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डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुवाहाटी में पीआरसी कार्यशाला में शांति और विकास के बीच आपसी संबंध पर प्रकाश डाला

मोदी सरकार का सबसे बड़ा योगदान पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ कर मुख्यधारा में लाना है : डॉ. जितेंद्र सिंह

Dr Jitendra Singh, Bharatiya Janata Party, BJP, Union Minister of Earth Sciences
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गुवाहाटी , 23 Feb 2026

Last updated on: Feb 24, 2026, 11:12 IST

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज असम के गुवाहाटी में आयोजित एक सेवानिवृत्ति पूर्व परामर्श (पीआरसी) कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा, “विकास और शांति का परस्पर संबंध है। जब शांति कायम होती है, तो विकास में तेजी आती है, और जब विकास लोगों तक पहुंचता है, तो यह शांति को मजबूत करता है।”

कार्यशाला का आयोजन पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने असम सरकार के सहयोग से किया, जिसमें वरिष्ठ जन प्रतिनिधियों, राज्य प्रशासन के अधिकारियों, एसबीआई सहित बैंकिंग संस्थानों और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच रहे कर्मचारियों ने भाग लिया। यह इस वर्ष राज्य में आयोजित दूसरा ऐसा कार्यक्रम था, जो असम सरकार के प्रदान किए गए मजबूत प्रशासनिक समर्थन और प्रभावी समन्वय को दर्शाता है।

पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर क्षेत्र में आए बदलावों का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने 2014 से पहले इस क्षेत्र को देखा है, वे ही इस बदलाव की व्यापकता को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि गुवाहाटी और शिलांग बीच बेहतर सड़क संपर्क, पूर्वोत्तर के उन राज्यों तक रेल सेवाओं का विस्तार जहां पहले कभी रेल संपर्क नहीं था, पूरे क्षेत्र में नए हवाई अड्डे, भूपेन हजारिका पुल सहित प्रमुख पुल और बढ़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था, ये सभी मिलकर विकास और एकीकरण के एक नए युग को दर्शाते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि पूर्वोत्तर को मुख्यधारा में लाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक है, जिन्होंने विकास पहलों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करने के लिए इस क्षेत्र का अक्सर दौरा किया है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि जीवन प्रत्याशा में वृद्धि और स्वास्थ्य मानकों में सुधार के कारण देश में पेंशनभोगियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। 

इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्ति पूर्व परामर्श पहल का उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अनुभव, विशेषज्ञता और ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण की दिशा में लगाना है। उन्होंने कहा कि आज 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले व्यक्ति अक्सर अपने स्वास्थ्य और व्यावसायिक क्षमता के चरम पर होते हैं, और उनकी क्षमता समाज के लिए व्यर्थ नहीं जानी चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए व्यापक पेंशन सुधार किए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पहले पेंशनभोगियों को कई जटिल प्रक्रियाओं, जैसे कि अनेक अनापत्ति प्रमाण पत्र और लंबी कागजी कार्रवाई के कारण अक्सर देरी का सामना करना पड़ता था। आज, संपूर्ण डिजिटल प्रक्रिया के कारण पेंशन संबंधी कागजात काफी पहले ही तैयार हो जाते हैं और प्रक्रिया का अधिकांश भाग ऑनलाइन हो गया है, जिससे पहले वाली देरी में काफी कमी आई है।

उन्होंने बताया कि सीसीएस (पेंशन) नियमों को तर्कसंगत और सरल बना दिया गया है। विभिन्न रंगों वाले पेंशन प्रपत्रों को एक एकीकृत डिजिटल प्रपत्र में बदल दिया गया है। औपनिवेशिक काल से चले आ रहे अप्रचलित प्रावधानों को हटा दिया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अविवाहित, तलाकशुदा और अलग रह रही बेटियों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के बिना पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र बनाया गया है, और किसी कर्मचारी की दस वर्ष की सेवा पूरी होने से पहले मृत्यु हो जाने पर भी पारिवारिक पेंशन प्रदान की जाएगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने लापता कर्मचारियों से संबंधित नियम में संशोधन का भी उल्लेख किया, जिसके तहत पहले परिवारों को पेंशन लाभ प्राप्त करने के लिए सात साल तक इंतजार करना पड़ता था। इस प्रावधान को संशोधित किया गया है ताकि कठिनाई को कम किया जा सके, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां पहले कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियां थीं।

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह अभियान एक जन आंदोलन बन गया है। हजारों शहरों में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं और बुजुर्ग पेंशनभोगियों की सुविधा के लिए, विशेष रूप से उन मामलों में जहां बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण विफल हो सकता है, फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी शुरू की गई है।

उन्होंने कहा कि लाखों पेंशनभोगियों को इस सुविधा से लाभ हुआ है, जिससे वे मोबाइल उपकरणों का उपयोग करके अपने घरों से आराम से जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ने ऑनलाइन पेंशन प्रक्रिया के लिए “भविष्य” पोर्टल, पेंशन वितरण करने वाले बैंकों को एकल-खिड़की प्रणाली में एकीकृत करना, मौके पर ही शिकायतों के निवारण के लिए नियमित पेंशन अदालतों का आयोजन और बढ़ी हुई अनुदान राशि के माध्यम से पेंशनभोगी कल्याण संघों को मजबूत करने जैसी पहलों पर भी प्रकाश डाला। 

इन प्रयासों के माध्यम से दशकों से लंबित मामलों सहित कई लंबित मामलों का समाधान किया गया है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि सरकार का दृष्टिकोण केवल नए नियम बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन पुराने और अनावश्यक नियमों को हटाने पर भी केंद्रित है जो आज के सामाजिक संदर्भ में अप्रासंगिक हो चुके हैं। 

उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे स्वयं को विकसित भारत की दिशा में भारत की यात्रा में सक्रिय भागीदार मानें और सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज को अपना अनुभव प्रदान करें। डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि सेवानिवृत्ति पूर्व परामर्श पहल सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को अपने सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन की स्पष्टता और उद्देश्यपूर्ण योजना बनाने में मदद करेगी। इसके साथ ही, सरकार को राष्ट्र निर्माण में उनकी निरंतर भागीदारी से लाभ उठाने में भी सक्षम बनाएगी।

 

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