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नरेंद्र मोदी ने डब्ल्यूएचओ समिट में पारंपरिक चिकित्सा में भारत की ग्लोबल लीडरशिप पर ज़ोर दिया

भारत का पारंपरिक चिकित्सा में नेतृत्व विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्राचीन ज्ञान के संगम का प्रतीक है: प्रधानमंत्री

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नई दिल्ली , 19 Dec 2025

Last updated on: Dec 20, 2025, 15:09 IST

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दूसरे वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों के साक्ष्य-आधारित, एकीकृत और जन-केंद्रित घटक के रूप में पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने में भारत के बढ़ते नेतृत्व पर जोर दिया। 

प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक सशक्त मंच बताया, जहां विश्व भर के नेताओं, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों और चिकित्सकों के बीच गंभीर और रचनात्मक विचार-विमर्श हुए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर गर्व किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र गुजरात के जामनगर में स्थापित किया गया है। 

उन्होंने कहा कि 2022 में वैश्विक समुदाय द्वारा भारत को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यह केंद्र तेजी से सहयोग, अनुसंधान, विनियमन और क्षमता निर्माण के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है, जो भारत के नेतृत्व में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है। श्री मोदी ने पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक सहयोगी मंच के रूप में कार्य करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन के विषय, “संतुलन की बहाली: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और अभ्यास” पर जोर देते हुए कहा कि आयुर्वेद में वर्णित समग्र स्वास्थ्य का आधार संतुलन है। उन्होंने बताया कि जीवनशैली संबंधी विकारों से लेकर दीर्घकालिक रोगों तक, कई आधुनिक स्वास्थ्य समस्याएं असंतुलन के विभिन्न रूपों में निहित हैं, और संतुलन की बहाली न केवल एक वैश्विक मुद्दा बल्कि एक वैश्विक आवश्यकता बन गई है। 

उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने के लिए, विशेष रूप से तकनीकी परिवर्तन से प्रेरित तेजी से बदलती जीवनशैली के मद्देनजर, त्वरित और समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया। श्री मोदी ने विश्वास और विश्वसनीयता स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि पारंपरिक चिकित्सा को वैज्ञानिक मान्यता, वैश्विक स्तर पर स्वीकृत नियामक मानकों और डिजिटल नवाचार द्वारा समर्थित होना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि आज शुरू की गई पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय जैसी पहल वैज्ञानिक आंकड़ों और नीतिगत संसाधनों तक समान वैश्विक पहुंच सुनिश्चित करेगी। वैश्विक जन स्वास्थ्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से विश्वास, सम्मान और साझा जिम्मेदारी के साथ पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने परंपरागत चिकित्सा की सुरक्षा और प्रमाणिक आधार को लेकर प्राय: व्‍यक्‍त की जाने वाली चिंताओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अनुसंधान और प्रमाणीकरण के माध्यम से इन मुद्दों को हल करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने अश्वगंधा का उदाहरण देते हुए कहा कि यह एक ऐसा जड़ी-बूटी है जिसकी समय-समय पर उपयोगिता सिद्ध हुई है और जिसने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। 

उन्होंने यह भी कहा कि भारत परंपरागत चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य सेवा के साथ एकीकृत करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें कैंसर के एकीकृत उपचार को मजबूत करने और प्रमाणिक दिशा-निर्देश विकसित करने की पहल शामिल है। इस प्रकार, परंपरागत चिकित्सा की भूमिका को स्वास्थ्य से परे सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक विस्तारित किया जा रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की सराहना की। उन्होंने भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान वैश्विक सहयोग के लिए प्रधानमंत्री के आह्वान को याद किया और कहा कि इससे अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया मिली। 

डॉ. टेड्रोस ने कहा कि प्रधानमंत्री का 'एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य' का दृष्टिकोण पारंपरिक चिकित्सा के मूल सिद्धांतों के बहुत करीब है, जो संतुलन, रोकथाम और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर जोर देता है। डॉ. टेड्रोस ने दूरदृष्टि को क्रियान्वयन में बदलने के लिए भारत की सराहना करते हुए कहा कि पारंपरिक चिकित्सा को विरासत से साक्ष्य-आधारित अभ्यास की ओर ले जाने में भारत विश्‍व स्‍तर पर अग्रणी देश है। 

उन्होंने आयुष मंत्रालय की स्थापना और जामनगर में डब्ल्यूएचओ के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण पहलों पर का उल्‍लेख करते हुए कहा कि इन प्रयासों से पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों, अनुसंधान और नीति में एकीकृत करने में मदद मिली है जिससे सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और विश्व स्तर पर सतत विकास में योगदान मिला है। 

उन्होंने दिल्ली घोषणा को अपनाने का भी स्वागत किया और इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है कि पारंपरिक चिकित्सा अतीत की कोई पुरानी बात नहीं है और न ही हाशिये तक सीमित कोई वैकल्पिक चिकित्सा है बल्कि एक जीवंत और विकसित विज्ञान है जो आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जेपी नड्डा ने पारंपरिक चिकित्सा को निरंतर बढ़ावा देने और इसे एक विश्वसनीय एवं विश्व स्तर पर स्वीकृत स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने वैज्ञानिक, साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोणों के माध्यम से आयुष को आगे बढ़ाने और निवारक, प्रोत्साहक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के लिए इसे आधुनिक चिकित्सा के साथ एकीकृत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर बल दिया।

श्री नड्डा ने संरचनात्मक सुधारों का उल्‍लेख करते हुए कहा कि आयुष को अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्‍थान (एम्‍स) सहित प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में समर्पित आयुष ब्लॉकों के माध्यम से सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि इस समन्वय ने स्वास्थ्य प्रणालियों को अलग-अलग काम करने के बजाय तालमेल से काम करने में सक्षम बनाया है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य के बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं। 

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिखर सम्मेलन के परिणाम इस क्षेत्र और उससे बाहर की स्वास्थ्य प्रणालियों को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेंगे। आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने वैश्विक नेताओं, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों, उद्योग जगत के हितधारकों और सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन वैश्विक स्वास्थ्य चर्चा में एक निर्णायक बदलाव लाया है, जिससे पारंपरिक चिकित्सा को जन-केंद्रित, निवारक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल के एक आवश्यक स्तंभ के रूप में मजबूती से स्थापित किया गया है। श्री जाधव ने भारत के नेतृत्व का उल्‍लेख करते हुए जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ-ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन को वैश्विक सहयोग, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। 

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समग्र जीवनशैली पर आधारित आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक मान्यता, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से लगातार समर्थन मिल रहा है। एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को भविष्य बताते हुए उन्होंने सदस्य देशों से डब्ल्यूएचओ के साथ साझेदारी में शिखर सम्मेलन के परिणामों को ठोस राष्ट्रीय कार्यों में परिणत करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक ने संयुक्त रूप से नई दिल्ली में डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय भवन का उद्घाटन किया जिसमें डब्ल्यूएचओ का भारत स्थित कार्यालय भी होगा। इस नए परिसर को दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने, नियामक सहयोग को मजबूत करने और क्षमता निर्माण के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है जिससे विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ भारत की साझेदारी और भी गहरी होगी।

प्रधानमंत्री ने पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय का भी शुभारंभ किया जो पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित वैज्ञानिक आंकड़ों, नीतिगत दस्तावेजों और प्रमाणित ज्ञान को संरक्षित करने और सभी के लिए समान पहुंच प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच है। उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा खोज स्थल का भी दौरा किया जो भारत और विश्व भर की पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान प्रणालियों की विविधता, गहराई और समकालीन प्रासंगिकता को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी है। 

इसमें प्राचीन ज्ञान और आधुनिक नवाचार के संगम को उजागर किया गया है। श्री मोदी ने योग के प्रचार-प्रसार और विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार प्रदान किए जिसमें अनुकरणीय सेवा के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तियों और संगठनों को सम्मानित किया गया। उन्होंने आयुष क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को रेखांकित करते हुए प्रमुख आयुष पहलों का शुभारंभ किया, जिनमें आयुष ग्रिड के प्रमुख डिजिटल पोर्टल के रूप में माई आयुष इंटीग्रेटेड सर्विसेज पोर्टल (एमएआईएसपी), गुणवत्तापूर्ण आयुष उत्पादों और सेवाओं के लिए वैश्विक मानक के रूप में परिकल्पित आयुष मार्क, अश्वगंधा पर एक स्मारक डाक टिकट का विमोचन, योग प्रशिक्षण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की तकनीकी रिपोर्ट और "जड़ों से वैश्विक पहुंच तक: आयुष में परिवर्तन के 11 वर्ष" नामक पुस्तक का विमोचन शामिल हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दूसरे वैश्विक परंपरागत चिकित्सा शिखर सम्मेलन का समापन दिल्ली घोषणापत्र को अपनाने के साथ हुआ, जिसमें परंपरागत चिकित्सा को एक साझा जैव-सांस्कृतिक विरासत के रूप में पुनः स्थापित किया गया और सदस्य देशों ने डब्ल्यूएचओ की वैश्विक परंपरागत चिकित्सा रणनीति 2025-2034 के अनुरूप साक्ष्य, विनियमन, एकीकरण और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। शिखर सम्मेलन ने संवाद से कार्रवाई की ओर एक स्पष्ट बदलाव को चिह्नित किया है। इससे भारत के नेतृत्व और सभी के लिए सुरक्षित, प्रभावी, न्यायसंगत और सतत स्वास्थ्य सेवा के प्रति साझा वैश्विक प्रतिबद्धता को बल मिला।

 

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