सीजीसी लांडरां के चंडीगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज और कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग के एप्लाइड साइंसेज़ डिपार्टमेंट ने जॉइंटली “इनोवेटिव सोल्यूशन्स फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी" विषय पर दो दिवसीय इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन एडवांस्ड सस्टेनेबिलिटी (आईसीऐएस - 2025) का आयोजन किया। इस कार्यक्रम ने विश्वभर से रिसर्चर्स और एक्सपर्ट्स को एक साथ लाकर उभरती एनवायर्नमेंटल और एनर्जी चैलेंजेज पर चर्चा की और सस्टेनेबल इनोवेशन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान किया।
सम्मेलन का उद्घाटन चीफ गेस्ट के रूप में (डॉ.) हितेश शर्मा, रजिस्ट्रार, एनआईटी दिल्ली तथा गेस्ट ऑफ़ ऑनर के रूप में डॉ. राकेश शारदा, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, आईसीएआर-सीआईपीएचईटी लुधियाना द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजदीप सिंह, कैंपस डायरेक्टर, सीजीसी लांडरां, एचोड़ी एवं संस्थान के डायरेक्टर्स के साथ उपस्थित रहे।
विश्वभर से प्राप्त 350 रिसर्च पेपर्स में से 110 रिसर्च पेपर्स को कठोर सहकर्मी-समीक्षा प्रक्रिया के बाद प्रकाशन के लिए स्वीकृत किया गया, जो इस आयोजन के मजबूत शैक्षणिक प्रभाव को दर्शाता है। समापन समारोह में प्रो. (डॉ.) सुभाष चंद्र मार्था, आईआईटी रोपड़ को गेस्ट ऑफ़ ऑनर के रूप में आमंत्रित किया गया।
उन्होंने ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी गोल्स को प्राप्त करने में रिसर्च और टेक्नोलॉजी की भूमिका पर एक महत्वपूर्ण संबोधन दिया। आईसीऐएस - 2025 की सफल समाप्ति पर विचार व्यक्त करते हुए, डॉ. राजदीप सिंह ने कहा, “इन दो दिनों के दौरान सामने आये आइडियाज, इनोवेशन और पार्टनरशिप्स के आदान-प्रदान ने हमारे दृष्टिकोण को पुनः पुष्टि की है कि शिक्षा और रिसर्च के माध्यम से सस्टेनेबिलिटी विकास में सार्थक प्रगति को नेतृत्व प्रदान किया जा सकता है।
यह सम्मेलन भविष्य के सहयोगों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है, जो एक ग्रीनर और फ्लेक्सिबल विश्व का निर्माण करेगा।“ डॉ. अनुज कुमार गुप्ता, डायरेक्टर - प्रिंसिपल, सीजीसी - सीओई ने भी सस्टेनेबल ग्रोथ के लिए इंटरडिसिप्लिनरी सहयोग को मजबूत करने पर मूल्यवान दृष्टिकोण साझा किए।
लेखकों और प्रतिभागियों को उनके योगदान के लिए प्रमाणपत्र प्रदान किए गए, जिसके बाद प्रो. (डॉ.) जोगिंदर सिंह, हेड, डिपार्टमेंट ऑफ़ एप्लाइड साइंसेज़, सीजीसी - सीओई ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम का समापन सकारात्मक माहौल में हुआ, जिसमें सस्टेनेबल फ्यूचर के निर्माण में रिसर्च ड्रिवेन इनोवेशन और कोलेबोरेशन की मज़बूती पर चर्चा की गयी।