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हम सबको जोड़ती है हिन्दू पहचान : मोहन भागवत

Mohan Bhagwat, BJP, Bharatiya Janata Party, RSS Supremo, Rashtriya Swayamsevak Sangh
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5 Dariya News

भोपाल , 02 Jan 2026

Last updated on: Jan 03, 2026, 12:47 IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि हमारे मत-पंथ, सम्प्रदाय, भाषा, और जाति अलग हो सकती हैं, लेकिन हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है। हम सबकी एक संस्कृति और धर्म है। हम सबके पूर्वज समान हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 'प्रमुख जन गोष्ठी' में सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदुस्तान में चार प्रकार के हिन्दू रहते हैं: एक, जो कहते हैं कि गर्व से कहो हम हिन्दू हैं; दो, जो कहते हैं कि गर्व की क्या बात है, हम हिन्दू हैं; तीन, जो कहते हैं कि जोर से मत बोलो, आप घर में आकर देखो, हम हिन्दू ही हैं; और चार, जो भूल गए हैं कि हम हिन्दू हैं।

उन्होंने कहा कि जब-जब हम यह भूल जाते हैं कि हम हिन्दू हैं, तो विपत्ति आती है। भारत का इतिहास देख लीजिए। इसलिए हिन्दू को जगाना और संगठित करना आवश्यक है। हमें समझना होगा कि हिन्दू धार्मिक पहचान से बढ़कर, स्वभाव और प्रकृति है। धर्म को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ रिलीजन नहीं है। धर्म का अर्थ पूजा-पद्धति नहीं है। 

धर्म सबको साथ लेकर चलता है। सबका उत्थान करता है। धर्म सबके लिए आनंददायक है। स्वभाव धर्म है। कर्तव्य धर्म है। आपस में सद्भावना रखकर सब लोग चलें, इसके लिए जो संयम चाहिए, वह धर्म है। सरसंघचालक ने कहा कि संघ के बारे में नैरेटिव बहुत चलते हैं। कई बार किसी को जानने के लिए उसकी तुलना उसके जैसे किसी से करते हैं। 

लेकिन जो अनूठा हो, उसकी तुलना नहीं की जा सकती। संघ दुनिया में अनूठा संगठन है। इसलिए संघ को किसी से तुलना करके नहीं समझा जा सकता। उन्होंने कहा कि संघ गणवेश पहनकर पथ संचलन करता है तो यह पैरा मिलिट्री फोर्स नहीं है। सेवा कार्य चलाता है, उन्हें देखकर यह नहीं मानना चाहिए कि संघ समाजसेवी संगठन है। 

संघ को लेकर संघ हितैषी और संघ विरोधी, दोनों ने ही कई ऐसी बातें समाज में चलाई हैं, जो संघ नहीं है। इसलिए शताब्दी वर्ष पर विचार बनाया कि समाज के सामने संघ की सही जानकारी जानी चाहिए। सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि संघ किसी की प्रतिक्रिया में शुरू हुआ संगठन नहीं है। संघ की किसी से प्रतिस्पर्धा भी नहीं है। 

संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने देश-समाज के हित में चलने वाले सभी प्रकार के कार्यों में सहभागिता की। स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया। यह सब काम करते हुए वे चिंतन-मंथन करते थे। डॉ. भागवत ने बताया, संघ ने प्रारंभ से तय किया कि समाज में 'प्रेशर ग्रुप' के तौर पर संगठन खड़ा नहीं करना है, अपितु सम्पूर्ण हिन्दू समाज का ही संगठन करना है, क्योंकि समाज ही किसी देश का भाग्य निर्धारित करता है। 

नेता, नीति, और अवतार तो सहायक हो सकते हैं। देश को बड़ा बनाने में गुणसम्पन्न समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि समाज को बदलना है तो वातावरण बदलना पड़ता है। संघ शाखा के माध्यम से ऐसे कार्यकर्ताओं का समूह खड़ा करने का काम कर रहा है जो राष्ट्रीय वातावरण बनाएं। सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि उपेक्षा के बावजूद संघ के कार्यकर्ता निराश नहीं हुए। 

उपेक्षा और विरोध के बाद भी भारत माता के प्रति आस्था रखते हुए आगे बढ़ते रहे। दुनिया का ऐसा कोई संगठन नहीं है, जिसने इतना विरोध सहा हो, जितना संघ ने सहा है। विपरीत परिस्थितियों में अपना सबकुछ दांव पर लगाकर कार्यकर्ताओं से संघ का कार्य किया है। सब प्रकार का अभाव और विरोध सहकर स्वयंसेवकों ने संघ को आज यहां तक पहुंचाया है, जहां अब सब संघ पर विश्वास करते हैं।

 

Tags: Mohan Bhagwat , BJP , Bharatiya Janata Party , RSS Supremo , Rashtriya Swayamsevak Sangh

 

 

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