हुए एक केंद्रित और सघन 'टीबी मुक्त भारत' अभियान शुरू किया। यह अभियान टीबी उन्मूलन की दिशा में प्रगति को तेज करने के लिए एक निर्णायक और मिशन-मोड वाला प्रयास है। इस अभियान के तहत 1.58 लाख गांवों और शहरी वार्डों को शामिल किया जाएगा। इनमें से हर जगह के लिए स्थानीय जरूरतों के हिसाब से बारीक तथा विशिष्ट माइक्रो-प्लान बनाए जाएंगे, ताकि अभियान का क्रियान्वयन पूरी सटीकता से हो सके और इसके परिणाम भी स्पष्ट रूप से मापे जा सकें।

शहरी गरीबों, आदिवासी समुदायों और प्रवासी समूहों जैसी संवेदनशील आबादी पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए, इस पहल का उद्देश्य अंतिम छोर तक पहुंचने में आने वाली बाधाओं को दूर करना, टीबी का जल्द पता लगाना और टीबी से जुड़ी सेवाओं तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करना है। इससे जमीनी स्तर पर टीबी के खिलाफ भारत की लड़ाई को काफ़ी मजबूती मिलेगी।

श्री नड्डा ने इलाज में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दवा-प्रतिरोधी टीबी के लिए बीपीएएलएम उपचार पद्धति ने इलाज की अवधि को 20 महीने से घटाकर 6 महीने कर दिया है, जिससे इलाज के पालन और परिणामों में काफी सुधार हुआ है। डिजिटल क्षेत्र में, केंद्रीय मंत्री ने 'टीबी मुक्त भारत' ऐप लॉन्च किया, जिसमें "खुशी" नाम का एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-सक्षम, बहुभाषी चैटबॉट शामिल है।

इसे ऐसे तैयार किया गया है कि यह एंट्री-लेवल स्मार्टफ़ोन पर भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सके। यह प्लेटफ़ॉर्म लक्षणों, मिलने वाली सुविधाओं और नजदीकी जांच केंद्रों के बारे में रियल-टाइम जानकारी देता है, जिससे लक्षणों के दिखने और समय पर इलाज शुरू होने के बीच की अहम दूरी को पाटने में मदद मिलती है। श्री नड्डा ने बढ़े हुए निवेश पर बल देते हुए कहा कि टीबी को खत्म करने के लिए सरकारी सहायता राशि 2015-16 के 640 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 6,356 करोड़ रुपये हो गई है, जिससे जांच, इलाज, रिसर्च और सामाजिक सहायता के क्षेत्रों में प्रगति हुई है।

उन्होंने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के नेतृत्व की भी सराहना की, जो टीबी अनुसंधान में एक वैश्विक लीडर के तौर पर उभरा है; एचडब्ल्यूओ द्वारा मान्यता प्राप्त ट्रूनेट मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म जैसे नवाचारों ने भारत और दुनिया भर में टीबी की पहचान के तरीके को बदल दिया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने तालमेल के महत्व पर बल देते हुए यह भी कहा कि एक सरकारी कार्यक्रम से एक राष्ट्रीय आंदोलन की ओर हुए इस बदलाव ने भारत की टीबी के खिलाफ लड़ाई की दिशा ही बदल दी है; जिसमें 24 से अधिक मंत्रालयों, 30,000 से ज्यादा चुने हुए प्रतिनिधियों एवं जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से आए 7.16 लाख से ज़्यादा 'निक्षय मित्रों' ने टीबी का उन्मूलन करने के प्रयासों में अपना सहयोग दिया है।

श्री नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि टीबी उन्मूलन के लिए चिकित्सा और सामाजिक दोनों प्रकार की कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात को दोहराया कि टीबी रोकथाम व इलाज योग्य है और प्रारंभिक उपचार से संचरण कम होता है जबकि सामुदायिक समर्थन महत्वपूर्ण बना रहता है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस अवसर पर 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला और टीबी उन्मूलन के लिए जन-केंद्रित तथा डेटा-आधारित दृष्टिकोण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने बताया कि दिसंबर 2024 से अब तक 20 करोड़ से ज़्यादा कमज़ोर लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, जिससे 32.65 लाख टीबी मरीजों का पता चला है जिनमें लगभग 10.9 लाख ऐसे मामले भी शामिल हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं थे। यह सक्रिय और लक्षणों पर आधारित न रहने वाली स्क्रीनिंग रणनीतियों की प्रभावशीलता को दिखाता है।

श्रीमती पटेल ने राष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने टीबी के मामलों में 21% की कमी और टीबी से होने वाली मृत्यु दर में 25% की गिरावट हासिल की है; साथ ही, उपचार कवरेज 92% तक पहुंच गया है और ऐसे मामलों की संख्या में भी भारी कमी आई है जिनका पता नहीं चल पाता था।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ये उपलब्धियां पूरे देश में मामलों का पता लगाने की बेहतर प्रक्रिया, उत्कृष्ट जांच सुविधाओं और उन्नत उपचार प्रणालियों को दर्शाती हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने पर जोर देते हुए 3,000 से अधिक हैंडहेल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-युक्त एक्स-रे यूनिट्स की तैनाती पर प्रकाश डाला, ताकि जाँच की सुविधा सीधे समुदायों तक पहुंचाई जा सके।

इसके साथ ही, 9,800 से अधिक एनएएटी लैब्स का विस्तार किया गया है और 1.8 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में टीबी सेवाओं को एकीकृत किया गया है, जिससे पूरी तरह से विकेंद्रीकृत और रोगी-केंद्रित जांच व्यवस्था संभव हो पाई है। श्रीमती पटेल ने उपचार प्रणालियों की सुदृढ़ता पर विशेष जोर देते हुए बताया कि गुणवत्ता-सुनिश्चित टीबी-रोधी दवाओं और उन्नत जांच सुविधाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

साथ ही, संक्रमण की श्रृंखला को प्रभावी ढंग से तोड़ने के लिए घरेलू संपर्कों और उच्च-जोखिम वाले समूहों के बीच टीबी निवारक उपचार के विस्तार को भी प्रमुखता से रेखांकित किया। सामाजिक सहयोग के संबंध में, श्रीमती पटेल ने बताया कि 'निक्षय पोषण योजना' के तहत 2018 से अब तक 1.39 करोड़ टीबी मरीजों को 4,590 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है।

उन्होंने 'निक्षय मित्र' पहल पर भी प्रकाश डाला, जिसमें 7.16 लाख से ज़्यादा नागरिकों ने हिस्सा लिया है; इस पहल को 'माय भारत' के स्वयंसेवकों के जुड़ने से और भी मज़बूती मिली है, जो रोगियों को मनो-सामाजिक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री ने सामुदायिक स्वामित्व के महत्व पर बल देते हुए टीबी उन्मूलन को एक जन-आंदोलन में बदलने में 'जन भागीदारी' की भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने 67,933 टीबी-मुक्त ग्राम पंचायतों की उपलब्धि का भी उल्लेख किया, जो विकेंद्रीकृत शासन की प्रभावशीलता को दर्शाता है। इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए, 'टीबी-मुक्त शहरी वार्ड पहल' का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में भी इसी मॉडल को दोहराना है, ताकि इसकी पहुंच व प्रभाव को और अधिक व्यापक एवं स्थायी बनाया जा सके।

श्री ब्रजेश पाठक ने अपने संबोधन में, जमीनी स्तर पर टीबी उन्मूलन की रणनीतियों को लागू करने में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश ने सक्रिय रूप से मामलों की पहचान करने, निदान संबंधी बुनियादी ढांचे में सुधार करने व सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाने के माध्यम से अपने प्रयासों को तेज किया है और टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। 

इस अवसर पर, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने 'नि-क्षय वाहन' को भी हरी झंडी दिखाई। इसका उद्देश्य अंतिम छोर तक पहुंच को बेहतर करना और विशेष रूप से उन क्षेत्रों में टीबी की जांच व उपचार सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना है, जहां पर इन सेवाओं की कमी है। 

इसके अलावा, उन्होंने 'नि-क्षय मित्र' को क्षय रोगियों को पोषण, सामाजिक एवं भावनात्मक सहयोग प्रदान करने में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए सम्मानित किया, जिससे 'टीबी मुक्त भारत अभियान' में सामुदायिक भागीदारी की भावना और सशक्त हुई। इस कार्यक्रम के दौरान 'निक्षय शपथ' भी दिलाई गई, जिसके माध्यम से तपेदिक (टीबी) को समाप्त करने और टीबी-मुक्त भारत के लिए राष्ट्रव्यापी 'जन भागीदारी' आंदोलन को सुदृढ़ बनाने के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया गया।

इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव सहित केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, विकास भागीदारों, नागरिक समाज संगठनों व सामुदायिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, विभिन्न राज्यों के राज्यपालों, राज्य स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधियों और देशभर से चयनित प्रतिभागियों ने भी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता की।

 

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