Thursday, 04 June 2026

 

 

खास खबरें सीएम भूपेंद्र पटेल की कैबिनेट बैठक में योगेश भाई के निधन पर जताया गया शोक, दो मिनट का मौन धारण फ्रेंच ओपन : डायना श्नाइडर ने अर्यना सबालेंका को चौंकाया, पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचीं चारधाम यात्रा की व्यवस्थाएं सुचारू, श्रद्धालुओं को नहीं होगी कोई परेशानी : पुष्कर सिंह धामी नरेंद्र मोदी से मिले केशव प्रसाद मौर्य अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच की तैयारी में जुटी भारतीय टीम एथेनॉल संचालित वाहनों की तरफ एक प्रतिशत बदलाव से भारत करीब 195 करोड़ रुपए की कर सकता है बचत : हरदीप सिंह पुरी द्रौपदी मुर्मु से मिले हिमंता बिस्वा सरमा नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में हीरो मोटोकॉर्प की पहली फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों के लॉन्च कार्यक्रम को संबोधित किया डॉ. नोमालुंगेलो जीना ने डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ द्विपक्षीय बैठक की जयंत चौधरी ने जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों और उद्यमियों के लिए एक राष्ट्रीय पहल 'नवाचार मंत्र' का शुभारंभ किया नई दिल्ली में राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 समारोह में ग्रामीण परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए 42 पंचायतों को सम्मानित किया गया पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन ने वीरेश शांडिल्य को “युगपुरुष चौ. भजनलाल गौरव अवॉर्ड” से किया सम्मानित दो दिवसीय “एडवांस्ड टेक्नोलॉजिकल इंटरवेंशन इन स्मार्ट फार्मिंग” कार्यशाला का आयोजन सीपी राधाकृष्णन ने पूर्व सीएजी श्री विनोद राय द्वारा संपादित पुस्तक 'व्हेन ऑडिट मैटर्स' का विमोचन किया राजनीतिक पार्टियों को एस.आई.आर. के संशोधित शेड्यूल के बारे में करवाया गया अवगत थोंगसावन फोमविहाने ने द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की ट्रैफिक नियमों की उल्लंघना करने वालों के खिलाफ विशेष चेकिंग मुहिम चलाई जाए : अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर एशियन रिले एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2027 की तैयारियों एवं आधारभूत संरचना उन्नयन योजनाओं की गुलाब चंद कटारिया ने की समीक्षा एच. राजेश प्रसाद ने शैक्षणिक सत्र 2026–27 हेतु जीजीडीएसडी कॉलेज का प्रॉस्पेक्टस लॉन्च किया मोरनी में नायब सिंह सैनी की जनसुनवाई : जनहित कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं हिसार के 10 गांवों के किसान प्रतिनिधिमंडल ने श्रुति चौधरी से की भेंट

 

पीयूष गोयल ने विकसित भारत 2047 के लिए भारतीय उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण का आह्वान किया

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक मानकों के लिए मार्ग प्रशस्त करती है

Piyush Goyal, Commerce and Industry Minister, BJP, Bharatiya Janata Party, Indian Institute of Foreign Trade, IIFT, Vice Chancellors Conclave
Listen to this article

Web Admin

Web Admin

5 Dariya News

नई दिल्ली , 06 Mar 2026

Last updated on: Mar 06, 2026, 18:07 IST

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि शिक्षा को सेवा के रूप में प्रदान करने से भारत की निर्यात आय में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ उच्च गुणवत्तापूर्ण भारतीय शिक्षा को विश्व के बाकी हिस्सों तक पहुंचाने की काफी क्षमता है। नई दिल्ली में आज "विकसित भारत 2047 के लिए उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण की पुनर्कल्पना" विषय पर आयोजित कुलपति सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि वे कुलपतियों से बातचीत करना चाहते हैं और भारत में उच्च शिक्षा के भविष्य को लेकर उनके विचार और दृष्टिकोण सुनना चाहते हैं।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि वाणिज्य मंत्रालय और उसके अधीन भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) शिक्षा को एक सेवा के रूप में प्रस्तुत करने की संभावनाओं का पता लगाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इसका उद्देश्‍य भारत की निर्यात आय में वृद्धि और साथ ही भारतीय शिक्षा की वैश्विक पहुंच का विस्तार करना है।

इस सम्मेलन में उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण के प्रमुख पहलुओं, जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी, छात्र गतिशीलता, नियामक ढांचे और दोहरी डिग्री कार्यक्रमों पर विषयगत चर्चा और विशेषज्ञ संवाद के लिए एक मंच साझा किया गया। प्रतिभागियों ने भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया।

इसके साथ-साथ शिक्षा गतिशीलता में उभरते वैश्विक रुझानों का विश्लेषण किया और भारत के लिए बढ़ते वैश्विक शिक्षा सेवा बाजार में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के अवसरों की खोज की। उन्होंने कहा कि विश्व के भावी विकास के वाहक संभवतः भारत जैसे कम विकसित या विकासशील देश होंगे। इसलिए, भारत के साथ जुड़ना विकसित देशों के छात्रों को उनके भावी करियर में मदद करेगा।

श्री गोयल ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में सेवाओं से सम्‍बंधित अध्यायों पर बातचीत करते समय उन्हें इस प्रवृत्ति की बढ़ती पहचान दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा अंतिम रूप दिए गए नौ एफटीए सभी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ हुए हैं। उनके अनुसार, भारत द्वारा अधिक विकसित और प्रगतिशील अर्थव्यवस्थाओं के साथ सम्‍बंध स्थापित करने के कारण अब वैश्विक व्यापार का लगभग दो-तिहाई हिस्सा भारत के एफटीए के अंतर्गत आता है।

उन्होंने कहा कि यह वैश्विक स्तर पर भारत के दृष्टिकोण में आए बदलाव को दर्शाता है, और यह भी स्पष्ट किया कि देश अब कमजोर स्थिति या औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर आ चुका है। भारत अब आत्मविश्वास और मजबूत स्थिति के साथ विश्व के साथ जुड़ता है। केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि यदि भारत वर्तमान में वैश्विक विकास में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान दे रहा है और विकास के वाहक के रूप में उभरा है, तो भविष्य में दुनिया भर की युवा पीढ़ियों को भारत जैसे देशों के साथ काम करने की अधिकाधिक आवश्यकता होगी।

केन्‍द्रीय मंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मसौदा तैयार करते समय देश भर के शिक्षाविदों से व्यापक परामर्श के माध्यम से भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक व्यापक प्रयास किया गया। उन्होंने बताया कि यह नीति देश और विदेश के हितधारकों से व्यापक परामर्श और सुझावों के बाद तैयार की गई है।

लगभग तीन लाख सुझाव और प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। इनमें से प्रत्येक को उचित महत्व दिया गया और नीति को अंतिम रूप देने से पहले उन पर सावधानीपूर्वक विचार किया गया। श्री गोयल ने कहा कि यह नीति वर्षों के विचार-विमर्श के बाद सामने आई है और प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की कार्यशैली को दर्शाती है। उन्‍होंने कहा कि इस नीति ने भारत की सोच को व्यापक बनाया है।

इससे भारत शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय मानकों को प्राप्त करने, बढ़ती आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार करने और विश्व भर से छात्रों को आकर्षित करने की दिशा में प्रयासरत हुआ है। केन्‍द्रीय मंत्री जी ने कहा कि इस नीति ने अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों को भारत में आकर संस्थान खोलने की अनुमति दी है और विश्वविद्यालयों को भारतीय संस्थानों के साथ मिलकर दोहरी डिग्री प्रदान करने में सक्षम बनाया है।

इस नीति ने सीमा पार छात्र आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित किया है। इसका उद्देश्‍य भारतीय छात्रों को विकसित और अन्य देशों की शिक्षा प्रणालियों से परिचित कराना और अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भी भारत की शिक्षा प्रणाली प्रदान करना है। श्री गोयल ने कहा कि अब विकसित देशों के छात्रों को भारत में आकर अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने तीन वर्षीय कार्यक्रम जैसे मॉडल सुझाए। इसमें छात्र एक वर्ष भारत में और दो वर्ष अपने मूल संस्थान में बिता सकते हैं, या दोनों संस्थानों में समान रूप से समय बांट सकते हैं। उनके अनुसार, ऐसे दोहरी डिग्री कार्यक्रम विकसित देशों के छात्रों को यह समझने में मदद करेंगे कि विकासशील देश कैसे सोचते हैं, काम करते हैं और संस्कृति एवं समाज से जुड़ते हैं।

सम्मेलन में उपस्थित कुलपतियों को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने उन्हें भारत के भविष्य का निर्माता बताया और कहा कि वे युवा भारतीयों के मन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कुलपति पर एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है क्योंकि वे छात्रों को कल की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं और एक आधुनिक विकसित राष्ट्र की नींव रखते हैं।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को बदलते समय के साथ विकसित होना चाहिए और छात्रों को पढ़ाते समय आधुनिक पाठ्यक्रम और भविष्योन्मुखी ज्ञान से अवगत रहने के लिए शिक्षकों को पुनर्प्रशिक्षण और पुनर्शिक्षा से गुजरना चाहिए। केन्‍द्रीय मंत्री जी ने इस बात पर बल दिया कि पुराने पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्रों को भविष्य के लिए तैयार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि संस्थानों और शिक्षकों को लचीला बने रहना चाहिए और भविष्य में आने वाले अवसरों को समझना चाहिए। श्री गोयल ने भारत के व्यापार, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के अंतर्राष्ट्रीयकरण के महत्व के साथ-साथ एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि भारत को वर्तमान गति से विकास जारी रखना है, विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनना है और वैश्विक प्रौद्योगिकी महाशक्ति के रूप में उभरना है, तो ये क्षेत्र और भी महत्वपूर्ण हो जाएंगे। 

उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम और शिक्षण शैलियों का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और भारत के मुक्त व्यापार समझौतों जैसे विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए ताकि छात्र वैश्विक अर्थव्यवस्था में उपलब्ध अवसरों को समझ सकें।

श्री गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून, व्यापार नियमों और मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले लाभों को समझने वाले छात्र अमृतकाल के दौरान देश को विकसित भारत की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। श्री गोयल ने कहा कि जैसे-जैसे संस्थान आधुनिक शिक्षण तकनीकों को अपनाएंगे, सुविधाओं का उन्नयन करेंगे और शिक्षकों की वैश्विक रुझानों की समझ में सुधार करेंगे, भारतीय छात्र विदेश के बजाय भारत में ही अध्ययन करना पसंद करेंगे।

साथ ही, भारत विश्व भर से छात्रों को आकर्षित करना शुरू कर देगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में भारत में आने वाले प्रत्येक एक अंतरराष्ट्रीय छात्र के मुकाबले विदेश जाने वाले 28 भारतीय छात्रों का वर्तमान अनुपात उलट जाएगा, और भारत अपने संस्थानों में अध्ययन करने के लिए लगभग 13 लाख विदेशी छात्रों को आकर्षित करेगा, जबकि केवल कुछ ही भारतीय छात्र विदेश जाएंगे।

केन्‍द्रीय मंत्री ने अपने संबोधन का समापन उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण के दृष्टिकोण को साकार करने और 2047 तक भारत को एक वैश्विक शिक्षा गंतव्य में बदलने के लिए शिक्षा जगत, सरकार और उद्योग के बीच अधिक सहयोग को प्रोत्साहित करते हुए किया।

 

Tags: Piyush Goyal , Commerce and Industry Minister , BJP , Bharatiya Janata Party , Indian Institute of Foreign Trade , IIFT , Vice Chancellors Conclave

 

 

related news

 

 

 

Photo Gallery

 

 

Video Gallery

 

 

5 Dariya News RNI Code: PUNMUL/2011/49000
© 2011-2026 | 5 Dariya News | All Rights Reserved
Powered by: CDS PVT LTD