रयात बाहरा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज एंड साइंसेज के देखरेख में शोध, नवाचार और उद्यमिता पर पांच दिवसीय फैकल्टी विकास कार्यक्रम (एफडीपी) का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अपने पांचवें और अंतिम दिन चांसलर गुरविंदर सिंह बाहरा की सरपरस्ती में संपन्न हुआ।
आयोजन टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए गुरविंदर सिंह बाहरा ने शैक्षणिक संस्थानों में मजबूत शोध और नवाचार संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने फैकल्टी सदस्यों को ज्ञान सृजन में सक्रिय योगदान देने तथा वैश्विक शैक्षणिक और औद्योगिक मानकों को पूरा करने के लिए नवाचार-आधारित शिक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित किया।
रयात बाहरा विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) संजय कुमार ने तेजी से विकसित हो रहे वैश्विक परिदृश्य में शोध और नवाचार की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को उभरती सामाजिक और तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रतिबद्धता, रचनात्मकता और उद्देश्य की भावना के साथ शोध करने के लिए प्रेरित किया।
प्रो. (डॉ.) सतीश कुमार, प्रो वाइस-चांसलर, ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए मजबूत शोध पारितंत्र (इकोसिस्टम) का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने फैकल्टी और विद्यार्थियों में शोध एवं नवाचार पहलों को सुदृढ़ करने के लिए लगातार अत्याधुनिक सुविधाएं और संस्थागत सहयोग प्रदान किया है।
प्रो. (डॉ.) सिमरजीत कौर, निदेशक-आईक्यूएसी, ने शोध नैतिकता पर एक सारगर्भित सत्र प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने उन्नति और मान्यता के लिए अपनाई जाने वाली अनैतिक प्रथाओं के प्रति आगाह किया। उन्होंने प्रयोगशाला अनुसंधान, क्षेत्रीय अध्ययनों और मानव प्रतिभागियों से जुड़े शोध में ईमानदारी और नैतिक मानकों को बनाए रखने पर बल दिया।
एफडीपी के दौरान प्रख्यात वक्ताओं द्वारा विशेषज्ञ व्याख्यानों की श्रृंखला प्रस्तुत की गई। प्रो. (डॉ.) रमन कुमार ने बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर विस्तृत सत्र का संचालन किया, जिसमें ड्राफ्टिंग, फाइलिंग प्रक्रियाओं और पेटेंट संबंधी नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. हरसिमरन ने स्टार्टअप्स और उद्यमिता पर मार्गदर्शन देते हुए नवाचारी विचारों को सफल उद्यमों में परिवर्तित करने की रणनीतियों तथा विभिन्न वित्तीय अवसरों की जानकारी दी।
डॉ. सुखबीर सिंह ने गुणवत्तापूर्ण शोध पत्रिकाओं के चयन, भ्रामक (प्रिडेटरी) प्रकाशनों से सावधान रहने तथा स्कोपस, वेब ऑफ साइंस और एससीआई जैसे प्रतिष्ठित इंडेक्सिंग प्लेटफॉर्म्स के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. पवन ढैया ने आधुनिक ड्रग डिजाइन पर व्याख्यान देते हुए समकालीन औषधि अनुसंधान में अपनाई जाने वाली अंतर्विषयक दृष्टिकोणों की चर्चा की।
कार्यक्रम का समापन प्रो. (डॉ.) सिमरजीत कौर द्वारा संचालित रोचक प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसके बाद डॉ. पारुल धर ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया।