Friday, 05 June 2026

 

 

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भारत स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसरणकर्ता से सटीक चिकित्सा और जैव-विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्‍तर पर अग्रणी बनने की राह पर अग्रसर है : डॉ. जितेंद्र सिंह

11,000 से अधिक बायोटेक स्टार्टअप और बायो-ई3 नीति भारत के बायोइकोनॉमी के विस्तार को मजबूती दे रही है : डॉ. जितेंद्र सिंह

Dr Jitendra Singh
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नई दिल्ली , 13 Mar 2026

Last updated on: Mar 14, 2026, 11:04 IST

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्‍य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत एक परिवर्तनकारी चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां अत्याधुनिक जैव प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स और मल्टी-ओमिक्स अनुसंधान भारत को सटीक चिकित्सा, जैव-विनिर्माण और चिकित्सा नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करते हुए स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को नया आकार दे रहे हैं।

प्रोटियोमिक्स सोसाइटी, इंडिया (पीएसआई) द्वारा आईएचडब्ल्यू काउंसिल की सहयोगपूर्ण साझेदारी में आयोजित मल्टी-ओमिक्स समिट 2026 में उद्घाटन भाषण देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अत्याधुनिक उपचार के लिए विदेश यात्रा की आवश्‍यकता वाले दौर से आगे बढ़कर ऐसी अवस्‍था में पहुँच चुका है, जहाँ देश गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से चिकित्सा पर्यटन को आकर्षित करते हुए वैश्विक स्वास्थ्य सेवा गंतव्‍य के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली आज आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स और एआई-संचालित अनुसंधान को आयुर्वेद जैसी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के साथ एकीकृत करती है, जिससे एक अनूठा समेकित चिकित्सा मॉडल तैयार हो रहा है। आयुष मंत्रालय के गठन और जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान प्लेटफ़ॉर्म के विस्तार ने भारत को परंपरा और उन्नत विज्ञान को संयोजित करते हुए नवाचारपूर्ण स्वास्थ्य समाधान विकसित करने में सक्षम बनाया है।

राष्ट्रीय विकास में जैव-प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत उन पहले देशों में शुमार है, जिन्‍होंने समग्र बायो-ई3 नीति अर्थव्‍यवस्‍था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी लॉन्च की। यह नीति नवाचार को तेज़ करने, जैव-विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने और जैव अर्थव्यवस्था क्षेत्र में नए अवसर सृजित करने के लिए तैयार की गई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले दशक में भारत के जैव-प्रौद्योगिकी इकोसिस्‍टम में जबरदस्त विस्तार हुआ है, जहाँ आज 11,000 से अधिक बायोटेक स्टार्टअप्स हैं, जबकि पहले केवल कुछ दर्जन ही हुआ करते थे। सरकारी पहलें समर्पित वित्त पोषण के माध्यम से जैव-विनिर्माण को मजबूत कर रही हैं, जिसमें 10,000 करोड़ रुपये के आवंटन वाली बायोफार्मा शक्ति योजना शामिल है।

यह योजना जैव-विनिर्माण केंद्र , जैव-फाउंड्री और उन्नत अनुसंधान अवसंरचना को समर्थन देगी। भारत की बड़ी और आनुवंशिक रूप से वैविध्‍यपूर्ण जनसंख्या का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जीनोमिक अनुसंधान में देश को अनूठा लाभ प्राप्त है। जीनोम इंडिया प्रोजेक्‍ट जैसी प्रमुख पहलों और आगामी फेनोम इंडिया पहल के माध्यम से भारत ने अब तक लगभग 10,000 जीनोम की सीक्‍वेंसिंग या अनुक्रमण पूरा कर लिया है और इस प्रयास को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

इस तरह के वृहद पैमाने के जीनोमिक डेटा से शोधकर्ताओं को बीमारियों के पैटर्न पहचानने, लक्षित उपचार विकसित करने और नैदानिक लक्षण दिखाई देने से पहले प्रारंभिक हस्तक्षेप डिजाइन करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जीनोमिक्स, ट्रांसक्रिप्टोमिक्स और प्रोटियोमिक्स को मल्टी-ओमिक्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से एकीकृत करना, जिसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग द्वारा समर्थित किया गया है, वैज्ञानिकों को जटिल रोग तंत्रों को समझने और वैविध्‍यपूर्ण जनसंख्या के लिए अनुकूलित व्यक्तिगत उपचार विकसित करने में सक्षम बनाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैवचिकित्सा अनुसंधान में कई उभरती उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें जीन-आधारित उपचार और न्यूक्लियर मेडिसिन में हुई प्रगति शामिल है। उन्होंने सिकल सेल विकार और हेमोफीलिया जैसी बीमारियों के उपचार में हालिया प्रगति का उदाहरण दिया, साथ ही टाटा मेमोरियल सेंटर में बच्चों में एक्‍यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया के लिए न्यूक्लियर मेडिसिन में नए चिकित्सीय विकास को भी उजागर किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत उत्‍तरोत्‍तर रूप से विशेष रूप से मल्टी-ओमिक्स जैसे क्षेत्रों में वैश्विक सहयोगपूर्ण अनुसंधान का केंद्र बनता जा रहा है, जहाँ संस्थानों, सेक्टरों और देशों के बीच अंतरविषयक साझेदारी आवश्यक है। सरकार इस तरह के सहयोग को नीतिगत सुधारों और शिक्षा, उद्योग तथा स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी के माध्यम से प्रोत्साहित कर रही है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में किए गए सुधारों ने परमाणु क्षेत्र को निजी सहभागिता के लिए खोला है, जिससे न्यूक्लियर मेडिसिन अनुसंधान में अधिक नवाचार संभव हो गया है। जब इसे जीनोमिक्स और सटीक चिकित्सा के साथ एकीकृत किया जाएगा, तो यह भविष्य की स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने दुनिया का पहला डीएनए-आधारित टीका विकसित करके रोग निवारक स्वास्थ्य देखभाल में वैश्विक स्‍तर पर नेतृत्‍वकारी भूमिका को प्रदर्शित किया है, जो देश की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमताओं और किफायती स्वास्थ्य देखभाल समाधान प्रदान करने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

वर्तमान दौर को आधुनिक चिकित्सा के विकास का सबसे रोमांचक चरण करार देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव-प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जीनोमिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का संयोजन स्वास्थ्य सेवा नवाचार के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा, अनुसंधान इकोसिस्‍टम और दूरदर्शी नीतियां देश को न केवल वैश्विक सहयोग में सक्षम बनाएंगी, बल्कि भविष्य में जैव-प्रौद्योगिकी और सटीक चिकित्सा में अग्रणी भूमिका निभाने में भी सक्षम बनायेंगी।

यह समिट प्रमुख वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, जैव-प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तकों और उद्योग विशेषज्ञों को मल्टी-ओमिक्स अनुसंधान में नवीनतम प्रगति और स्वास्थ्य सेवा, निदान और दवा खोज को परिवर्तित करने की इसकी संभावनाओं पर चर्चा करने के लिए एक साथ लाया।

 

Tags: Dr Jitendra Singh , Bharatiya Janata Party , BJP , Union Minister of Earth Sciences , Multi Omics Summit 2026

 

 

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