पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा में मंगलवार को इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी तथा एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट फॉर एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “न्यूक्लियर एनर्जी एंड क्रिटिकल मिनरल्स: एक्सप्लोरेशन, मिथ्स एंड सोसाइटल इम्पैक्ट–2026” का उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में देशभर के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
सम्मेलन का उद्देश्य भारत में परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों और उनके सामाजिक महत्व पर चर्चा करना है। उद्घाटन सत्र में बठिंडा के उपायुक्त श्री राकेश धीमान, आईएएस मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. वी.के. मंचंदा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
शुरुआत में अनुसंधान एवं विकास निदेशक प्रो. अंजना मुंशी ने कहा कि नेट-जीरो उत्सर्जन के लिए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का संतुलित उपयोग जरूरी है और परमाणु ऊर्जा व क्रिटिकल मिनरल्स सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संयोजक प्रो. समीर दुरानी ने भारत की परमाणु ऊर्जा और नई स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में प्रगति की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ निरंतर बिजली आपूर्ति के लिए परमाणु ऊर्जा विश्वसनीय है और भारत 2047 तक लगभग 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है, जिसमें स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विशिष्ट अतिथि प्रो. वी.के. मंचंदा ने वैश्विक स्तर पर परमाणु ऊर्जा की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दुनिया में 400 से अधिक परमाणु रिएक्टर संचालित हो रहे हैं और कई नए रिएक्टर निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने नेशनल न्यूक्लियर मिशन और शांति विधेयक-2025 जैसी राष्ट्रीय पहलों का उल्लेख करते हुए देश की परमाणु क्षमता को मजबूत करने और व्यापक भागीदारी को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने स्वास्थ्य, कृषि और खाद्य संरक्षण में परमाणु तकनीकों के योगदान को भी रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि श्री राकेश धीमान ने राष्ट्रीय महत्व के विषय पर सम्मेलन आयोजित करने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध और नवाचार ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने और देश के विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में होने वाली चर्चाएं “विकसित भारत” के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने कहा कि परमाणु ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स देश के तकनीकी और आर्थिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने भारत में उपलब्ध यूरेनियम, थोरियम सहित प्रमुख खनिज संसाधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक खनिज अन्वेषण के लिए विभिन्न विज्ञान क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग जरूरी है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत न्यूक्लियर साइंस जैसे नए विषयों को बढ़ावा दिया जा रहा है और विश्वविद्यालय भविष्य उन्मुख नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है, जिससे युवाओं के कौशल और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कार्यक्रम का समापन कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
सम्मेलन के अंतर्गत छह तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें नेशनल न्यूक्लियर मिशन, क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, सतत परमाणु ऊर्जा एवं अपशिष्ट प्रबंधन, उन्नत रिएक्टर तकनीक, न्यूक्लियर मेडिसिन, विकिरण के सामाजिक उपयोग तथा खनिज प्रसंस्करण जैसे विषयों पर चर्चा होगी। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन सहित देश की प्रमुख संस्थाओं के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ इस सम्मेलन में व्याख्यान दे रहे हैं तथा विचार-विमर्श में भाग ले रहे हैं।