भारत के पूर्व क्रिकेटर अजय जडेजा ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और चुस्त फील्डिंग के लिए शोहरत बटोरी। उन्होंने 1990 के दशक में भारत के लिए कई यादगार पारियां खेलीं, जिसके बाद क्रिकेट विश्लेषक और कमेंटेटर के रूप में भी सक्रिय रहे। यह खिलाड़ी जामनगर राजघराने का उत्तराधिकारी भी है। वह रणजीतसिंहजी और दलीपसिंहजी के परिवार से हैं, जिनके सम्मान में 'रणजी ट्रॉफी' और 'दलीप ट्रॉफी' का नाम रखा गया है।
1 फरवरी 1971 को गुजरात के जामनगर में जन्मे अजयसिंहजी जडेजा ने 1988/89 में डोमेस्टिक करियर शुरू किया। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें फरवरी 1992 में टीम इंडिया की ओर से डेब्यू का मौका मिला। अजय जडेजा ने मिडिल और आखिरी ओवरों में तेज और स्मार्ट बैटिंग करते हुए कई मुकाबले भारत के पक्ष में मोड़े।
वर्ल्ड कप 1996 में पाकिस्तान के खिलाफ क्वार्टर-फाइनल में उनकी पारी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 9 मार्च 1996 को खेले गए इस मुकाबले में अजय जडेजा ने 25 गेंदों का सामना करते हुए 2 छक्कों और 4 चौकों के साथ 45 रन की पारी खेलकर भारत के स्कोर को 287/8 तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया था। इसके जवाब में पाकिस्तानी टीम 9 विकेट खोकर 248 रन ही बना सकी और टीम इंडिया ने 39 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
अजय जडेजा ने अपने वनडे करियर में 196 मैच खेले, जिसमें 37.47 की औसत के साथ 5,359 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 6 शतक और 30 अर्धशतक निकले। हालांकि, पेस और स्विंग के सामने कमजोरी की वजह से वह अपने करियर में सिर्फ 15 ही टेस्ट मैच खेल सके, जिसमें 4 अर्धशतकों के साथ 576 रन जुटाए। 9 अप्रैल 1999 को जडेजा ने कोका-कोला कप में इंग्लैंड के विरुद्ध महज 1 ओवर गेंदबाजी की, जिसमें सिर्फ 3 रन देकर 3 विकेट निकाले।
जडेजा ने 13 वनडे मुकाबलों में टीम इंडिया की कमान संभाली। इस दौरान 44 की औसत के साथ 396 रन बनाए, जिसमें 1 शतक और 2 अर्धशतक शामिल थे। साल 2000 में मैच फिक्सिंग के आरोप के बाद जडेजा के करियर पर ब्रेक लगा। जांच के बाद उन पर 5 साल का बैन लगाया गया, जिसका जडेजा ने विरोध किया। हालांकि, साल 2003 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस प्रतिबंध को हटा दिया।
इस बीच जडेजा ने एक्टिंग करियर की शुरुआत की। साल 2006 में डांस शो 'झलक दिखला जा' में भी हिस्सा लिया। नवंबर 2004 में, दिल्ली हाई कोर्ट ने जडेजा की इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने की इजाजत मांगने वाली अर्जी को खारिज कर दिया। हालांकि, बाद में एक डिवीजन बेंच ने उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलने की इजाजत दे दी। इसके बाद जडेजा दिल्ली लौट आए, जहां उन्हें कप्तान बनाया गया। जडेजा ने साल 2005 में राजस्थान के कप्तान और कोच के तौर पर दोहरी भूमिका निभाई।