पंजाब भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब विश्वविद्यालय मामले में केंद्र सरकार के ताज़ा फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इस निर्णय से पंजाबवासियों की भावनाओं का पूरा सम्मान किया गया है। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष शर्मा ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा 28 अक्टूबर वाले नोटिफिकेशन को वापस लेने का निर्णय बेहद संवेदनशील और जिम्मेदार कदम है।
उन्होंने कहा कि आप सरकार ने इस मुद्दे पर जनता को गुमराह करने की कोशिश की, जबकि असल में पंजाब भाजपा ही है जिसने पंजाबियों की भावनाएँ केंद्र तक पहुँचाईं। डॉ. शर्मा ने बताया कि 28 अक्टूबर, 2025 को केंद्र सरकार ने सिनेट और सिंडिकेट में सुधारों के उद्देश्य से नोटिफिकेशन जारी किया था, परंतु पंजाब के लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए केंद्र ने 4 नवंबर को इसे वापस लिया।
साथ में नया नोटिफिकेशन जारी कर उसे अनिश्चित समय तक स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा कि यह नोटिफिकेशन न वर्तमान में लागू होगा और न ही भविष्य में किसी भी स्थिति में लागू किया जाएगा। भाजपा का मत शुरू से स्पष्ट रहा है कि पंजाब विश्वविद्यालय के हितों और पंजाब के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं होगा।
आप सरकार पर तीखा प्रहार:
डॉ. शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री और पंजाब के शिक्षा मंत्री स्वयं पंजाब विश्वविद्यालय की सिनेट के एक्स ऑफिशियो सदस्य हैं, लेकिन आज तक एक भी बैठक में शामिल नहीं हुए। इतना ही नहीं, विधानसभा द्वारा नामित दो विधायकों ने भी कोई बैठक अटेंड नहीं की।
सुधार प्रक्रिया कांग्रेस काल में ही शुरू हुई थी:
उन्होंने कहा कि यह सुधार प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के समय वाइस चांसलर अरुण ग्रोवर के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उस समय बनाई गई समिति में पंजाब सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल थे। उन्होंने पूछा कि जब समिति बैठकों में निर्णय ले रही थी, तब पंजाब सरकार का रुख क्या था?
क्या उन्होंने सुधारों का विरोध किया या समर्थन? तीन सालों तक न तो केंद्र को कोई पत्र भेजा गया और न ही राष्ट्रपति से मिलकर अपनी बात रखी गई।
केंद्र से 3229 करोड़, पंजाब सरकार से सिर्फ़ 538 करोड़ :
डॉ. शर्मा ने आँकड़े जारी करते हुए बताया कि 2014 से अब तक केंद्र सरकार ने पंजाब विश्वविद्यालय को कुल 3229 करोड़ की ग्रांट दी है, जबकि पंजाब सरकार ने केवल 538 करोड़ ही दिए हैं। केंद्र सरकार अपना 60% हिस्सा लगातार पूरा कर रही है जबकि पंजाब सरकार 40% की जगह सिर्फ़ 20% ही दे रही है।
"सिर्फ़ नारे नहीं, ज़िम्मेदारी भी निभाएँ" :
डॉ. शर्मा ने कहा कि इस समय पंजाब सरकार पर विश्वविद्यालय के 250 करोड़ रुपये बकाया हैं, जिनमें पेंशन, छात्रावास और छात्रवृत्ति योजनाओं के भुगतान शामिल हैं। आप सरकार सिर्फ़ राजनीति और दिखावे की बजाय अपनी वित्तीय ज़िम्मेदारी निभाए और तुरंत 250 करोड़ की बकाया राशि जारी करे।
अन्य विश्वविद्यालयों में भी लोकतांत्रिक ढांचा आवश्यक :
जैसे पंजाब विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक सिनेट और सिंडिकेट संरचना है, वैसे ही अन्य विश्वविद्यालयों – गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर, पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला, पी.ए.यू. लुधियाना और तकनीकी विश्वविद्यालयों में भी लोकतांत्रिक गवर्निंग बॉडी बनाई जानी चाहिए, ताकि छात्रों की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
अंत में उन्होंने कहा कि 28 अक्टूबर वाला नोटिफिकेशन अब मुद्दा नहीं रहा, और पंजाब भाजपा यह सुनिश्चित करेगी कि यह भविष्य में भी लागू न हो। लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को जवाब देना होगा कि तीन वर्षों में उन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी क्यों नहीं निभाई और 250 करोड़ रुपये की लंबित राशि कब जारी की जाएगी।